राष्ट्रीय (07/11/2019) 
मुख्यमंत्री दिल्ली का प्रदूषण रोकने में पूरी तरह से फेल हो चुके हैं, उन्हें सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है-मनोज तिवारी

नई दिल्ली, 7 नवम्बर। भारतीय जनता पार्टी दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष  मनोज तिवारी ने दिल्ली में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण पर काबू पाने में नाकाम केजरीवाल सरकार को आड़े हाथों लेते हुये कहा कि वह दिल्ली की जहरीली हवा को साफ करने में असफल रही है और माननीय सर्वोच्च न्यायलय ने जो टिप्पणी की है, उस पर अमल नहीं किये जाने पर दिल्ली की केजरीवाल सरकार को शर्म आनी चाहिए। न्यापालिका के हस्तक्षेप करने का मतलब स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री दिल्ली का शासन चलाने में पूरी तरह से फेल हो चुके हैं और जो सरकार फेल है उसे सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। इसी प्रकार का सवाल न्यापालिका ने किया है कि प्रदूषण पर बेपरवाह सरकार सत्ता में क्यों बनी हुई है ? प्रदूषण इस स्तर पर पहुंच चुका है कि खुली हवा में सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है। दिल्ली में धूल, सड़कों के गड्ढों और निर्माण कार्य से होने वाले प्रदूषण को रोक पाने में असमर्थ मुख्यमंत्री अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए पड़ोसी राज्यों पर पराली जलाने का आरोप-प्रत्यारोप कर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।  तिवारी ने कहा कि केजरीवाल सरकार को कोर्ट की फटकार सुनने के बाद ही काम करने की आदत है। इससे पहले कोर्ट के हस्ताक्षेप के बाद ही उन्होंने मेट्रो के निर्माण में दिया जाने वाला अपना हिस्सा जारी किया था।

 

  तिवारी ने कहा कि दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को लगी फटकार इस बात का द्योतक है कि सरकार प्रदूषण को लेकर गम्भीर नहीं है, लेकिन करोड़ों लोगों की जानों को केजरीवाल सरकार की अकर्मण्यता की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता है। प्रदूषण की वजह से उड़ानों को डाइवर्ट करना पड़ रहा है, अस्पतालों में मरीजों का बोझ बढ़ता ही जा रहा है। 57 महीने के अपने कार्यकाल में केजरीवाल सरकार ने बढ़ते प्रदूषण को लेकर कभी भी आपात बैठक नहीं बुलाई है। हम मुख्यमंत्री से पूछना चाहते हैं कि वो किसके भरोसे दिल्ली की जनता को छोड़ दिया है, जनता ने आम आदमी पार्टी को अपार जनादेश देकर सत्ता के शीर्ष पर इसलिए बैठाया था कि उनकी समस्याओं का समाधान हो, लेकिन समाधान तो दूर उन्हीं के पैसों का दुरूपयोग कर मुख्यमंत्री ने अपना राजनीतिक चेहरा चमकाने का पूरा प्रयास किया है। पर्यावरण सेस का 1500 करोड़ रूपये प्रदूषण से निपटान के लिए क्यों नहीं खर्च किया गया। यदि समय रहते उपाय किये गये होते तो आज विनाशकारी स्थिति उत्पन्न नहीं होती, लेकिन सत्ता के मद में चूर मुख्यमंत्री ने जनता के हितों को दरकिनार कर राजनीतिक हित को सदैव प्राथमिकता दी है।

 

  तिवारी ने कहा कि दिल्ली सरकार का ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) पूरी तरह फेल हुआ और सड़कों पर कहीं भी इस व्यवस्था का पालन नहीं देखा गया। स्थानीय कारणों से बढ़ रहे प्रदूषण को पराली का नाम देकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। जनता की सांसों से राजनीति करते मुख्यमंत्री को शर्म आनी चाहिए जो काम करने की बजाय लोगों को मास्क बांटकर कहते है कि घर से बाहर न निकलें। जनता अबकी बार घर से बाहर जरूर निकलेगी और विधानसभा चुनावों में सत्ता परिवर्तन करके दिल्ली में कमल खिलायेगी। 

 

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