राष्ट्रीय (15/09/2019) 
देश की आर्थिक व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है लेकिन मोदी सरकार उसे दुरूस्त करने की बजाएं
भिवानी, 15 सितम्बर। देश की आर्थिक व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है लेकिन मोदी सरकार उसे दुरूस्त करने की बजाएं केवल जुमलेबाजी, खोखले दावे और बड़बोलेपन से जनता को गुमराह करने में लगी हुई है। ये बात आज हरियाणा कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता अशोक बुवानीवाला ने देश की गिरती अर्थव्यवस्था पर मोदी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करते हुए कही। बुवानीवाला ने कहा कि देश आर्थिक व्यवस्था गहरे संकट में है। जीडीपी टूट कर 5 प्रतिशत पर चली गई, रूपया गिरता जा रहा है, कृषि, ऑटो, टैक्सटाईल, लगभग हर क्षेत्र मंदी की मार से बुरी तरह ग्रस्त है। लाखों लोग बेरोजगार हो गए है लेकिन क्रम अभी रूका नहीं है क्योंकि देश में जो हालात बने हुए उनसे साफ संकेत है कि अभी लाखों ओर लोगों का रोजगार जाना निश्चित है। इन सबके बावजूद सरकार मानने को तैयार नहीं है कि अर्थव्यस्था बुरे दौर में है जो देश की जनता को अंधेरे में रखने जैसा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि केन्द्र सरकार नोटबंदी और खुद के प्रचार में देश का खजाना खाली कर चुकी है। कृषि और उद्योग जगत कुछ कर पाते तो बिना सोच-समझ के लागू की गई जीएसटी जैसे तुगलकी फरमान ने देश की आर्थिक रीढ़ की कमर तोड़ डाली। सरकार के पास न निवेश का पैसा है न पब्लिक इंवेस्टमेंट का। देश के राजस्व में बहुत बड़ी कमी है। पिछले साल 1 लाख 70 हजार करोड़ टैक्स कलेक्षन कम हुआ था और सरकार ने उसके लिए खर्चा बंद कर दिया। केन्द्र सरकार का इस वर्ष 24.6 लाख करोड़ का रिवेन्यू कलेक्शन है लेकिन चालु वित्त वर्ष के चार महीने गुजर चुके हैं, उसमें केवल 5.4 लाख करोड़ आया है। जो लक्ष्य है वो 18.5 प्रतिशत का है और पूर्ति 6.6 प्रतिशत की हुई है। अब सरकार के पास पैसा तो है नहीं लेकिन वित्त मंत्री जी ने बीते दिवस कुछ घोषणाएं की है ऐसी स्थिती में केन्द्र के पास पैसा नहीं है तो घोषणा करने से क्या लाभ। बुवानीवाला ने कहा कि वित्त मंत्री ने कहा है कि इनफ्लेशन काबू में है परन्तु जो अर्थव्यवस्था में थोड़ा सा भी ज्ञान रखते हैं उन्हें मालूम है कि ऐसी स्थिती में जब आपका अर्थतंत्र कमजोर हो, उसको पूर्नजीवित करने के लिए इनफ्लेशन को नहीं बल्कि निवेदश को देखा जाता है, खर्चे को देखा जाता है, बाजार के अंदर मांग बढ़ाई जाती है, कंजम्पशन बढ़ाई जाती है लेकिन अर्थव्यवस्था की इन बुनियादी चीजों पर केन्द्र सरकार का जरा भी ध्यान नहीं है। अगर स्थिती ऐसे ही चलती रही तो आने वालो दिनों में देश के सामने आर्थिक संकट का ओर अधिक भयावह मंजर होगा। बुवानीवाला ने कहा कि केन्द्र सरकार को अपनी नाकामी देश को बतानी चाहिए और अपने अहंकार व दिशाहिन नीतियों का त्याग कर विपक्ष का साथ लेकर इस आर्थिक संकट से लडऩा चाहिए। 
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