राष्ट्रीय (24/05/2019) 
मिथिला विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोहों में हो पाग का प्रयोग : पागमैन
मिथिला पाग  मिथिलांचल का केवल एक सिरवस्त्र नहीं है बल्कि वह इस क्षेत्र की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत है जिसका सम्मान और संरक्षण करना सभी मिथिलावासियों का कर्तव्य होना चाहिए। मिथिला पाग की परम्परा सदियों पुरानी है जो मिथिलांचल के ज्ञान व प्रतिभा को भी व्यक्त करता है। उक्त बातें मिथिलालोक फाउंडेशन के चेयरमैन और सुप्रसिद्ध शिक्षाविद  डॉ. बीरबल झा ने कही। इस संबंध में उन्होंने बिहार के माननीय गवर्नर श्री लालजी टंडन एवं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति एसके सिंह को अलग-अलग पत्र लिखकर यह आग्रह किया कि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोहों में भी मिथिला की सांस्कृतिक प्रतीक चिन्ह मिथिला पाग का ही प्रयोग किया जाए न कि आयातित शाफा का। इस पहल से सदियों पुरानी मिथिला की पागसंस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और साथ ही युवा पीढी अपनी संस्कृति से परिचित भी हो सकेगी। 

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के वार्षिक दीक्षांत समारोह में पाग और पगड़ी को लेकर एक विवाद उठ खड़ा हुआ था जिसके संबंध में अलग-अलग विद्वानों ने अपने भिन्न-भिन्न मत दिए थे। डॉ. झा ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में ऐसे विवाद उचित नहीं कहे जा सकते हैं। यह तो हमारे लिए गर्व का विषय है कि भारत सरकार ने वर्ष 2017 में प्राचीन काल से ही प्रयोग में आने वाले मिथिला पाग पर एक डाक टिकट जारी किया जिसे काफी सराहना मिली। 

यहां यह भी गौरतलब है कि समाजिक संस्था ‘मिथिलालोक फाउंडेशन’ के तत्वावधान में पिछले काफी समय से "पाग बचाउ अभियान" चलाया जा रहा था जिसने सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया था। इस अभियान की शुरुआत डॉ. झा के नेतृत्व में देश की राजधानी दिल्ली से की गई थी। इस अद्वितीय अभियान को सफल बनाने के लिए जगह-जगह पाग-मार्च भी निकाला गया था जिसमें प्रवासी मिथिलावासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। इस अभियान के संबंध में यह भी कहा जाता है कि मिथिला से जुड़े सांस्कृतिक आंदोलनो में यह अब तक का यह सबसे बड़ा अभियान रहा है। मिथिला के ‘यंगेस्ट लिविंग लीजेंड’ माने जाने वाले डॉ बीरबल झा के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान को एक करोड़ से अधिक लोगों ने अपना समर्थन दिया।  

डॉ. झा जिन्हे अब 'पागमैन' के रुप में भी जाना जाता है, का कहना है कि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय को तत्काल एक नोटिफिकेशन जारी करना चाहिए जिसके द्वारा यह घोषणा की जाए कि आगामी दीक्षांत समारोह में साफा की जगह पाग ही प्रयोग किया जाएगा।

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