राष्ट्रीय (23/11/2019) 
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से श्रीमद् भागवत कथा

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से श्रीमद् भागवत कथा का साप्ताहिक ज्ञानयज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इस कथा में आप प्रभु के विभिन्न स्वरूपों, लीलाओं को अध्यात्म, विज्ञान, संगीत के माध्यम से रसपान करेगें। इसी उपलक्ष्य में मयूर विहार फेस-में भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया। कहते हैं कि कलश के अग्रभाग में देवताओं का निवास होता है। दूसरा यह हमारे मानव मस्तिष्क का भी प्रतीक है। जिस में अमृत का कुंड़ स्वीकार किया गया है। जिस देह में श्रीहरि का निवास हो वह साधरण कैसे हो सकती है? इसीलिए हमारे ट्टषियों ने प्रार्थना की- हमें असत्य से सत्य की ओर, अंध्कार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरता की ओर प्रभु ले चलो। कलश यात्रा हमें निमंत्राण देती है कि आओ अपने मानव तन में ही परमात्मा का दीदार प्राप्त करो। यही हमारे जीवन का ध्येय, लक्ष्य है। इस यात्रा में गोहत्या को रोकने हेतु तथा गाय की महिमा को बताने के लिए भव्य झांकी का भी आयोजन किया। जो हमें गाय के पंचगव्य की महिमा समझाने का प्रयास था। गाय को हमारी संस्कृति का मेरूदंड कहकर संबोध्ति किया गया है। भारतीय देसी गाय के घी से यदि यज्ञ करें तो आस-पास में जितने रोगाणु होगें वे सभी नष्ट हो जाते हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिये लोगों को जागरुक करती भव्य झांकी का भी आयोजन किया। जिस में जल की एक-एक बूंद कीमती है तथा ध्रती के संसाध्नों का दोहन ना करें, ऐसे भावोें को दर्शाया गया। यज्ञ का वैदिक युग में क्या महत्व था, इस को दर्शाती एक बड़ी मनोहर झांकी प्रस्तुत की गई। कलश यात्रा में सुहागिनों ने कलश उठाए और प्रभु के आशीर्वाद को प्राप्त किया। सारा नगर इस यात्रा की भव्यता में लीन हो मानो श्रीकृष्णमय हो गया।

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