10/07/2017  निरंकारी भक्तों ने दी गुरू पूर्णिमा पर प्रेरक सीख
न पूजा की थाली, न फूलमालाए और न ही प्रसाद व चढ़ावा, कोलाहल भी नहीं। गुरुपूर्णिमा पर निरंकारी भक्तों ने सत्गुरू को मनाने का नायाब तरीका अपनाया और अपने व्यवहारिक कर्म द्वारा आस्था के फूल चढ़ाकर, प्रेरक सीख दी।

रविवार को गुरू शिष्य परम्परा का निर्वाह करते हुए निरंकारी भक्तों ने "गुरुदरबार" हाइवे नवादा स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन और आसपास सफाई कर निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी की शिक्षाओं को क्रियान्वित कर दिखाया।

मीडिया प्रतिनिधि किशोर "स्वर्ण" ने बताया कि आडम्बरों से परे निरंकारी भक्तों ने गुरू की पूजा और नमन का अद्भुत एवं अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया। किसी ने झाड़ू से सफाई की, तो किसी ने कूड़ा हटाया। किसी ने पानी का छड़काव किया, तो किसी ने पौधों की छटाई की और किसी ने जल सेवा कर पुण्य कमाया।

सेवादर संचालक मोहन सिंह ने कहा कि सत्संग भवन भक्तों के लिए गुरू का दरबार है, तभी तो भक्त जहा सत्संग करते हैं, उसकी साजसज्जा, रखरखाव स्वयं अपने हाथों से करते हैं। विशेष कार्यक्रमों पर आयोजकों या शासन-प्रशासन से किसी मदद की आशा किए बगैर स्वयं ही हर व्यवस्था की कमान सम्भालते हैं, फिर चाहे ट्रैफिक हो या भीड़ कंट्रोल। हर कार्य अनुशासन में ही करते हैं, जो हर धर्मस्थल पर जुटने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रेरक सीख है।

इस अवसर पर हुए सत्संग में निरंकारी प्रचारक कैलाश चंद्र भगतजी ने कहा कि गुरू दीक्षा या नामदान के लिए किसी विशेष दिवस का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। निरंकारी सत्गुरू माता सविन्दर हरदेव जी महाराज जाति, धर्म, भाषा का भेद देखे बगैर जिज्ञासु की इच्छा जाहिर करने मात्र से ही नामदान "ब्रह्मज्ञान" की सौगात प्रदान कर देते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरू तो हर विद्या, हर हुनर के अलग अलग होते है, लेकिन पूर्ण सत्गुरू एक ही होता हैं, जो शरण में आये भक्त को क्षण में प्रभु से साक्षात्कार कराता हैं। निरंकारी सत्गुरू अपनी पूजा नहीं कराते, बल्कि मानव सेवा और प्रेम करना सिखा रहे हैं।

इस अवसर पर मोहनसिंह, योगेश, पवन, लक्ष्मी, गौरी खत्री,  वीएस ठकुरेला, भगवती प्रसाद तथा किशोर "स्वर्ण" का विशेष सहयोग रहा। कोटा राजस्थान से आये यु्वाओं ने भजन प्रस्तुत किए। स्थानीय संयोजक हरविन्द्र कुमार ने गुरुपूर्णिमा की शुभकामनाएं दी।

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