(29/11/2020) 
अरविन्द सरकार कोविड-19 मामलां के वास्तविक आंकड़ों को कम दिखाने में छल कपट का सहारा ले रही है।- अल्का लाम्बा
नई दिल्ली, 29 नवम्बर, 2020 -  दिल्ली कांग्रेस द्वारा अरविन्द सरकार की विफलताओं को उजागर करने की श्रंखला में आज पूर्व विधायक श्रीमती अल्का लाम्बा ने संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि अरविन्द सरकार कोविड-19 मामलां के वास्तविक आंकड़ों को कम दिखाने छल कपट का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा कि प्रति मिलीयन की संख्या पर 10,000 टेस्ट प्रतिदिन की जरुरत है, जबकि नवम्बर महीने में प्रतिदिन 2700 टेस्ट किए जा रहे है और पिछले 2 महीने से की जाने वाली टेस्टिंग संख्या एक समान ही है, वर्तमान कोविड आपातकाल में 83 प्रतिशत टेस्टिंग कम की जा रही है।

प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए अल्का लाम्बा ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौ0 अनिल कुमार ने 11 मई को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द को चिट्ठी लिखकर 1 लाख टेस्ट प्रतिदिन की मांग थी और सर्वदलीय बैठक में नई परिस्थितियों के आपातकाल को देखते 2 लाख टेस्ट प्रतिदिन की मांग की। जिसको 15 नवम्बर, 2020 केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री केजरीवाल ने भी स्वीकार किया कि प्रतिदिन टेस्टों की संख्या बढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोविड संक्रमण पर नियंत्रण पाने में दिल्ली सरकार पूरी तरह नाकाम असफल साबित हुई है। उन्हांने कहा कि सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस पार्टी ने निशुल्क टेस्टिंग की मांग की थी, अगर दिल्ली सरकार उसे लागू करे तो लक्षण और गैर लक्षण वाले सभी मरीज कोविड टेस्ट करा सकते है।

अल्का लाम्बा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी शुरु से ही आरटी-पीसीआर टेस्टों की मांग करती आ रही है, जबकि 1 से 24 नवम्बर के बीच कुल टेस्टों में 67 प्रतिशत टेस्ट रेपिड एंटीजेन टेस्ट किए गए और इसी दौरान 4.11 लाख आरटी-पीसीआर टेस्ट में 28.6 प्रतिशत पोजिटिव संक्रमित पाए गए। उन्होंने कहा कि आरटी-पीसीआर टेस्ट अधिक किए जाने चाहिए, जबकि रेपिड एंटीजेन टेस्ट अधिक करने पर भी ज्यादा मामले पकड़ में नही आते। उन्होंने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी सितम्बर माह में दिल्ली सरकार की नाकामियों को उजागर करते हुए कहा कि आरटी-पीसीआर टेस्टों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होने कहा कि 14 नवम्बर से 2 नवम्बर तक आंकड़ों के अनुसार आरटी-पीसीआर टेस्ट प्रतिदिन लगभग 40 प्रतिशत तक ही किए गए जबकि रेपिड एंटीजेन टेस्ट 60 प्रतिशत से भी अधिक किए गए।  उन्होंने कहा कि दिल्ली में हो रहे आरटी-पीसीआर टेस्ट के परिणाम देर से आने के कारण संक्रमण अधिक फेल रहा है।

उन्होंने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री अरविन्द दोनो ने टेस्टिंग बढाने पर झूठ बोला जबकि दोनो की घोषणाओं के बावजूद भी जरुरत के हिसाब से टेस्ट नही किए जा रहे है और एक सप्ताह के बाद तक भी 10 प्रतिशत टेस्टों की संख्या नही बढ़ी। टेस्टों की संख्या दुगना-तिगुना करने की घोषणा  केवल जुमला साबित हुई।

अल्का लाम्बा ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा घर-घर जाकर सर्वे करने का काम बुधवार तक पूरा किया जाना था जिसे व्यवस्थाओं और सरकार की नाकामियों के कारण अब आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि बुधवार तक प्राप्त आंकड़े अनुसार 14प्रतिशत मरीज जो कोविड लक्षण वाले पाए गए उन्होंने टेस्ट ही नही कराया। उन्होंने कहा कि बुधवार तक प्राप्त आंकड़े अनुसार 57 लाख लोग के सर्वे में 13516 मरीज लक्षण वाले मिले, जिनमें से केवल 11790 ने ही कोरोना टेस्ट करवाया। उन्होंने कहा कि सर्वे कर रहे शिक्षकों के कोविड संक्रमित होने की शिकायतें सामने आ रही है और 50 निगम शिक्षकों टेस्ट हुए जिनमें 17 शिक्षक पाजिटिव पाए गए। उन्होंने सर्वे की प्रक्रिया में खानापूर्ति का आरोप भी लगाया।
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