राष्ट्रीय (28/06/2019) 
श्रीराम जन्मस्थान विवाद और समाधान
पक्षकार अखिल भारत हिंदू महासभा द्वारा श्रीराम जन्मस्थान मंदिर पर स्पष्टीकरण
राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रमोद पंडित जोशी द्वारा प्रकाशनार्थ
सन १०२६ सोरटी सोमनाथ मंदिर पर महमूद गझनवी ने आक्रमण कर उसे ध्वस्त किया तो,उसके भांजे सालार मसूद ने १०३२ में 'सतरखा' (साकेत) जीता और अयोध्या पर आक्रमण किया।
श्रीराम जन्मस्थान हवेली (मंदिर) ध्वस्त करने के कारण अनेक राजाओं ने मिलकर उसे भागने पर विवश किया। राजा सुहेलदेव पासी ने उसका पीछा किया और सिंधौली-सीतापुर में सय्यद सालार मसूद के "पांच सिपाहसालार" को मार गिराया।उनको वही दफनाकर पासी राजा सुहेलदेव,सालार मसूद के पीछे निकल पड़ा।आजकल उन कब्र को मजार कहकर " पंचवीर " कहा जा रहा है।

मसूद के जीवनीकार अब्दुर्रहमान चिश्ती ने लिखा है कि, सुहेलदेव ने अनेक राजाओं को पत्र लिखा था। य़ह मातृभूमी हमारे पूर्वजों की है और यह बालक मसूद हमसे छिनना चाहता है।जितनी तेजी से हो सके आओ,अन्यथा हम अपना देश खो देंगे। यह पत्र सालार मसूद के हाथ लगा था और भागने की तयारी में था।पासी राजा के नेतृत्व में लडने के लिए १७ राजा अपनी सेना लेकर आए।इनमें राय रईब,राय अर्जुन,राम भिखन,राय कनक,राय कल्याण,राय भकरू,राय सबरू,राय वीरबल,जय जयपाल,राय श्रीपाल,राय हरपाल,राय प्रभू,राय देव नारायण और राय नरसिंह आदी पहूंचे।
बहराइच से ७ कोस दूर प्रयागपुर के निकट घाघरा के तटपर महासमर हुवा।चारों ओर से घेरकर, रसद तोडकर कई दिनों के युध्द पश्चात् दिनांक १४ जून १०३३ को सालार मसूद मारा गया।चूनचूनकर मुसलमान आक्रांताओं को मारा गया।
सालार मसूद को जहां दफनाया गया उस बहराइच की कब्र को अब मजार कहकर मुसलमान धार्मिक प्रतिष्ठा दे रहे है।
यह भी एक प्रमाण है कि, बाबर द्वारा २३ मार्च १५२८ को राम मंदिर विध्वंस पूर्व भी श्रीराम जन्मस्थान पर हवेली मंदिर था।जिसे रामकोट भी कहा/लिखा जाता रहा है।
बाबर ने जब मीर बांकी के हाथों हुकुम नामा दिया।श्रीराम जन्मस्थान अधिपती श्री पंच रामानंदीय निर्मोही आखाडा महंत श्यामानंद जी पुजारी थे।ने राम जन्मस्थान का कब्जा छोडने से मना किया और मुर्तिया शरयु नदी के लक्ष्मण घाट में छुपा दी।जब मीर बांकी ने आक्रमण किया तब वहा मुर्तिया न देखकर महंत श्यामानंद जी का गला काटकर हत्या की और मन्दिर तोप से ध्वस्त किया।
श्रीराम जी ने स्वप्न में दिए दृष्टांत के अनुसार, यह मुर्तिया नरसिंह राव मोघे जी को शरयु स्नान करते समय मिली।एक ही काले शालिग्राम पर बने पंचायतन मुर्तिया जहा विधिवत प्रतिष्ठित की गई वह ''कालेराम मंदिर" नया घाट पर नागेश्वरनाथ मंदिर की बगल में अयोध्या में सुरक्षित है।उसके
विश्वस्त श्री राघवेंद्र देशपांडे जी है।
इस विवरण के पश्चात मंदिर को बाबरी का कलंक लगानेवाले या बाबरी मस्जिद कहनेवाले सत्य समझ जाएंगे।ऐसी आशा प्रमोद पंडित जोशी ने व्यक्त की है।
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