20/07/2017  
प्रेरणादायक रहा निरंकारी बाल समागम
 
 

मथुरा। निरंकारी बाल संत समागम के भव्य आयोजन में आगरा से आयीं बहन जयश्री जी ने कहा कि निरंकारी बच्चों ने बाल भक्त प्रहलाद की यादें ताजा कर दी। बच्चों ने अपनी प्रेरक प्रस्तुतियों के माध्यम से साबित कर दिया कि उन पर निरंकारी सत्गुरू की शिक्षाओं का पूरा असर हैं। रविवार को मथुरा के हाइवे नवादा स्थित सन्त निरंकारी सत्संग भवन,  में आयोजित बाल सन्त-समागम में सत्गुरू माता सविन्दर-हरदेव जी महाराज का पावन सन्देश देते हुये बहन जयश्री जी कहा कि बच्चों को पारिवारिक माहौल के साथ अच्छा माहौल प्रदान करें। ताकि उनमें चारि़ित्रक गुणों का विकास हो सके। उनको एक स्वस्थ माहौल प्रदान करें। हमें सबसे पहले पढ़ाई पर ध्यान देना है। गुरूमत पर चलना हैं। बच्चों ने ही मिशन को ऊंचाइयों की ओर ले जाना है। बहन जयश्री ने कहा कि बच्चे कोरे कागज की तरह हैं, जो लिखे, उनके जीवन में अंकित हो जायेगा। बच्चे कच्ची मिट्टी जैसे है, जो रूप देना चाहो, वही बनेंगे। बाल सन्त-समागम में छोटे-छोटे बच्चों ने महापुरूषों के रूप में भाग लिया। आज का कार्यक्रम बच्चों पर आधारित होने के कारण जिम्मेदारी बच्चों ने बड़ी खूबसूरती से निभायी। आज के कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी-अपनी भाषाओं में लघुनाटिका, गीतों, कविताओं, अवतार वाणी के शब्द एवं विचारों के माध्यम से बाबा हरदेव सिंह जी महाराज की सिखलाई इस ब्रह्मज्ञान की महिमा सन्तों के सामने रखी, जिसकी सभी ने तालियां बजाकर हौंसला अफजाई की। बाल समागम के माध्यम से प्रयास किया गया कि बच्चों में सेवा, सिमरण, सत्संग के अलावा ब्रह्मज्ञान, सत्य, एकत्व की भावना, समर्पण, भाईचारा, चाऱित्रिक विकास के साथ समाज सेवा, रक्तदान, पौधरोपण, सफाई अभियान की भावना दृष्टिगौचर हो सके। बाल सन्त समागम का संचालन भरत जी ने किया। बाल संगत इंचार्ज ऊर्वशी त्रिपाठी ने कहा कि बाल समागम के माध्यम से बच्चों को आध्यात्मिक से जोड़ा जा रहा है। संत निरंकारी मिशन इस देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी ब्रह्मज्ञान का संदेश दे रहा है। मीडिया प्रभारी ने बताया कि बच्चों द्वारा नशा मुक्ति के लिये मंचित नाटिका के माध्यम से समाज को एक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को एक सामाजिक वातावरण दें। युवाओं पीढ़ी को भटकने से रोकना है। बाबा हरदेव सिंह जी महाराज को समर्पित बच्चों की मार्मिक प्रस्तुति "एक मसीहा प्यार का" देख सबकी आंखों में आंसू आ गये। बाबा हरदेव जी के 36 वर्षों के अमूल्य योगदान को याद किया गया। एक नाटक "मैं समय हूँ" में आधुनिक संसाधनों का सदोपयोग करने की सीख देकर, बच्चों को सामाजिक कार्यों को अंजाम देने की प्रेरणा दी गयी। इस समागम को सफल बनाने में समस्त सेवादल के भाई-बहनों ने अपना योगदान दिया। सबका आभार संयोजक हरविन्द्र कुमार ने किया। बच्चों को ओमप्रकाश एवं विनोद अरोड़ा ने उपहार भेंट किए। ऊर्वशी त्रिपाठी, भरत, कोमल, गौरी खत्री, राधा जीतू, आरती तथा किशोर स्वर्ण का विशेष योगदान रहा।

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