राष्ट्रीय (03/06/2019) 
मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र
चंडीगढ़, 3 जून। वैश्य समाज को राजनीति के प्रति जागरूक करने वाले सबसे बड़ें सामाजिक संगठन अग्रवाल वैश्य समाज ने भारत सरकार के मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव ईवीएम मशीन की बजाऐं बैलेट पेपर पर करवाने की मांग की है। समाज के प्रदेश अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने पत्र के माध्यम से मुख्य चुनाव आयोग को अवगत करवाया कि 17वीं लोकसभा के चुनाव के दौरान बहुत सी ऐसी घटनाऐं घटित हुई है जिन्होंने ईवीएम मशीनों पर सवालियां निशान लगा दिया है। विभिन्न समाचार पत्रों की सुर्खियों का संज्ञान देते हुए बुवानीवाला ने चुनाव आयोग को बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में ईवीएम मशीन स्ट्रांग रूम की बजाऐं यहां-तहां से संदिग्ध हालात में जब्त करने की खबरे मिली प्रसारित की गई थी। इसके अलावा मशीनों के खराब होने की वजह से भी कई स्थानों पर मतदान प्रक्रिया प्रभावित नजर आई थी। इतना ही ईवीएम मशीन के हैक होने के शंका भी हमेशा बनी रही है क्योंकि ईवीएम मशीनों व बैलेट पेपर से हुए बहुत से निकाय चुनाव के परिणामों में एक बहुत बड़ा अंतर भी देखने को मिला है। ईवीएम मशीन से होने वाले निकाय चुनावों में सत्ता पक्ष को एकतरफा चुनाव जीतने हुए देखा गया है वहीं बैलेट पेपर पर हुए चुनावा में सत्ता पक्ष को उम्मीद से विपरित चुनाव परिणाम देखने में मिले है। जिस कारण देशभर में विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम जनता के मन में भी ईवीएम मशीनों के प्रति व्यापक संदेह देखने को मिला है। बुवानीवाला ने कहा कि आगामी कुछ माह में हरियाणा सहित कुछ अन्य राज्यों में भी विधानसभा के चुनाव होने है ऐसे में ईवीएम मशीनों की विश्वसनीयता पर फिर से संदेह उठना स्वभाविक है। लोकतंत्र के सजग प्रहरी के रूप में चुनाव आयोग की निष्पक्षता आम जनता के मन में मजबूती से पेश करने की दृष्टि से बुवानीवाला ने चुनाव आयोग को हरियाणा विधानसभा चुनाव ट्रायल के रूप में बैलेट पेपर से करवाने की मांग करते हुए कहा कि हरियाणा देश के छोटे राज्यों में से एक है इसलिए यहां ट्रायल के रूप में बैलेट पेपर से चुनाव सबसे उपयुक्त होगा। हरियाणा का चुनाव बैलेट पेपर से होने से ईवीएम से हुए लोकसभा चुनाव व विधानसभा चुनाव के परिणामों की समीक्षा से चुनाव आयोग की निष्पक्षता के साथ-साथ देश की जनता में ईवीएम मशीनों के प्रति विश्ववास कायम किया जा सकें। बुवानीवाला ने तकनीकि वजह बताते हुए कहा कि ईवीएम सही है या गलत इसे सिर्फ सॉफ्टवेयर इंजीनियर या इंजीनियर की समझ रखने वाले लोग ही समझ सकते है इसके अलावा कोई सामान्य नागरिक इसे नहीं परख सकता। जर्मनी और जापान जैसे विकसित देशों की सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ इसी आधार पर मतदान में मशीनों के इस्तेमाल को खारिज कर दिया था। क्योंकि मशीन सही है या नहीं है इसे समझने के लिए सारे मतदाता समान रूप से सक्षम नहीं है। चिप कैसे काम करता है यह बात हर मतदाता बराबरी से नहीं समझ सकता। इसलिए मतदान में मशीन का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। 
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