13/02/2018  प्रेमियों के लिए खास प्रबल योग है इस वेलेंटाइन डे पर..... मदन गुप्ता सपाटू
हर वर्ष की तरह 14 फरवरी को आने वाला वेलेंटाइन डे इस वर्ष कई ज्योतिषीय कारणों से और अधिक सशक्त एवं सार्थक रहेगा। शिवरात्रि और वेलेंटाइन संयोगवश साथ साथ और आगे पीछे भी हैं। महादेव के बाद कामदेव । विशेष बात यह है कि इस दिन शुक्र ग्रह , सूर्य के साथ कुंभ राशि में है और चंद्रमा बुध के साथ श्रवण नक्षत्र में है।  शुक्र प्रेम का प्रतीक एवं कामदेव के द्योतक है। ज्योतिषीय दृष्टि से भी चंद्रमा मन का कारक होने के साथ साथ रोमांस का कारक ग्रह भी है अतः इस बार सारे संयोग वेलेंटाइन डे को विशेष बना रहे हैं।
दूसरे 14 का अंक 5, बुध ग्रह का प्रतीक है जिसे कम्युनिकेशन , संचार , संदेश , प्रदार्शन का द्योतक माना जाता है। यह 2018 का वर्ष है जिसके अंको का योग भी 2 बनता है । अंक शास्त्र के अनुसार 2 का अंक चंद्र से संबंधित है । अतः 14 फरवरी के दिन मोबाइल, ई मेल, कोरियर, संदेशें के आदान प्रदान में मुख्य भूमिका निभाएंगे।
इस दिन प्रेम का प्रतीक शुक्र कुंभ  राशि में विद्यमान है जो प्रेम प्रसंगों को बढ़ावा देगा। चंद्रमा शनि की राशि मकर में हैं  ,अतः  विरोध के बावजूद , युवाओं तो क्या बूढ़ों का प्रेम प्रदर्शन भी पूर्ण यौवन पर होगा।
अतः वेलेंटाइन डे पर, कर्क बृष ,कुंभ  राशि वालों को एक बोनंाजा मिल सकता है। इन राशि के लोगों के  यदि प्रेम प्रसंग चल रहे हैं तो सुदृढ़ होंगे या प्रणय में बदल सकते हैं या नवीन प्यार का शुभारंभ होगा।
14 फरवरी के दिन प्रेम का दिन तथा एक यादगार तिथि होने के कारण काफी जोड़े इस दिन प्यार व विवाह के बंधन में बंधने की संभावना है।
करें वैलेंटाइन का भारतीयकरण 
यों तो वैलेंटाइन सप्ताह 7 फरवरी से आरंभ हो जाता है और हर दिन को एक नाम देकर मनाया जाता है।
हर देश में यह दिवस अलग अलग तरीके से मनाया जाता है। चीन में इसे ‘नाइट्स ऑफ सेवेन्स‘ कहा जाता है। जापान व कोरिया में इसे ‘व्हाइट डे ‘ के नाम से जाना जाता है। वहां यह पर्व एक दिन या एक सप्ताह नहीं चलता अपितु प्यार का इज़हार पूरा महीना चलता है। कुल मिला कर वेलेंटाइन दिवस अब विश्वव्यापक हो चुका है। वैश्विक स्तर पर यदि आज हम चमकना चाहते हैं तो विश्व में प्रतिस्पर्धा में सांस्कृतिक रुप से भी जुड़ना होगा। भारत में यह त्योहार वाण्जियी से भी प्रभावित है।फूलों, उपहारों का कामकाज खूब बढ़ा है।
हालांकि यह दिवस एक प्रेम प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है परंतु भारतीय परंपराओं में प्रेम के अनेक स्वरुप हैं। हम कितने ही लोगों से प्यार करते हैं परंतु उसमें भावनाएं अलग अलग हो सकती हैं। मां का प्यार वात्सल्य है। प्रेमिका का कुछ और तथा पत्नी का कुछ और। इस प्यार को आप गरीबों में भी बांट सकते हैं और जरुरतमंदों में भी। एक शालीन तरीके से भी प्यार का इजहार कर सकते हैं।
वेलेंटाइन में मां, पिता, दादा, दोस्त , संबंधी, पड़ोसी कोई भी हो सकता है। यह हमारे होली जैसा ही पर्व है जिसे हमें ‘ होली ‘ अर्थात पवित्र ही बना कर रखना चाहिए न कि किसी प्रकार का अश्लील या भोंडा प्रदर्शन करना चाहिए। इसका विरोध करने वालों को भी इसकी भावना पर ध्यान देना चाहिए और मात्र पश्चिमी सभ्यता कह कर नकारने की बजाय इसका भारतीयकरण करना चाहिए।
अब तो पुलिस भी लाल गुलाब देकर गांधी गिरी भी अपना रही है। कई संगठनाध्यक्षों ने भी अब इस दिवस का विरोध न करने की अपील की है।

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