राष्ट्रीय (05/07/2019) 
*दिल्ली के प्रति सौतेला व्यवहार जारी- सांसद एनडी गुप्ता बजट 2019-20 पर*

राज्यसभा सांसद और AAP के कोषाध्यक्ष एनडी गुप्ता और राज्यसभा सांसद सुशील गुप्ता ने आज वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए बजट के संबंध में आम आदमी पार्टी का पक्ष रखने के लिए मीडिया को संबोधित किया।

बजट आवंटन में दिल्ली की हिस्सेदारी अपरिवर्तित रहने के कारण एनडी गुप्ता ने दिल्ली के लोगों की ओर से निराशा व्यक्त की।  दिल्ली देश में सबसे ज्यादा आयकर जमा करनेवाले राज्यों में से एक होने के बावजूद 2002 से अब तक दिल्ली का बजट आबंटन सिर्फ 325 करोड़ पर बना हुआ है।  उसी पर प्रकाश डालते हुए, एनडी गुप्ता ने कहा, "केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली को एक सौतेला व्यवहार दिया जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से बहुत कम सहायता के बावजूद, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने देश को एक मॉडल राज्य के तौर पर प्रस्तुत किया है। दिल्ली में लोगों को आज सबसे सस्ती बिजली पहुंचाई जाती है और प्रति माह 20000 लीटर तक मुफ्त पीने का पानी मिलता है। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में,दिल्ली के मोहल्ला क्लिनिक मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा मिल रही हैं और आज दिल्ली में हर व्यक्ति मुफ्त इलाज और परीक्षण करवा सकता है।  दिल्ली सरकार के स्कूलों में शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव आया है और स्कूलों में विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया है, यहाँ तक कि प्राइवेट स्कूल भी प्रतिस्पर्धा करने की कोशिश कर रहे हैं। दिल्ली के लोगों को उम्मीद थी कि केंद्र सरकार दिल्ली को उसका हक देगी लेकिन केंद्र ने दिल्ली को निराश किया। "

रिटेल में विदेशी निवेश पर उन्होंने कहा "यह एक खतरनाक प्रस्ताव है और मूल रूप से स्मॉल और मीडियम साइज रिटेलर्स के लिए सरकार द्वारा एक आधिकारिक आह्वान किया गया है कि वह अर्ली रिटायरमेंट ले और सरकार की दया पर जिये। GST और नोटबन्दी ने व्यापारियों और रिटेलर की कमर तोड़ ही दी थी, एमजीआर ये प्रस्ताव मिडल क्लास के लिए घातक साबित होगा। इससे इन व्यापारियों के साथ काम करने वाले लोगों की बेरोजगारी भी होगी।"

विनिवेश के मुद्दे पर उन्होंने कहा, "जब भी भाजपा सत्ता में आती है, तो वह प्रमुख विनिवेश अभियान चलाती है। पिछली बार जब एनडीए सरकार सत्ता में थी, तो उन्होंने इस प्रक्रिया को चलाने के लिए एक विनिवेश मंत्रालय का भी गठन किया था। इस प्रक्रिया को फिर से शुरू कर दिया गया है और अब सरकारी कंपनियां और उनकी प्रॉपर्टी को सरकार अपने बड़े कॉरपोरेट मित्रों को मामूली दामों पर बेच देगी। "

उन्होंने कहा, "यह एक ऐसी सरकार है जो बुजुर्गों का सम्मान नहीं करती है क्योंकि उन्होंने छोटी बचत पर ब्याज दरों में वृद्धि करने का कोई इरादा नहीं दिखाया है। भारत में कई वरिष्ठ नागरिक रिटायरमेंट के बाद अपना गुजारा छोटी बचत के आधार पर करते है। बचत भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और मंदी के दौरान एक बफर के रूप में कार्य करता हैं। आज हम मंदी के कई संकेत देख सकते हैं और जब अगर मंदी आती है तो केवल बचत ही हमारे अर्थव्यवस्था को बचा सकती है।

बजट पर, सांसद सुशील गुप्ता ने कहा, "बहुत सारी उम्मीदें थीं कि बजट पेश करने के लिए भारत की पहली महिला होने के नाते, महिलाओं के हितों का ध्यान रखा जाएगा, लेकिन बजट में महिलाओं के लिए कोई प्रावधान नहीं था। इस बजट में म मध्यम वर्ग के लिए कुछ था न किसानों के किए। "

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