27/07/2016  
पुलिसकर्मियों के संरक्षण व विभाग के मिलीभगत से खुलेआम बिक रही है मौत
 
 

कुशीनगर। सूर्य की पहली किरण के साथ ही मौत के सौदारगर अपनी दूकान सजाकर बैठ जाते है। और शुरू होता मौत खिरीदने का सिलसिला। यहां आने वाला हर बंदा अपनी औकात के हिसाब से पैसा देकर मौत खरीदता है  और बदमस्त होकर एक किनारे बैठ जाता है। इशारे-इशारे में चिखना का आदेश देता है फिर गटगटाकर जहर से भरा प्याला अपने गले से नीचे उतार लेता है। फिर क्या सूर्य अस्त और मौत के खरीददार दारू पीकर मस्त हो जाते है। चैकिए मत! यह किसी उपन्यास की कहानी नही है। बल्कि कुशीनगर जनपद के हाटा कोतवाली क्षेत्र के डुमरीसवागीं पट्टी गांव की हाल-ए-बयां है। जहां मौज किता है बीस रूपये बोतल। यहां कच्ची शराब किसी झुग्गी-झोपडी या फिर गुमटी में नही बेची जाती है बल्कि कच्ची शराब की यहां अबैध मण्डी लगती है। अगर यकीन  आ रहा है तो कभी चले आइए डुमरीसवांगी पट्टी गांव यहां एक-दो नही दर्जनों की तादात में कच्ची शराब के अवैध कारोबारी दुकान सजाकर मौत बेचते हुए मिलेगें। यहां कोई किसी को रोकने-टोकने वाला नही नही है। अगर आप किसी कारेाबारी से पूछ बैठे इस तरह खुलेआम कच्ची शराब बेच रहे हो और पुलिस आ गई तो! बिना हिचक जबाब मिलेगा पुलिस और विभाग का कोई डर नही है। इतना ही नही किसी महिला कारोबारी से पूछ बैठे तो उनका जबाब सुन खाकी वर्दी और विभागीय अधिकारियों को बूरा-भला कहने से आप भी बाज नही आयेगं। यहां कि महिला कारोबारी  तो सीधें कहती है  ए साहब! पुलिस वालन हमनी के कही के नाही छोड़ले बाटन हमनी के त इ कार से मन अगुता गइ्रल बा, लेकिन पुलिसवालन कहेलन कि शराब बेचो चाहे मत बेचो महीना में हमके पइसा चाहीं।
       लालमती देवी(बदला हुआ नाम) कहती है बाबू हमार मर्द शराब बेचत रहलन। चार साल पहिले इ शराब हमरे मर्द के जान ले लेहलस। सिपाही लोग पइसा ले जात रहे  मर्द के मरले के बाद धन्धा बन्द हो गइल लेकिन सिपाही लोग आन हफ्ता लेहल नाही बन्द कइल। उनही लोगों के कहले पर दारू बेचके आपन और अपने लइका के गुजर बसर करेनी। यह पूछे जाने जाने पर पुलिसवाले कितना पैसा ले जाते है लालमती देवी बताती है हजार रूपया महीना बाधल बा।
          गौरतलब है कि विकास के किरण से कोसों दूर जनपद का अति पिछड़ा गांव डुमरीसवांगी पट्टी नदी के किनारे बसा हुआ है जिसकी पहचान जनपद में ही नही वरन मण्डल में भी कच्ची शराब के अवैध मण्डी के रूप जगजाहिर है। सूत्रों की माने तो इस गांव में घर-घर कच्ची शराब का निर्माण किया जाता है। यहां पियक्कड़ों की भीड़ कभी भी देखी जा सकती है। बात यही खत्म नही होती है।

                      अबैध शराब निर्माण का सबसे बड़ा अड्डा हेतिमपुर
कुशीनगर।  जिले के हाटा कोतवाली क्षेत्र का हेतिमपुर अबैध शराब के निार्मण और बिक्री का सबसे बड़ा अड्डा है। चर्चा जोरों पर है कि यहां चैबिस घण्ट कच्ची शराब की भट्टियां धधकती रहती है। मजेदार बात यह है डुमरीसवांगी पट्टी की तरह यहा भी महिलाएं बढ़-चढ़ कर इस अबैध कारोबार में मर्दो का हाथ बटाती है। यहा कुछ अलग है तो वह यह है कि जिनके हाथ में कापी-किताब और पीठ पर स्कूली बस्ता होना चाहिए घर के जिम्मेदारी का बोझ उठाने के लिए शराब बेच रहे है। राष्ट्रीय राजमार्ग-28 से सटे इस अवैध अड्डा पर मीडिया पहुंची तो पुलिसिया तंत्र व विभागीय अधिकारियों के दावे की कलई खुलते देर नही लगी।  शराब बेच रहे बारह वर्षीय मनोज से जब पूछा गया कि पढ़ते हो तो उसने तपाक से जबाब दिया नही! स्कूल क्यों नही जाते पूछे जाने पर मनोज कहता है बाबूजी कहते है कि कहीं नही जाना है चुपचाप दारू बेच। मौत बेचने वाले यहां के कारोबारियों केा कहना है कि साहब हम दारू बेचते है तो सबको हिस्सा देते है। पत्रकार से लेकर पुलिस वाले और विभाग के लोगों का हिस्सा बंधा हुआ है जो हर महीने आकर ले जाते है। सूत्र बताते है कि कभी-कभी विभाग और पुलिस द्वारा छापेमारी किया जाता है लेकिन यह छापेमारी उच्चअधिकारियों के आंखें में धूल झोकने के लिए होता है। कहना न होगा कि यहा के तमाम कारोबारी अपने इस अवैध कारोबार से उब चुके है वह इस धन्धा से पार पाना चाहते है लेकिन पुलिसविभाग के कुछ लोग उन्हे इस कारोबार को छोड़ने नही देते।

               मिनी डिस्टलरी सुविधिया गांव
कुशीनगर! जनपद के अहिरोली थाना क्षेत्र के सुविधिया गांव अवैध शराब के कारोबार के लिए खासे चच्रित गांव है। यह गांव कच्ची शराब के लिए मिनी डिस्टलरी के रूप में जाना ताजा है। ऐसी चर्चा है कि यहां प्रतिदिन पन्द्रह सौ से दो हजार गैलन शराब निर्मित किया जाता है। कहा जाता है कि महीने में तीस से पेतीस लाख रूपये का कारोबार कच्ची शराब से होता है। 
      गोरखपुर-कसया मार्ग पर स्थित अहिरोली थाना थाना क्षेत्र के सुविधिया गांव आबकारी विभाग व पुलिस  प्रशासन की नजर में अवैध शराब निर्माण के कारोबार में टाप फाइव पर है। बावजूद इसके इस अवैध कारोबार को रोकने की जहमत न पुलिस प्रशासन द्वारा उठाया जाता है न ही आबकारी विभाग।
       सूत्रों की माने तो तीन दशक पूर्व इस गांव में दोलत, चिराग व जलेबी नामक व्यक्ति ही कच्ची शराब बनाते और बेचते थे। जिन्हे गांव के लोग हीन भावना से देखते थे। लेकिन मौत बेचने के इस कारोबार से बढ़ती आमदनी  ने एक-एक कर गांव के अधिकांश लांगों को अपनी ओर खिंच लिया। आलम यह है कि सौ से अधिक लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस कारोबार में जुड़े है। बताया जाता हे कि यहां तकरीबन सौ की संख्या में कच्ची शराब बनाने की भट्टियां रात-दिन धंधकती रहती है। सूत्रों की माने तो सुविधिया गांव में बनने वाली कच्ची शराब कुशीनगर जनपद के कसया, फाजिलनगर के अलावा देवरिया, गौरी बाजार गोरखपुर के साखोपार, चैरीचैरा, पिपराईच  आदि जगहो पर सप्लाई किया जाता है।

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