13/09/2016  उत्तराखंड के पहाड़ी इलाक़ो मे उगाये जाने वाला मडुवा होता है काफी लाभदायक !

मडुवा गेंहू की तरह ही है इससे भी आटा निकलता है गेंहू का आटा जितना सफ़ेद होता है वही वही मडुवे का आटा इसके विपरीत बिलकुल काला होता है पर ये आटा गेहू के मुकाबले काफी लाभदायक होता है खाश तौर पर शुगर के मरीजों के लिए मडुवे का आटा किसी वरदान  से कम नहीं होता है !

इस आटे का जीता जागता उदाहरण है पहाड़ के बुजुर्ग जो आज भी 50 किलोमीटर तक पैदल चल लेते है !
पहले इन पहाड़ो मे गेहू की खेती काफी कम होती थी मडुवे की ही खेती होती थी और लोग मडुवे की ही रोटी खाते थे ना वो कभी बीमार होते थे और ना ही कभी थकते थे !
पुराने समय मे पहाड़ो मे सड़के नहीं होती थी और लोगो को शहर तक जाने के लिए पचासों किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था और ये लोग सर पर सामान लें कर जाते थे इतनी जादा ताकत होती थी लोगो मे इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है और इसमें मडुवे का बहुत बड़ा योगदान होता था !
आज से लगभग 10 साल पहले तक इसकी काफी खेती हुवा करती थी पर समय के साथ इसकी खेती भी कम होती गयी इसका मुख्य कारण ये भी है !
नई पीढ़ी द्वारा मडुवे को अनदेखी करना ! 
दूसरा मुख्य कारण है पहाड़ से लोगों का शहर की और पलायन !
अब तो मडुवा नाम मात्र भर के लिए होता है और जिसको हाथो हाथ बेच दिया जाता है ! जिन लोगो को इसका फायदा मालूम होता है वो लोग इसको मुँह मागे दामो पर खरीद लेते है ! धीरे धीरे पहाड़ी खेतो से विलुप्त होता मडुवा एक चिंताजनक विषय है !
उत्तराखंड से संतोष बोरा की रिपोट

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