राष्ट्रीय (12/06/2019) 
बिजली के मुद्दे पर अपनी ही शिकायत का आधार नही बता सके कांग्रेस नेता।

बुधवार को एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने बताया कि दिल्ली में बिजली के दामों को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित जी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी से मिलने का समय मांगा था। क्योंकि यह मुद्दा दिल्ली की जनता से जुड़ा हुआ मुद्दा है, अरविंद केजरीवाल जी ने तुरंत प्रभाव से शीला दीक्षित जी से मुलाकात की।

 

पूर्व में हुई एक घटना का हवाला देते हुए सौरव भारद्वाज ने कहा, कि जब दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी और शीला दीक्षित जी दिल्ली की मुख्यमंत्री थी, तब अरविंद केजरीवाल जी ने दिल्ली में बिजली के दामों को लेकर एक बड़ा आंदोलन किया था। दिल्ली की जनता बिजली के दामों को लेकर बेहद परेशान थी। लगभग 10 लाख लोगों ने बिजली के दामों के खिलाफ पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया था। जब यह 10 लाख पत्र लेकर अरविंद केजरीवाल और उनके साथी, उस समय की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित जी के घर उनसे मिलने पहुंचे, तो उनके एक सहयोगी ने यह कहकर, कि मुख्यमंत्री जी सो रही है, अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों को शीला दीक्षित जी से मिलने का समय तक नहीं दिया था। परंतु आम आदमी पार्टी जनता की पार्टी है और जनता से जुड़े मुद्दों पर किसी भी व्यक्ति से, किसी भी पार्टी से बातचीत करने के लिए तत्पर रहती है।

 

उन्होंने बताया मुलाकात के दौरान जब मुख्यमंत्री जी ने शीला दीक्षित जी से पूछा कि आप बिजली के दामों को लेकर यह जो आंकड़े लेकर आए हैं, इनका आधार क्या है? तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। शीला दीक्षित जी ने पलटकर कांग्रेस के दूसरे नेता हारून यूसुफ जी की तरफ देखा, हारून यूसुफ जी के पास भी इसका कोई जवाब नहीं था। उन्होंने भी पलटकर कांग्रेस के एक और नेता देवेंद्र यादव जी की ओर देखा और देवेंद्र यादव जी ने लिलोठिया जी की तरफ देखा। अर्थात कांग्रेस की ओर से शीला दीक्षित सहित, जो लोग बिजली के मुद्दे पर शिकायत लेकर आए थे, उनमें से किसी के पास भी इस बात का जवाब नहीं था कि यह आंकड़े जो वह लेकर आए हैं उसका आधार क्या है।

 

प्रेस वार्ता में मौजूद कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन ने कुछ आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि कांग्रेस के जो भी आरोप है सब निराधार है। कांग्रेस के समय की तुलना में आज दिल्ली में बिजली के दाम बहुत कम है। 2010 में जब दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी, तब 1 किलो वाट के मीटर पर 50 यूनिट का बिल ₹153 था। वही बिल 2013 आते-आते ₹264 तक पहुंच गया। अर्थात शीला दीक्षित जी की सरकार में 3 साल के अंदर 73% बिजली के दाम बढ़ाए गए। आज दिल्ली में 50 यूनिट के लिए मात्र ₹128 के बिल का भुगतान करना पड़ता है, जोकि शीला सरकार के समय से लगभग आधा है। इसी प्रकार 100 यूनिट तक के लिए शीला दीक्षित जी की सरकार के समय ₹485 बिल भुगतान करना पड़ता था। आज वही बिल मात्र ₹211 के लगभग उपभोक्ताओं को भुगतान करना पड़ता है।

 

अर्थात पुराने सभी आंकड़ों को वर्तमान सरकार के आंकड़ों से मिलान किया जाए तो यह साबित होता है कि शीला सरकार के समय की तुलना में आज आम आदमी पार्टी की सरकार में दिल्ली की जनता को बिजली लगभग आधे दामों पर मुहैया कराई जा रही है।

 

सत्येंद्र जैन ने कहा कि जिस रफ्तार से शीला जी की सरकार में बिजली के दाम बढ़ाए गए थे, अगर उसी रफ्तार से आज भी बिजली के दाम बढ़ते रहते, तो जो दाम आज ₹128 है, वह उपभोक्ताओं को लगभग ₹ 760  महीना का भुगतान करना पड़ता। इस हिसाब से अभी ₹632 महीने की बचत हो रही है। 

 

उन्होंने बताया की मीटिंग के दौरान जब हमने कांग्रेस के नेताओं को देश के अन्य राज्य, जहां पर कांग्रेस की सरकार है, जैसे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान आदि में बिजली के दाम दिल्ली के दामों के बराबर करने की बात कही, तो कांग्रेस के नेताओं ने यह कहकर, की अन्य राज्य की बातें छोड़ो, वह हमारे हाथ में नहीं है, अपना पल्ला झाड़ लिया। हम पूछना चाहते हैं कि इन राज्यों में सरकार तो कांग्रेस की ही है, तो जब दिल्ली की जनता को इतने सस्ते दामों पर बिजली मिल सकती है, तो कांग्रेस अपने राज्यों में यह दाम जनता को क्यों नहीं उपलब्ध करा सकती?

 

एक बड़ा खुलासा करते हुए सत्येंद्र जैन ने बताया कि दिल्ली मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों से बिजली खरीदती है। परंतु उन्हीं राज्यों में दिल्ली के मुकाबले 3 गुना महंगे दामों पर, वहां की जनता को बिजली उपलब्ध कराई जाती है। जब दिल्ली मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से बिजली खरीदकर, दिल्ली की जनता को इतने सस्ते दामों पर बिजली मुहैया करा सकती है, तो छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश कि कांग्रेस सरकार अपनी जनता को दिल्ली के बराबर दामों पर बिजली उपलब्ध क्यों नहीं करा सकती?

 

सत्येंद्र जैन ने कहां कि जब से दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है, तब से लेकर आज तक के आंकड़े का मिलान पिछली सरकार के आंकड़ों से करके देख लीजिए, पिछली सरकारों में प्रतिवर्ष बिजली के दाम बढ़ाए जाते थे, जबकि आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद एक बार भी दिल्ली में बिजली के दाम नहीं बढ़े हैं। 10 साल पहले दिल्ली के अंदर बिजली की जो स्थिति थी उसके मुकाबले आज दिल्ली में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। पहले हर घर में इनवर्टर हुआ करते थे। हर दुकान पर जनरेटर हुआ करते थे। परंतु जब से आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली में आई है, लोगों ने इनवर्टर और जनरेटर रखना बंद कर दिया है।

 

सत्येंद्र जैन ने कांग्रेस से अनुरोध करते हुए कहा की झूठे और आधारहीन आरोप प्रत्यारोप करने की बजाय, कांग्रेस अपने उन राज्यों में, जहां कांग्रेस की सरकार है, वहां पर भी जनता को दिल्ली की भांति सस्ती बिजली उपलब्ध कराने पर ध्यान दें।


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