12/07/2017  
हरियाणा के सहकारी चीनी मिलों ने पिराई सीजन 2016-17 के दौरान गन्ने की पिराई के साथ-साथ चीनी उत्पादन में भी नया कीर्तिमान स्थापित किया
 

हरियाणा के सहकारी चीनी मिलों ने पिराई सीजन 2016-17 के दौरान गन्ने की पिराई के साथ-साथ चीनी उत्पादन में भी नया कीर्तिमान स्थापित किया है। चीनी मिलों ने 362.04 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई करके 35.50 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है जोकि प्रदेश में सहकारी चीनी मिलों की स्थापना से लेकर अब तक सर्वाधिक है।
    सहकारिता विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चीनी प्रसंघ तथा सहकारी चीनी मिलों द्वारा ई-खरीद प्रणाली लागू की गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की सहकारी चीनी मिलों द्वारा पिराई सीजन 2016-17 के दौरान 362.31 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद की गई। राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई गई 175 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता से किसानों को 1140.57 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
    प्रवक्ता ने बताया कि गन्ना विकास कार्यक्रमों पर विशेष बल देने के परिणामस्वरूप किस्मों के संतुलन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान अधिक चीनी की अगेती किस्मों या आधुनिक किस्मों के तहत क्षेत्र 20 प्रतिशत से बढक़र 62 प्रतिशत हो गया है जोकि अब तक का अधिकतम है। उन्होंने बताया कि सहकारी चीनी मिल शाहबाद तथा सहकारी चीनी मिल करनाल को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। शाहबाद सहकारी चीनी मिल को तकनीकी दक्षता में प्रथम पुरस्कार जबकि सहकारी चीनी मिल करनाल को गन्ना विकास में द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि पिराई सीजन 2016-17 के दौरान करनाल, सोनीपत, जींद, महम, पलवल, कैथल और गोहाना के चीनी मिलों ने 5.33 करोड़ रुपये की खोई बेचकर अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया है। इसी प्रकार, शाहबाद, रोहतक और गोहाना सहकारी चीनी मिलों ने राज्य ग्रिड को 30.86 करोड़ रुपये की 7.62 करोड़ यूनिट बिजली की आपूर्ति की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016-17 के दौरान गन्ने की अगेती किस्म के लिए 320 रुपये प्रति क्विंटल, मध्यम किस्म के लिए 315 रुपये प्रति क्विंटल और पछेती किस्म के लिए 310 रुपये प्रति क्विंटल का भाव दिया गया।

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