17/08/2018  पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का पंसदीदा स्थान था माउण्ट आबू
देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी निधन पर ब्रह्माकुमारीज संस्था की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी ने लंदन से शोक संदेश भेजा है। जिसमें उन्होंने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे देश ने एक महान नेता को खो दिया है। उनकी आत्म शांति के लिए संस्थान के लोगों से ध्यान साधना करने का अपील की। 
माउण्ट आबू से जुड़ी यादें: पूर्व प्रधानमंत्री की यादें माउंट आबू से भी जुड़ीं हैं। 
उन्हें तीन पर्यटन स्थल ज्यादा प्रिय थे जिसमें मनाली, अल्मोड़ा तथा माउण्ट आबू था। वह अपने राजनीतिज्ञ जीवन काल में तीन बार माउण्ट आबू आये थे। 
पहली बार वे ब्रह्माकुमारीका के अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन 'ग्लोबल कोआपरेशन फार बेटर वल्र्ड' में भाग लेने के लिए आए थे।
 अपने ओजस्वी भाषण में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि विज्ञान और टेक्नोलॉजी की सहायता से मनुष्य ने भौतिक सुख-सुविधाओं से युक्त संसार का निर्माण करने में सफलता पाई है। लेकिन भौतिक समृद्धि में सुख नहीं है। सुख की खोज अपने भीतर करना होगी। पैसे से दवा खरीदी जा सकती है लेकिन स्वास्थ्य नहीं खरीदा जा सकता है। पूंजी से वैभव और विनाश के साधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं। लेकिन यदि मन में पीड़ा है, अंतर्मन में बैचेनी है, परिवार में सुख नहीं है तो मनुष्य को कुबेर की संपत्ति भी सुख प्रदान नहीं कर सकती है। 
उन्होंने कहा था कि मनुष्य चंद्रमा तक पहुंच गया है लेकिन यह नहीं सीख पाया है कि धरती पर किस तरह रहना है। हम पक्षी की तरह आसमान में उड़ सकते हैं, मछली की तरह पानी में चल सकते हैं लेकिन इंसान धरती पर रहना नहीं सीख पाया है। प्रश्न है कि विज्ञान का उपयोग कैसे हो। आग में खाना भी पकाया जा सकता है तो आग से घर को भी जलाया जा सकता है। हमारी निर्माण की बुद्धि हो, विनाश की नहीं, ये शिक्षा माउंट आबू से ही मिलेगी।
    इसके बाद वे 30 अप्रैल 1995 में भी माउण्ट आबू आये थे। तब वे ब्रह्माकुमारीज संस्था के ज्ञान सरोवर एकेडेमी में कार्यक्रम में भाग लिया था। तब वे नेता प्रतिपक्ष थे। उन्होंने उस दौरान कहा था कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान एक खुली किताब की तरह है। इसके बाद एक बार और उनका आना हुआ था। 
प्रधानमंत्री रहते किया था सम्मानित: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री थे तब यूनाईटेड नेशन शांति की संस्कृति वर्ष चलाया था। जिसमें सबसे ज्यादा हस्ताक्षर ब्रह्माकुमारीज संस्थान ने एकत्र किया था। उस दौरान उन्होंने पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि को अवार्ड से सम्मानित किया था। 
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