05/06/2019    नजर के चश्मे से निजात दिलाने की सबसे उन्नत तकनीक
नई दिल्लीः कहा जाता है कि आंखें किसी के मन में झांकने का द्वार होती हैं। लेकिन कभी-कभी आंखों पर चढ़ा हुआ मोटा चश्मा इस द्वार के आड़े आ जाता है। बदलती जीवनशैली, भागदौड़ भरी जिंदगी, बहुत ज्यादा लंबे समय तक टीवी देखना या फिर घंटों कम्प्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल की स्क्रीन पर आंखें जमाए रखने से आंखों की रोशनी पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।

यही वजह है कि इन दिनों कमजोर नजर वाले लोगों के चश्मों के नंबर अप्रत्याशित रूप से बढ़ रहे हैं और उन्हें मजबूरन मोटे-मोटे चश्में या उलझन पैदा करने वाले कॉन्टेक्ट लेंस लगाने पड़ रहे हैं। लेकिन अब चिंता की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि दिल्ली-एनसीआर के प्रतिष्ठित आई सेंटरों में लगभग सभी प्रकार के नेत्र रोगों का इलाज संभव है।

कॉन्ट्यूरा विजनएक ऐसी ही अत्याधुनिक तकनीक हैजिसके माध्यम से लेजर विजन करेक्शन के द्वारा आंखों से नजर का चश्मा हटाया जा सकता है। यह तकनीक इतनी प्रभावशाली और सुरक्षित है कि इसने लेसिक और स्माइल जैसी तकनीकों को कहीं पीछे छोड़ दिया है। इस तकनीक के माध्यम से न केवल देखने की क्षमता शत-प्रतिशत (6/6) स्वस्थ हो जाती हैबल्कि उपचार के बाद रिकवरी भी बहुत तेजी से होती है।

 

आई 7, के लेजर रेफ्रैक्टिव आई सर्जन डा. राहिल चौधरी भारत के पहले ऐसे आई सर्जन हैंजिन्होंने इस तकनीक को देश में लांच किया है। इस क्रांतिकारी तकनीक के बारे में डा. राहिल चौधरी कहते हैं, ‘मेरा बहुत दृढ़ता से मानना है कि कॉन्ट्यूरा विजन तकनीक स्माइल और लेसिक तकनीक से कहीं ज्यादा बेहतर और उन्नत है। दरअसलस्माइल तकनीक को आये हुए 6 वर्ष हो चुके हैं और कॉन्ट्यूरा को आये अभी सिर्फ 2 वर्ष ही हुए हैं। कॉन्ट्यूरा विजनविजुअल एक्सेस का तो सही इलाज करता ही हैसाथ ही कॉर्निया की असामान्यताओं को दूर करते हुए बेहद स्पष्ट और शानदार ढंग से देखने की क्षमता प्रदान करता हैजो किसी भी अन्य लेजर तकनीक द्वारा संभव नहीं है।

 

कॉन्ट्यूरा विजन तकनीकटोपोग्राफी के सिद्धांत पर कार्य करती हैजिसमें कॉर्निया के सभी 22 हजार बिंदुओं को बारीकी से जांचा जाता हैजबकि लेसिक के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली वेवफ्रंट तकनीक पूरी आंख के सिर्फ 200 के आस-पास बिंदुओं को ही जांच पाती है।

 

हालांकि कॉन्ट्यूरा विजन सर्जरी के बिलकुल सटीक परिणाम सर्जरी के करीब 12 महीने बाद ही अच्छी तरह से सामने आते हैं। लेकिन अधिकांश मरीज सर्जरी के तुरंत बाद ही बिना किसी प्रकार के साइड इफेक्ट्स के बहुत बेहतर ढंग से देख पाने की क्षमता का अनुभव करने लगते हैं।

पारंपरिक लेसिक सर्जरी करवाने वाले लोग अक्सर सर्जरी के बाद प्रकाश के प्रति संवेदनशीलताढंग से न देख पानारात के समय पढ़ने या ड्राइव करते समय परेशानी की शिकायत करते हैं। लेकिन कॉन्ट्यूरा विजन सर्जरी के माध्यम से इस प्रकार की सभी शिकायतों का बहुत बेहतर ढंग से निदान किया जा सकता है।

कॉन्ट्यूरा विजन सर्जरी के माध्यम से अपना इलाज करवाने वाले अनुराग कुमार अपना सुखद अनुभव साझा करते हुए बताते हैं- मेरी आंखों की कॉन्ट्यूरा लेसिक द्वारा सर्जरी डा. राहिल चौधरी ने खुद की। हालांकि शुरूआत में मैं इस नयी तकनीक को लेकर थोड़ा दुविधा में था। लेकिन अब सर्जरी के छह महीने बाद मुझे अपने फैसले पर खुशी महसूस होती है। मैं 16 वर्षों से नजर का चश्मा पहन रहा था और इस क्रांतिकारी तकनीक की वजह से मुझे अब चश्मे से हमेशा के लिए छुटकारा मिल गया है और वह भी बहुत वाजिब दामों पर।

इसमें कोई दो राय नहीं कि लेजर तकनीक द्वारा आंखों का इलाज निश्चित रूप से थोड़ा महंगा है,लेकिन जब लोगों को आंखों का सबसे बेहतरीन इलाज चाहिये होता हैतो वह केवल लेजर आई सर्जरी ही करवाते हैं। यही वजह है कि अब ज्यादा से ज्यादा लोग आंखों की सर्जरी के लिए अन्य लेजर सर्जरियों की तुलना में कॉन्ट्यूरा विजन सर्जरी को प्राथमिकता देने लगे हैं।

हालांकि कॉन्ट्यूरा विजनएक सर्वाधिक उन्नत और प्रभावशाली तकनीक हैलेकिन चिकित्सा की दृष्टि से इसकी भी कुछ सीमाएं हैं। मसलनयह सर्जरी सिर्फ 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों पर ही की जा सकती है तथा जिन लोगों को कोई विशेष नाड़ी संबंधी रोग हो या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होउन्हें कॉन्ट्यूरा विजन सर्जरी करवाने की सलाह नहीं दी जाती है। इसके अलावा भी कुछ ऐसे मापदंड हैजिनके द्वारा यह चिकित्सक यह तय करते हैं कि किसी व्यक्ति पर यह सर्जरी करनी चाहिये या नहीं।

इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि आंखों की सर्जरी करवाने से पहले आप एक प्रमाणित लेसिक सर्जन के पास ही जाएंताकि वह जांच के बाद यह तय कर सके कि आपको किस प्रकार की लेसिक सर्जरी की आवश्यकता है। यदि आप कॉन्ट्यूरा विजन आई सर्जरी के लिए सटीक पात्र बन जाते हैं,तो यह जरूर सुनिश्चित करें कि आप अपनी सर्जरी सिर्फ प्रमाणित लाइसेंस युक्त नेत्र विशेषज्ञ क्लीनिक में प्रशिक्षित एवं अनुभवी लेसिक सर्जन द्वारा ही सर्जरी करवाएं। 




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