20/09/2017  शराबबंदी के बाद अब एनर्जी ड्रिंक और फ्रूट बियर पर उठे सवाल,SC ने कहा पटना हाईकोर्ट तय करे…
सूबे में अब एक बड़ा ही दिलचस्प मामला सामने आ रहा है.ह मामला एनर्जी ड्रिंक्स और फ्रूट बियर के एक व्यापारी से जुड़ा है, जिसे पटना हाईकोर्ट ने शराबबंदी की नीति के तहत एनर्जी ड्रिंक्स और फ्रूट बियर को शराबबंदी नीति के तहत न मानते हुए राहत दी थी.सुप्रीम कोर्ट में बिहार की शराबबंदी पर उठा सवाल एक नए अंदाज में पटना हाईकोर्ट वापस पहुंचा. सवाल ये कि राज्य में शराबबंदी है तो क्या एनर्जी ड्रिंक या फ्रूट बियर की खुलेआम बिक्री इस नीति के तहत आएगी क्या?  कोर्ट के इस फैसले पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा, लेकिन घूम फिर कर मामला फिर पटना हाईकोर्ट आ गया.

क्या है पूरा मामला…

बता दें कि पटना के आलमगंज थाना में 9 फरवरी को एनर्जी ड्रिंक्स और फ्रूट बियर में एल्कोहल को आधार बनाकर पुलिस को शिकायत मिली थी. जिसके बाद आबकारी विभाग और पटना पुलिस ने आलमगंज थाना के अंगद नगर में एक गोदाम पर छापा मारा और गोदाम सील कर दिया था. छापेमारी में 40 लाख रूपए की एनर्जी ड्रिंक और फ्रूट बियर की पेटियां बरामद हुईं थी. आबकारी विभाग और पुलिस ने सीलबन्दी के साथ गोदाम मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया. इसके बाद जब्त माल के सैम्पल जांच के लिए एक्साइज कैमिस्ट लैब और FSL भी भेजा गया.

एक्साइज कैमिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सैम्पल में इथाइल एल्कोहल की मात्रा 0.2 से 0.5 फीसद मिली, जबकि FSL की रिपोर्ट में 0.2 से 1.2 फीसद मिली थी. अप्रैल 2017 में गोदाम मालिक ने इसके ख़िलाफ़ पटना हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की, जिसमें ये मांग की गई कि FIR रद्द की जाए क्योंकि ये उत्पाद शराबबन्दी के तहत नहीं आते. याचिकाकर्ता ने गोदाम की सील खोलने की भी अर्ज़ी लगाई थी.

पटना हाईकोर्ट ने मामला सुनकर गोदाम मालिक के खिलाफ करवाई पर रोक लगा दी और 40 लाख के बांड पर 17 जुलाई को गोदाम को डिसिल करने के आदेश दे दिए. सील नहीं खुली तो फिर याचिकाकर्ता ने कोर्ट की अवमानना याचिका लगाई. इस पर पटना हाईकोर्ट ने 31 अगस्त को एक्साइज विभाग के अफसरों को आदेश पालन न करने के लिए अदालत में तलब कर लिया.इसके खिलाफ बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट आ गई. बिहार सरकार की ये दलील थी कि 2016 के शराबबंदी कानून के मुताबिक किसी भी तरह के एल्कोहल कंटेंट पर प्रतिबंध लगाता है.

ऐसे में पटना हाई कोर्ट का आदेश सही नहीं है. लेकिन घूम फिर कर मामला फिर पटना हाईकोर्ट पहुंच गया. यानी बिहार सरकार की नशाबंदी की परिभाषा और व्याख्या को सुप्रीम कोर्ट ने मानने से मना कर दिया. अब देखना दिलचस्प होगा कि उसी अदालत में उन्हीं दलीलों का कितना असर होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को पटना हाई कोर्ट वापस भेजते हुए कहा कि वहीं तय होगा कि बिहार में एनर्जी ड्रिंक या फ्रूट बियर का विक्रय और सेवन शराबबंदी के कानून के तहत आता है या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को ये निर्देश भी दिया है कि 6 हफ्ते में मामले का निपटारा किया जाए.
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