राष्ट्रीय (08/05/2019) 
क्या मजूदूरों की मौत इसी तरह होती रहेगी, क्या सरकार लापवाही बरतती रहेगी, क्या बड़े-बड़े दावे करने वाली केजरीवाल सरकार चुप रहेगी, लोग इसका जवाब चाहते हैं केजरीवाल को इसका जवाब देना पड़ेगा-विजेन्द्र गुप्ता

नई दिल्ली, 8 मई। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष  विजेन्द्र गुप्ता ने आज भारतीय जनता पार्टी दिल्ली प्रदेश कार्यालय पर बाहरी दिल्ली के प्रेम नगर में हुई सीवर सफाई के दौरान जहरीली गैस के चपेट में आने से दो मजदूरों की मौत को लेकर और केजरीवाल सरकार की लापरवाही के कारण पिछले दो वर्षों में 60 से अधिक सफाईकर्मीयों की मृत्यु को लेकर प्रेस वार्ता की। इस अवसर पर प्रदेश मीडिया प्रभारी  प्रत्युष कंठ, प्रवक्ता  प्रवीण शंकर कपूर एवं  हरीश खुराना उपस्थित थे।

        पत्रकारों को सम्बोधित करते हुये दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष  विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि एक ओर दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार खुद को गरीबों की हितैषी और आम आदमी की सरकार होने का दावा करती रहती हैं लेकिन दूसरी ओर वह अपने इस चेहरे के विपरीत सफाई कर्मचारियों की लगातार हो रही मौतों के बाद भी असंवेदनशीलता बरतती आ रही है। इस संवदेनहीनता का हाल यह है कि बाहरी दिल्ली के प्रेम नगर में सीवर की जहरीली गैस के चपेट में आने से दो मजदूरों की मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया है। सफाईकर्मी दलित परिवारों से आते हैं, लेकिन जहरीली गैस के कारण हुई दुखद मौत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि केजरीवाल सरकार ने मैनुअल स्कैवेंजर्स (सीवर की हाथ से सफाई करने वाले) को जानलेवा दुर्घटनाओं से बचाने, उनका पुनर्वास करने और उनकी स्थिती को सुधारने के लिए बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।

 

                 गुप्ता ने कहा कि महरौली क्षेत्र में सीवर की सफाई मैनुअल रूप से सफाई करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है, सफाई करने के पहले सरकार द्वारा रिएबल चेक करने की व्यवस्था है। यह एक्ट 2013 में केन्द्र सरकार द्वारा जारी मैनुअल स्कैवेंजर्स संबंधी नियमों को अभी तक दिल्ली सरकार ने लागू नहीं किया  है। इसके बाद 2015 में केजरीवाल की सरकार आई। इसे लेकर लागू करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया। कोर्ट ने स्टेट लेवल मॉनिटरिंग कमेटी का गठन करने के लिए कहा था। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से केजरीवाल सरकार ने तीन साल तक कोई कमेटी नहीं बनाई। यह कमेटी बाद में 2017 में बनी जिसे हर छठवें महीने पर एक बैठकर करना था। केजरीवाल ने पहली बैठक 2018 में की। इसमें केजरावाल ने कहा कि केवल 45 मैनुअल स्कैवेंजर्स है। जबकि हकीकत ये है कि दो साल 60 लोगों से ज्यादा स्कैवेंजर्स की मौत हो चूकी है। इसके बाद मैने 2019 में पूछा कि दिल्ली में कितने मैनुअल स्कैवेंजर्स हैं तो दिल्ली सरकार ने कहा कि कोई नहीं है।

 

                 गुप्ता ने कहा कि मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि केजरीवाल ने सफाई कर्मचारियों को लेकर कदम दर कदम लापरवाही बरती है। आज तक इन सारे मामलों में एक भी अधिकारी को जेल नहीं भेजा। इसी लापरवाही की वजह से दिन प्रतिदिन दिल्ली में सीवर के सफाईकर्मियों की मौत की संख्या बढ़ती जा रही है। केजरीवाल सरकार मजदूरों के कल्याण के लिए बनाए गए किसी भी नियम या दिशा निर्देश पर कोई काम नहीं कर रही है। वो इस मौत को भी रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रही है। मैं केजरीवाल से जानना चाहता हूं कि केजरीवाल ने इन चार सालों में इन कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए, इनके प्रशिक्षण के लिए बनाए गए नियमों का कितना पालन किया?

 

                 गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल ने लगातार हो रही मौतों के बाद फरवरी 2019 में मुझसे कहा था कि हम इनके लिए दिल्ली की छोटी गलियों में सीवर की सफाई के लिए 200 मशीने खरीद रहे हैं और 31 मार्च तक उसकी सप्लाई हमारे पास आ जाएगी। यानि 4 साल तक जिन मैनुअल स्कैवेंजर्स को रिप्लेस करने के लिए जिन मैकेनिजम की जरूरत थी, वो चार साल तक नहीं किया और अब चार साल बाद केवल 200 मे से 2 से 3 दर्जन मशीन आई। सीधी सी बात है कि इन लोगों को बचाने के लिए जिन मशीनों की जरूरत थी वो भी अभी तक नहीं आ सकी है। सबसे बड़ी बात यह है कि जो मशीने आई भी हैं, उनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। क्योंकि ये मशीने भी जरूरत से ज्यादा बड़ी हैं। उनका छोटी गलियों में जाना संभव नहीं है। केजरीवाल तो जिन लोगों की मौत हुई है उनका हाल तक पूछने नहीं जाते हैं। क्या मजूदूरों की मौत इसी तरह होती रहेगी ? क्या सरकार लापवाही बरतती रहेगी ? क्या बड़े-बड़े दावे करने वाली केजरीवाल सरकार चुप रहेगी ? लोग इसका जवाब चाहते हैं, केजरीवाल को इसका जवाब देना पड़ेगा।

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