राष्ट्रीय (11/04/2019) 
क्या शनि मोदी को सत्ता प्रदान करेगा ? - मदन गुप्ता सपाटू, 9815619620

इस माह के अंतिम दिन 30 अप्रैल 2019 को शनि धनु राशि में वक्री हो जाएगा। ये ग्रह 18 सितंबर 2019 तक वक्री रहेगा। 

शनि का राशि परिवर्तन ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्मसेवानौकरी और लोकतांत्रिक संस्थाओं का कारक माना जाता है। इसलिए यह मनुष्य के करियर व आजीविका को प्रभावित करता है। ज्योतिष शास्त्र में शनि को सूर्य पुत्रशनिश्चरछायापुत्र और मंद आदि नामों से जाना जाता है। यह मकर और कुंभ राशि का स्वामी है। सूर्यचंद्रमा और मंगल को शनि शत्रु मानता है। जबकि बुध और शुक्र को मित्र व बृहस्पति के साथ सम भाव रखता है।

शनि वर्ष 2019 में धनु राशि में ही स्थित रहेगा। इस दौरान 30 अप्रैल को शनि वक्री गति करेगा और 18 सितंबर को धनु राशि में पुनः मार्गी हो जाएगा। इसी वर्ष शनि 20 जनवरी तक अस्त रहेगा यानि उसका प्रभाव कम हो जाएगा। वहीं साल के अंत में 27 दिसंबर को शनि पुनः अस्त होगा और 31जनवरी 2020 तक इसी स्थिति में रहेगा। इस साल शनि ज्यादातर समय पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में स्थित रहेगा और 27 दिसंबर 2019 को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करेगा।

कैसा रहेगा वक्री शनि भारत के लिए ?

अप्रैल -मई में 17 वीं लोकसभा के चुनावों में शनि की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। प्रधान मंत्री की जन्म तिथि 17  होने के कारण मूलांक भी 8 ही है। भाग्यांक 5 है ओर 5वें महीने में ही चुनाव परिणाम आएंगे।इस दौरान शनि, केतु और गुरु ,धनु राशि में रहेंगे। ये तीनों ग्रह 24 जनवरी ,2020 तक एक ही घर में रहंेगे औेर भारत की राजनीति में एक बड़ा परिवर्तन लाएंगे। जिनका शनि बलवान है और शनि की साढ़सती भी चल रही है, उनके जीवन में इन तीनों ग्रहों का यह योग, एक वरदान सिद्ध होगा।  यदि लोकसभा के पिछले चुनावों पर नजर दोैड़ाएं तो 1962, 1984, 1996 के चुनावों में शनि व केतु एक साथ थे और  तत्कालीन  सत्ता पक्ष को फायदा हुआ था।  इस साल 2019 मे वही पोजीशन है। अतः यह कहा जा सकता है कि वर्तमान पार्टी पुनः सत्ता में आ सकती है।  इसके अलावा ज्योतिष में राजा की कुंडली बहुत अधिक महत्व रखती है। यदि राजा का भाग्य कमजोर है तो सत्ता छिन जाती है या छत्रभंग हो जाता है। वर्तमान संदर्भ में प्रधान मंत्री की कुंडली देखी जाएगी जो अत्यंत सशक्त है।  शनि, मोदी का प्रबल ग्रह है औेर  शनि का अंक 8 उससे भी जोरदार। नव संवत 2076 का राजा भी शनि है और नया संवत शनिवार को ही आरंभ हुआ है। मोदी की बृश्चिक राशि में साढ़सती भी चल रही हेै। तीनों ग्रह दूसरे भाव मेंहैं और भाग्य भाव के स्वामी  चंद्रमा की दशा चल रही है जो लग्न में विराजमान है। यह एक सशक्त योग है जो पुनः प्रधानमंत्री बनाएगा। 


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