राष्ट्रीय (10/05/2019) 
दिल्ली के बिजली क्षेत्र में व्यापक अनियमितताओं और केजरीवाल सरकार द्वारा व्यवस्थित लूट-विजेन्द्र गुप्ता

नई दिल्ली, 10 मई।  दिल्ली विधान सभा में विपक्ष के नेता,  विजेन्द्र गुप्ता ने केजरीवाल सरकार पर दिल्ली के बिजली क्षेत्र में व्यापाक अनियमितताओं और व्यवस्थित लूट का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार ने अपने चुनावी घोषणापत्र में बिजली कंपनियों के संबंध में आम आदमी पार्टी द्वारा किए गए एक भी वादे को पूरा नहीं किया। उन्होंने दिल्ली में बिजली क्षेत्र के संबंध में निम्नलिखित दस मुद्दे उठाकर केजरीवाल से जवाब मांगा है। इस अवसर पर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा, प्रदेश भाजपा प्रवक्ता तजिंदर बग्गा और प्रदेश मीडिया प्रमुख अशोक गोयल देवराहा इत्यादि उपस्थित थे।

 

1. दिल्ली सरकार ने बिजली के बिलों में निर्धारित शुल्क में 6 गुना बढ़ोतरी की है। वर्ष 2018 में ही केवल एक साल के अंतराल में ही प्रति कनेक्शन चार्ज 20 रूपए से बढ़ाकर 125 रूपए किए गए। जिसने निम्न और मध्यम वर्ग के ग्राहकों को बुरी तरह से प्रभावित किया है जो अक्सर बिजली की न्यूनतम मात्रा का उपयोग करते हैं।

 

2. इलैक्ट्रिसिटी ट्रिब्यूनल व माननीय सर्वोच्च न्यायालय पॉवर परचेज एडजेस्टमेंट चार्जेस की ग्राहकों से वसूली को असंवैधानिक ठहरा चुके हैं। इन आदेशों के अनुसार ग्राहकों से वसूला गया पैसा वापस किया जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवेहलना करते हुए ग्राहकों से बिजली के बिलों के माध्यम से अभी भी पॉवर परचेज एडजेस्टमेंट चार्जेस वसूले जा रहे हैं।

 

3. वर्ष 2002 में दिल्ली सरकार और डिस्कॉम ने मिलकर कर्मचारियों को पेंशन भुगतान के उद्देश्य से पेंशन ट्रस्ट फंडकी स्थापना की थी जिसे वर्तमान केजरीवाल सरकार ने भंग कर दिया और ग्राहकों से पेंशन फंड के रूप में बिजली बिल का 3.8 प्रतिशत संभवतः डिस्कॉम को लाभ पहुंचाने के लिए ग्राहकों से एकत्रित कर उन्हें दंडित किया जा रहा है। क्योंकि यह टैरिफ नहीं है इसे ग्राहकों से वसूला नहीं जा सकता।

 

4. मध्यप्रदेश में रेवा सोलर पॉवर प्लांट जो कि स्वच्छ और रिन्यूएबल सौर ऊर्जा पर चल रहा है, पहले से ही दिल्ली मेट्रो को 3.30 रूपए प्रति यूनिट की दर से बिजली की आपूर्ति कर रहा है। दिल्ली डिस्कॉम के पास भी यह सस्ती बिजली खरीदने का विकल्प उपलब्ध है, लेकिन वे अन्य स्रोतों से महंगी दर पर बिजली खरीद रहे हैं, जिसका कारण सर्व विदित है।

 

5. वर्तमान केजरीवाल सरकार अपने घोषणा पत्र के अनुसार अपने वायदों को पूरा करने में विफल रही है-

 

ंक) बिजली बिलों का सरलीकरण।

 

ख) सभी विद्युत आपूर्ति कंपनियों का कंट्रोलर एवं ऑडिटर जनरल (कैग) द्वारा ऑडिट।

 

ग) विद्युत कंपनियों को सूचना के अधिकार के अंतर्गत लाना।

 

6. उपरोक्त सभी वायदों में विफल होने पर विशेष रूप से व्यवसायों के लिए बिजली के बिल की लागत प्रति यूनिट 13.50 रूपए तक बढ़ गई है।

 

7. दिल्ली के नागरिकों को सस्ती और निर्बाध बिजली की आपूर्ति का वादा किया था लेकिन आज आम आदमी पार्टी की सरकार के 4.5 साल कार्यकाल में बिजली आपूर्ति की स्थिति पहले की तुलना में और बदतर हुई है।

 

8. फैक्ट्री चलाने वालों के लिए प्रति किलोवाट फिक्स चार्जस 125 रुपये से बढ़ाकर 250 प्रति किलोवाट कर केजरीवाल सरकार ने इनकी कमर तोड़ दी है जिनमें से कई पड़ोसी राज्य हरियाणा में अपनी फैक्ट्रियां स्थानांतरित करने के लिए मजबूर हैं क्योंकि उन्हें अब 90 किलोवाट के कनेक्शन के लिए निर्धारित शुल्क के रूप में 22,500 का भुगतान करना होगा। इनमें से कई कारखाने बिजली का उपयोग मौसम के अनुसार करते हैं लेकिन उन्हें पूरे साल के लिए बिजली बिल का भुगतान करना होगा।

 

9. केजरीवाल सरकार ने घोषणा की थी कि यदि बिजली वितरण कंपनियां तय समय से अधिक बिजली कटौती करती हैं तो उन्हें बिजली उपभोक्ताओं को क्षतिपूर्ति देनी होगी। अब तक क्षतिपूर्ति के रूप में किसी को भी एक पैसा नहीं मिला है।

 

10. दिल्ली की अनाधिकृत कॉलोनियां जहां अभी तक विद्युतिकरण नहीं हुआ है, प्रति कनेक्शन शुल्क 3,6 00 रूपए प्रति किलोवाट से 10,040 रूपए प्रति किलोवाट बढ़ाकर केजरीवाल सरकार ने गरीब से गरीब लोगों को लूटने का काम किया है।

 

 गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के मतदाता केजरीवाल सरकार को बिजली क्षेत्र में बरती जा रही अनियमितताओं और उनकी व्यवस्थित लूट के लिए कभी माफ नहीं करेंगे तथा आने वाले रविवार को होने वाले लोकसभा चुनावों में भाजपा के पक्ष में भारी संख्या में मतदान कर आम आदमी पार्टी को उनके द्वारा किए गए चुनावी वायदे न पूरे करने के लिए अपना गुस्सा जाहिर करेंगे।

 

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