राष्ट्रीय (29/06/2019) 
अशोक बुवानीवाला ने कहा कि शहर में नगरपरिषद द्वारा चलाए जा रहें पॉलीथिन चालान काटो
भिवानी, 29 जून। राष्ट्रीय जनउद्योग व्यापार संगठन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने कहा कि शहर में नगरपरिषद द्वारा चलाए जा रहें पॉलीथिन चालान काटो अभियान के दौरान प्रतिदिन छापेमारी कर दुकानदारों व रेहड़ी फड़ी लगाने वालों के लाखों रूपऐ के चालान काटे जा चुके हैं। परन्तु प्रशासन द्वारा इसका कोई स्थाई समाधान नहीं निकाला जा रहा है। इस अभियान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बुवानीवाला ने कहा कि भयावह रूप ले चुके प्लास्टिक के खतरे से समाज को बचाना है तो सिर्फ जबरदस्ती प्रतिबंध की घोषणाओं से कुछ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि शासन व प्रशासन को पॉलीथीन व अन्य प्लास्टिक उत्पादों का विकल्प तलाश करना चाहिए और आमजन को इसके खतरे के प्रति जागरूक अभियान भी चलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन छोटे दुकानदारों व रेहड़ी फडी लगाकर अपना गुजर बसर करने वाले गरीब व मध्यम तबको पर ही जुर्माने के माध्यम से वसूली करने में लगा हुआ है, जबकि इन्हीं पालीथीनों में पैक होकर बिक रहें ब्रांडिड स्तर के उत्पादों पर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाहीं नहीं की जा रही है। अशोक बुवानीवाला ने कहा कि नि:संदेह प्लास्टिक हमारे पर्यावरण व स्वयं मनुष्य जाति के लिए कितना खतरनाक बन चुका है और आकंड़ों के मुताबिक 1950 से अब तक दुनिया में 8 अरब 30 करोड़ टन से भी अधिक प्लास्टिक का उत्पादन हो चुका है। हर साल सारी दुनिया में 500 अरब प्लास्टिक की थैलियां इस्तेमाल की जाती हैं, जबकि रोजमर्रा की प्लास्टिक की चीजों के नष्ट होने में 800 से 1000 साल तक का समय लगता है। प्लास्टिक के इस्तेमाल के कारण सैकड़ों वर्षों से चली आ रही मिट्टी के बर्तन, प्राकृतिक साधनों से बने पत्तल व कपड़ें के थैले जैसी राजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें नदारद हो गई हैं। बुवानीवाला ने कहा कि आज प्लास्टिक उद्योग सवा दो लाख करोड़ रूपए तक पहुंच चुका है जिससे देशभर में लगभग 45 लाख लोग रोजगार के रूप में कार्यरत है। बुवानीवाला ने कहा कि प्लास्टिक उद्योग पर नियंत्रण करने के लिए केन्द्र व राज्य सरकार के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन को भी प्लास्टिक के विकल्प खोजने पर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा शासन व प्रशासन अगर बिना किसी रणनीति के प्लास्टिक उद्योग पर प्रतिबंद्ध लगाता है तो देशभर में सीधे तौर पर 45 लाख लोग बेरोजगार हो जाऐंगा। बुवानीवाला ने कहा कि प्लास्टिक की थैलियां व अन्य उत्पादों के इस्तेमाल पर जुर्माना व हल्की-फुल्की सजा के साथ-साथ इस प्रतिबंध के कारण जो कारखाने बंद हों और जो मजदूर बेरोजगार हों उनकी समुचित देखभाल की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए व पॉलीथीन के विकल्प पर सबसे पहले काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को बेरोजगारी व प्लास्टिक उद्योग से पैदा होने वाली भयंकर बीमारियां, जहरीले प्रदूषण और पर्यावरण के विनाश को रोकने के लिए जल्द से जल्द उसके प्राकृतिक संसाधनों से प्लास्टिक के विकल्प पर काम करना चाहिए और आम जनमानस के साथ सामाजिक संस्थाओं को भी प्लास्टिक के प्रति जागरूकता अभियान में शामिल करना चाहिए। 
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