31/05/2017  आप नें लगाया पंजाब के मंत्री पर 48 करोड़ के खनन घोटाले का आरोप
पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार में बिजली एंव सिंचाई मंत्री राणा गुरजीत सिंह पर भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं और आम आदमी पार्टी मंत्री गुरजीत सिंह के तुरंत इस्तीफ़े की मांग करती है। ये वही कांग्रेस पार्टी है जो चुनाव से पहले अकाली दल के खनन माफ़िया, केबल माफ़िया, ट्रांसपोर्ट माफ़िया को जेल भेजने की बात करती थी लेकिन अब खुद सरकार में आकर पहली तिमाही से ही भ्रष्टाचार करने में जुट गई है। पंजाब सरकार में मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने अपने नौकर और अपने निजी कर्मचारियों के नाम पर बालू रेत के टेंडर अलॉट कराए हैं जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का मामला बनता है। जब आम आदमी पार्टी के पंजाब के विधायकों ने इस भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया तो आप के सभी विधायकों को विधानसभा के गेट से ही गिरफ्तार कर लिया गया।
 
इस मुद्दे पर प्रैस कॉंफ्रेंस करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष ने कहा कि पंजाब में कांग्रेस को सरकार में आए अभी जुम्मा-जुम्मा 3 महीने भी नहीं हुए हैं और उन्होंने भ्रष्टाचार करना शुरु भी कर दिया है। ये वही कांग्रेस पार्टी है जो चुनाव से पहले अकाली दल के माफ़ियाओं को जेल भेजने की बात करती थी लेकिन आज उन्हें जेल भेजना तो दूर की बात है बल्कि खुद माफ़ियाओं से हाथ मिलाकर भ्रष्टाचार करने में जुट गई है।
 
 
पंजाब में बालू रेत के खनन के चार टेंडर हुए हैं और जिनको ये टेंडर मिले हैं वो नाम सारी कहानी खुद बयां कर देंगे। एक टेंडर अमित बहादुर नामक शख्स को मिला है जो पंजाब सरकार में मंत्री राणा गुरजीत सिंह के यहां खाना पकाने वाला नौकर है और जिसकी तनख्वाह मात्र 11 हज़ार रुपए है और इनके खाते में 5 हज़ार रुपए से ज्यादा का हिसाब नहीं है। इस टेंडर के लिए 11 हज़ार प्रति महीना कमाने वाले अमित बहादुर ने 26.51 करोड़ रुपए भरे हैं। अमित बहादुर भारत के नागरिक भी नहीं है, अमित मूल रूप से नेपाल के नागरिक हैं।  
 
इसके अलावा तीन लोगों को और एक-एक टेंडर मिले हैं जिनके नाम हैं कुलविंदर पाल, बलराज सिंह और तीसरे हैं गुरविंदर सिंह। ये तीनो भी पंजाब सरकार में मंत्री राणा गुरजीत सिंह की कम्पनी में उनके निजी कर्मचारी हैं जिनकी तनख्वाह 20 से 25 हज़ार रुपए से ज्यादा नहीं है। इन चारों टेंडर की मिलाकर कुल क़ीमत 48 करोड़ से ज्यादा है। हमारा प्वाइंट यह है कि सरकार के उपरी नेताओं की सहमति के बग़ैर यह कतई संभव नहीं है कि 11 हज़ार से 25 हज़ार कमाने वाले मंत्री के नौकर और कर्मचारी 48 करोड़ के टेंडर सरकार से हांसिल कर लें? और जब आम आदमी पार्टी के विधायक इस भ्रष्टाचार के मामले में मंत्री का इस्तीफ़ा मांगते हुए प्रदर्शन करते हैं तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर लेती है।  
 
 
आम आदमी पार्टी का मानना है कि बालू रेत के खनन के इस भ्रष्टाचारी खेल में सरकार के उपरी स्तर के लोग भी शामिल हैं क्योंकि उपरी स्तर की रज़ामंदी के ऐसा खेल नहीं खेला जा सकता। अब खानापूर्ति के लिए और मामले को रफ़ा-दफ़ा करने के लिए हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की एक सदस्यीय कमेटी का गठन इसकी जांच के नाम पर किया गया है। हमारा मानना है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी इसकी जानकारी थी और अगर मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी नहीं थी तो उन्हें यह खानापूर्ति की कमेटी बनाने में एक महीने का वक्त क्यों लगाऔर मुख्यमंत्री इस मामले में सीधा आरोप झेल रहे अपने मंत्री राणा गुरजीत सिंह को सरकार से बाहर का रास्ता क्यों नहीं दिखा रहे हैं
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