10/11/2017  उच्चतम न्यायालय ने धन शोधन मामले में वकील की जमानत याचिका खारिज की
नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने नोटबंदी के बाद कथित धन शोधन के एक मामले में गिरफ्तार वकील रोहित टंडन की जमानत याचिका खारिज कर दी। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई. चन्द्रचूड़ की पीठ ने टंडन की जमानत याचिका खारिज कर दी। काला धन संबंधी एक मामले में टंडन के यहां छापेमारी और 13.6 करोड़ रुपये की बरामदगी के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। टंडन पर आरोप है कि उन्होंने नोटबंदी के बाद चलन से बाहर हुए करीब 60 करोड़ रुपये कीमत के नोटों को अवैध तरीके से नये नोटों में बदलवाने के मामले में लिप्त रहे हैं। इससे पहले सुनवायी के दौरान टंडन के लिए जमानत की मांग करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा था कि जमानत दिया जाना नियम है और जेल भेजना अपवाद, लेकिन इस मामले में उसे उलट दिया गया है। रोहतगी ने दलील दी थी कि धन शोधन निवारण कानून के तहत टंडन के खिलाफ कोई मामला नहीं बना है। उन्होंने कहा कि टंडन के पास कथित रूप से बिना लेखाजोखा वाला धन मिला था जो पीएमएलए के तहत अपराध नहीं है, क्योंकि यह कानून अपराध के जरिए आय से जुड़ा है। अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि टंडन अवैध धन का रूपांतरण करवा रहे थे जिससे काला धन के खिलाफ कार्रवाई कर रही भारत सरकार को नुकसान पहुंच रहा था।
टंडन ने नियमित जमानत का अनुरोध करते हुए कहा था कि उन्हें अपनी बीमार मां की देखभाल करनी है। इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने टंडन को दिल्ली उच्च न्यायालय की ओर से मिली तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत की अवधि को बढ़ाने से इंकार कर दिया था। अदालत ने नियमित जमानत याचिका वापस लेने के बाद 10 अगस्त को टंडन को अंतरिम जमानत दी थी।
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