08/07/2016  सामाजिक सुरक्षा की नई सुबह
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के सोगादा गांव को प्रकृति ने बहुत सुंदर बनाया है। यह गांव पहाड़ियों से घिरा है। लेकिन पहाड़ियों से घिरा होना इस गांव के लोगों के लिए परेशानियों का सबब भी है। इस विषय में गांव की रोशनी बाई से पूछिए। इस गांव के सबसे पास का बैंक 15 किलोमीटर दूर है और इस वजह से यहां तक बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच नहीं थी। आजादी के बाद से सरकारें आती-जाती रहीं लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा कि रोशनी बाई को बैंकिंग व्यवस्था के अंदर कैसे लाया जाए, ताकि खुद की तरक्की के साथ राष्ट्र निर्माण में वह भी अपना योगदान निभा सके।
 रोशनीबाई और उनकी आने वाली पीढ़ियां भी शायद इसी हाल में रहतीं, लेकिन इस बीच एक नया बदलाव आया। उसने देखा कि एक बैंक के लोग उसके गांव में आए हैं और बचत करने का मतलब समझा रहे हैं। यह एक नई सुबह थी। बैंक के लोगों ने गांव के लोगों को बैंक में खाता खोलने के फायदों के बारे में बताया। उन्हें यह भी समझाया गया कि उन्हें हर बात के लिए बैंक आने की जरूरत नहीं है। बैंक मित्र गांव में ही उन्हें ज्यादातर सुविधाएं देंगे। इसके बाद कोई वजह नहीं थी कि रोशनी बाई बैंक खाता न खोलतीं।आज रोशनी बाई के खाते में नियमित बचत की वजह से अच्छी-खासी रकम है। अब वे हर महीने नियमित कुछ रुपए जमा करने की सोच रही हैं, ताकि इस बचत से वे अपने पति के लिए स्कूटर खरीद सकें।रोशनी बाई और उनकी ही तरह के करोड़ों लोगों की जिंदगी में पहली बार बैंक आया है और यह बदलाव हुआ है प्रधानमंत्री जन-धन योजना की वजह से। इस योजना के तहत खाते खुलवाने वालों में बड़ी संख्या में वे लोग हैं, जो अब तक बैंकिंग प्रणाली के दायरे से बाहर थे।विश्व इतिहास में इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में लोगों को बैंकिंग व्यवस्था में समावेशित होने का यह पहला प्रयोग है। इस योजना में सरकारी और गैर-सरकारी दोनों तरह के बैंकों का सहयोग लिया जा रहा है।
 प्रधानमंत्री जन-धन योजना 28 अगस्त 2014 को शुरू हुई। वित्तीय समावेश के लिए लाई गई इस योजना का मकसद देश में हर घर को बैंक अकाउंट और बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराना है। जन धन योजना के तहत 21.87 करोड़ नए बैंक खाते खोले गए। इनमें 61% खाते ग्रामीण इलाकों में खोले गए और 52% खाते महिलाओं के नाम पर हैं। मई 2016 तक इन खातों में 37,775 करोड़ रुपये की राशि जमा हो चुकी है। अब सिर्फ 26.40% खाते ही ज़ीरो बैलेंस के रह गए है। वहीं,  45.35% खातों को आधार कार्ड से जोड़ा जा चुका है, 17.99 करोड़ रूपेकार्ड जारी हो चुके हैं  और 19.09 लाख खातों में ओवरड्रॉफ्ट सुविधा का लाभ लिया जा चुका है । 
 इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें गांव तक बैंकिंग सेवा पहुंचाने की जगह परिवारों तक बैंकिंग को पहुंचाने पर जोर है। बैंकिंग सेवा के विस्तार में इससे पहले तक शहरों को यह मानकर छोड़ दिया जाता था कि वहां तो बैंक पहले से हैं। लेकिन प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत शहरों में खुले लगभग साढ़े आठ करोड़ खातों से जाहिर होता है कि इसकी जरूरत शहरों में भी थी। इस योजना में बैंक लोगों तक पहुंचे। यह भी एक नया तरीका था। इसके अलावा इस योजना के तहत खुले खातों को आधार नंबर और मोबाइल से भी जोड़ा गया ताकि सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं के वित्तीय पहलू का जन- जन तक विस्तार हो सके और खाताधारकों को अपने खाते में आने या खाते से जाने वाले रकम की उसी समय जानकारी मिल जाए।
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