10/12/2018  सरकार और विपक्ष दोनों के लिए बेहद अहम रहेगा शीतकालीन सत्र

बीस दिवसीय संसद के शीतकालीन सत्र का शुभारंभ 11 दिसंबर से होगा। आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर कई महत्वपूर्ण विधेयकों के साथ ही तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर यह सत्र बेहद दिलचस्प रहने वाला है। कामकाज के लिहाज से सरकार की कोशिश रहेगी कि इस सत्र में तीन तलाक समेत कई अन्य लंबित पड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया जा सके। साथ ही राजनीतिक समीकरण और दबाव के चलते सरकार राम मंदिर के लिए भी विधेयक ला सकती है। गौरतलब है कि अगले लोकसभा चुनावों से पूर्व नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का यह अंतिम पूर्ण संसदीय सत्र होगा। लिहाजाइस सत्र में सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है। माना जा रहा है कि इस सत्र में राफेल मुद्दे पर विपक्षसरकार को घेरने की तैयारी में होगा। सीबीआई में खींचतानआरबीआई और नोटबंदी जैसे मुद्दों पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर रहेंगे। वहीं सरकारी पक्ष भी नेशनल हेराल्ड और अगस्ता वेस्टलैंड मामले में विपक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है। जाहिर है कि कांग्रेस के दोनों शीर्षस्थ नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी इन मामलों में आरोपी हैं।

 

आठ जनवरी,2019 तक चलने वाले शीतकालीन सत्र की जानकारी देते हुए संसदीय मामलों के राज्यमंत्री विजय गोयल ने कहा है कि सत्र के दौरान संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चले, इसके लिए वह सभी राजनीतिक दलों से सहयोग और समर्थन की अपेक्षा रहेगी। मोदी सरकार के लिए शीतकालीन सत्र का शांतिपूर्ण ढंग से चलना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसके बाद सरकार सिर्फ संक्षिप्त बजट सत्र ही बुला पाएगी, जिसमें मई-2019 तक का बजट पारित करना होगा। जबकि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए संसद के दोनों सदनों को पहले दिन के लिए स्थगित कर दिया जाएगा। इस सत्र से केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर संसदीय कार्य मंत्री का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। ऐसे में उनके सामने शीतकालीन सत्र के सुचारू संचालन की बड़ी चुनौती होगी।दूसरी तरफ, सत्र के पहले ही दिन मध्य प्रदेश व राजस्थान समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होंगे। इसका असर भी सत्र की कार्यवाही पर पड़ेगा। फिलहाल चुनावी दौर से गुजर रहे पांच राज्यों में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा का शासन है, जबकि तेलंगाना में तेदेपा और मिजोरम में कांग्रेस गठबंधन की सरकार है।

 

संसद के इस सत्र की भूमिका इसमें पारित होने वाले कई अहम विधेयकको लेकर काफी अधिक होगी। जिसमें खासकर राम मंदिर पर संसद में विधेयक आने की पूरी संभावना है। चूंकि वर्तमान में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा भारतीय राजनीति के केंद्र में बना हुआ है। ऐसे में राम मंदिर पर संसद में कानून लाने को लेकर मोदी सरकार पर भी काफी दबाव है। इतना ही नहीं आरएसएस समेत कई हिंदूवादी संगठन और संत समाज मोदी सरकार से संसद में राम मंदिर पर कानून लाने की मांग कर रहे हैं। भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वह इस सत्र में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए प्राइवेट बिल लाएंगे। इसके अलावा, केंद्र सरकार इस दौरान राज्यसभा में लंबित तीन तलाक के बिल को पारित कराने के भरपूर प्रयास करेगी। मॉनसून सत्र में तीन तलाक मामले में संसद में बिल पारित कराने में नाकाम रहने के बाद सरकार ने इसे दंडनीय अपराध बनाने के लिए अध्यादेश का सहारा लिया था। अब सरकार को इस मामले में संसद की मंजूरी लेनी होगी। हालांकि इसके कई प्रावधानों पर विपक्ष को ऐतराज है। ऐसे में संसद के दोनों सदनों में इस मामले में तीखी भिड़ंत होने के आसार हैं। 

 

शीत सत्र में विपक्ष का गरम रूख जगहों के नाम बदलने की राजनीति को लेकर भी दिख सकता है। विपक्ष ने सरकार द्वारा नाम बदलने की प्रकिया की संसद के बाहर भी आलोचना की है और उम्मीद है कि संसद के अंदर भी सरकार पर उसके हमले जारी रहेंगे। विपक्ष का आरोप है कि सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए शहरों का नाम बदलकर लोगों को बरगला रही है। किसान और महंगाई जैसे मुद्दों पर भी विपक्ष सरकार को घेरना चाहता है। मोदी सरकार के एजेंडे में इसी सत्र में इंडियन मेडिकल काउंसिल संशोधन अध्यादेश और कंपनियों के संशोधन अध्यादेश को भी बतौर बिल पारित कराने की कोशिश है। लोकसभा में इस बार 15 बिलों पर चर्चा होनी है, जबकि राज्यसभा में आठ विधेयक होंगे।

 

अमूमन संसद का शीतकालीन सत्र नवंबर में शुरू होता है लेकिन यह लगातार दूसरा साल है जब शीतकालीन सत्र दिसंबर में शुरू होगा। 2017 में शीतकालीन सत्र 15 दिसंबर से पांच जनवरी तक चला था। इससे पहले मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा की 17 दिनों की बैठक में कुल 112 घंटे तक कार्यवाही चली थी। लोकसभा में 118 फीसद, जबकि राज्यसभा में 68 फीसद कामकाज हुआ था। इस दौरान दोनों सदनों द्वारा कुल 20 विधेयक पारित किए गए, जो दर्शाता है कि कामकाज के लिहाज से मॉनसून सत्र ने रिकॉर्ड बनाए थे। सरकार की कोशिश रहेगी कि शीतकालीन सत्र भी कामकाज की दृष्टि से बेहतर साबित हो। इस दौरान ज्यादा से ज्यादा समय अच्छी चर्चाओं में, विधायी कामकाज में लगे और जनता के बीच सरकार को लेकर एक सकारात्मक सोच पहुंचे, जिसका लाभ आने वाले लोक सभा चुनावों में सरकार को मिल सके।

 

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