14/07/2017   विधानसभा के अगले सत्र में देश में पहली बार सीड एक्ट बिल लाया जायेगा
हरियाणा विधानसभा के अगले सत्र में देश में पहली बार सीड एक्ट बिल लाया जायेगा। इस बिल में कृषि और बागबानी आदि से संबंधित बीजों की सभी प्रजातियों को शामिल किया जायेगा। हरियाणा में कृषि से संबंधित चुनौतियों पर मंथन के लिए विशेषज्ञों के नेतृत्व में अलग-अलग समूह भी बनाए जायेंगे, जिसमें जल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, ओरगेनिक फार्मिंग, क्रोप मैनेजमेंट, जोखिम प्रबंधन, नवीन तकनीक और लैंड मैनेजमेंट आदि विभिन्न 16 प्रकार के समूह बनाए जायेंगे।
यह जानकारी आज गुरुग्राम में हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने दो दिवसीय चिंतनशाला के दूसरे सत्र में रखे गए सुझाव पर विभाग के अधिकारियों को सीड एक्ट बिल तैयार करने के निर्देश देते हुए दी। चिंतनशाला में कृषि क्षेत्र में अगले 10 साल के विजन को सामने रखकर बेहतरी के लिए विचार विमर्श करते हुए विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने सुझाव दिए। कृषि मंत्री ने रखे गए सुझावों के आधार पर चिंतनशाला में उपस्थित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि हरियाणा में सीड एक्ट बनाने के लिए एक ड्राफट तैयार करें और आगामी विधानसभा सत्र में उसे पास करवाने के लिए पटल पर रखा जायेगा। उन्होंने कहा कि इस एक्ट के ड्राफट में कृषि व बागबानी विभाग से संबंधित सभी बीजों की प्रजातियों को शामिल किया जाए और साथ ही पैस्टीसाईड और इनस्कैटीसाईड प्रबंधन का भी पूरा ब्यौरा हो। उन्होंने कहा कि यह बिल देश में अपनी तरह का पहला बिल होगा।
    एक अन्य सुझाव पर श्री धनखड़ ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी जिलों में सीड की जांच के लिए लैब संचालित हों। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय में एक जैनेटिक बीजों की जांच सुविधा वाली आधुनिक व गुणात्मक लैब की स्थापना की जाए। उन्होंने बताया कि अमेरिका के दौरे के समय एक स्टेट के साथ एक समझैता हुआ था, जिसके अनुसार वे हरियाणा में अत्याधुनिक सीड टैस्ट लैब बनाने में सहयोग कर सकते हैं। उन्होंने बागबानी विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग प्रत्येक जिला मुख्यालय पर बागवानी बीजों की जांच की सुविधा भी उपलब्ध करवाएं।
    कृषि व बागवानी की बेहतरी के लिए विचार करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि एनसीआर हरियाणा के लिए काफी उपयोगी है और पूरे प्रदेश के किसानों को इसका फायदा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश मे होने वाले उत्पादन के लिए हरियाणा के किसानों के पास एनसीआर के रूप में बहुत बड़ी मंडी है। उन्होंने कहा कि बाजार में पहुंच बनाने के लिए आगे आने की जरूरत है और इसमें विभाग किस प्रकार से किसानों की सहायता कर सकता है, इस मुद्दे पर गहन मंथन की जरूरत है। छोटी पूंजी में कैसे किसान मुनाफा कमा सकता है आदि पर विभाग को योजना बनानी चाहिए।
मंथनशाला में कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के क्रियांवन और किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए योजनाबद्व काम करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक कल्पना इच्छा नहीं होगी, तब तक उसे मूर्त रूप नहीं दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सभी प्रकार की चुनौतियों के समाधान को लेकर क्या किया जा सकता है। इसके लिए सभी के सुझाव आने चाहिए तभी चुनौती अवसर बन सकती है। उन्होंने कहा कि चुनौतियों पर मंथन के लिए विशेषज्ञों के नेतृत्व में अलग-अलग ग्रुप बनाए जायेंगे। उन्होंने बताया कि सभी अपनी ईच्छा के अनुसार गु्रप में शामिल होने के लिए अपना नाम दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि जल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, ओरगेनिक फार्मिंग, क्रोप मैनेजमेंट, जोखिम प्रबंधकन, नवीन तकनीक और लैंड मैनेजमेंट आदि विभिन्न 16 गु्रप बनाए जायेंगे।
किसानों और विशेषज्ञों ने 10 साल के विजन पर दिए सुझाव
अंबाला के अग्रणी युवा किसान पुनीत सिंह ने सुझाव दिया कि प्रदेश में युवा किसानों को अपने उत्पाद बेचने की कला सिखाने की जरूरत है। उन्होंने पिछले लगभग डेढ साल में अपने 70 उत्पाद बना रहे हैं और बेहतर तरीके से उत्पाद प्रबंधन करते हुए अपने उत्पाद बेचते हैं। अफ्रीका जैसे देश से उन्होंने बाजार में बेचना सीखा है। उन्होंने कहा कि विभाग को चाहिए कि वे प्रदेश के किसानों को अपने उत्पाद की सीधी मार्केटिंग सिखाएं। मौजावास के किसान श्रीकिशन कौशिक ने बताया कि उनके क्षेत्र में पानी खारा है। फिर भी वे स्टीविया की खेती कर रहे हैं। अगर क्षेत्र में मीठा पानी हो या नहर से सिंचाई की सुविधा मिल जाए, तो उत्पादन कई गुणा बढ़ सकता है और किसानों की आय दोगुनी से भी ज्यादा हो सकती है। फरूखनगर के मानसिंह ने सुझाव दिया कि किसानों को उनके खेतों के चारों ओर बाढ करने के लिए सरकार से सहयोग मिलना चाहिए ताकि आवारा पशुओं से फसल खराब होने से बच सके। कुरूक्षेत्र के उप कृषि निदेशक कर्मचंद ने सुझाव दिया कि किसानों की सुविधा के लिए सभी मंडियों में फसल खरीद के लिए तिथिवार कार्यक्रम होना चाहिए। इससे किसानों की भाग दौड बचेगी और मंडियों में भीड़ भी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जिन क्षेत्रों में विशेष तौर पर अच्छी फसल होती है, उस क्षेत्र को विशेष क्रोप जोन बना देना चाहिए। गुरूग्राम के जिला बागवानी अधिकारी दीन मोहम्मद ने सुझाव दिया कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए क्षेत्र की मिट्टी की गुणवत्ता के आधार ओरगैनिक फार्मिंग को अपनाना चाहिए। दादरी के जिला बागवानी अधिकारी सुरेन्द्र सिहाग ने सुझाव दिया कि दूसरी फसलों की तरह बागवानी को भी प्रधानमंत्री बीमा योजना के तहत शामिल किया जाए। इस पर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में कार्यवाही चल रही है और जल्द ही बागवानी की अलग-अलग फसलों को चरणवार इस योजना में शामिल किया जायेगा।
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