14/12/2017  
अल्पसंख्यक होने के बावजूद अपने ही देश में सुविधाओं से बेदखल हैं हिंदू
 

नई दिल्ली। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि देश के 29 राज्यों में से 8 में हिंदू अल्पसंख्यक हैं। इन आठ राज्यों में पांच उत्तर पूर्वी राज्य मिज़ोरम, नगालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर शामिल हैं। बाक़ी तीन राज्य पंजाब, जम्मू कश्मीर और लक्षद्वीप हैं।
अपने देश में अल्पसंख्यकों के लिए अलग से अनेक कल्याणकारी योजनाएं होने के बावजूद इन अल्पसंख्यक हिंदुओं को अल्पसंख्यकों को मिलने वाली सुविधाएं नहीं मिलती है। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट भी उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर चुकी है जिसमें देश के इन आठ राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने यह कहते हुए इसमें हस्तक्षेप करने से मना कर दिया कि इस मामले में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को ज्ञापन दें। इसके बाद याचिकाकर्ता ने कोर्ट से याचिका वापस ले ली।
इस संबंध में अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी त्रिदंडी जी महाराज ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि मुसलमानों के लिए सरकारी कोष को दोनों हाथों से लुटाने वाली सरकारें इस पर मौन क्यों हैं। उन्होंने कहा कि वोट की राजनीति की वजह से ही अल्पसंख्यक हिंदुओं को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि अविलंब इन राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यकों को मिलने वाली सुविधाएं प्रदान की जाय। अगर सरकारें ऐसा नहीं करतीं तो एक वृहद जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
दरअसल, 2011 की जनगणना के मुताबिक हिंदू समुदाय आठ राज्यों में अल्पसंख्यक हैं। याचिका में दिए गए नामों में लक्षद्वीप (2.5%), मिजोरम (2.75%), नगालैंड (8.75%), मेघालय (11.53%), जम्मू और कश्मीर (28.44%), अरुणाचल प्रदेश (2.9%), मणिपुर (31.39%) समेत पंजाब (38.40%) शमिल हैं।
बेहद अजीब बात है कि अल्पसंख्यक होने के बावजूद हिंदू समुदाय को उनके अधिकारों से अवैध और मनमाने तरीक़े से वंचित रखा जा रहा है क्योंकि न तो केंद्र और न ही राज्य सरकारों ने हिंदुओं को अल्पसंख्यक कानूनों के राष्ट्रीय आयोग की धारा 2 (सी) के तहत अल्पसंख्यक के रूप में अधिसूचित किया है।

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