06/12/2014  हॉलमार्क पब्लिक स्कूल के बच्चों ने चर्चित नृत्यांगना सुचित्रा मित्रा से सीखीं भरटनाट्यम की बारीकियां
पंचकूला,  जानीमानी, समर्पित नृत्यांगना, गुरू और नृत्य निर्देशिका सुचित्रा मित्रा बीते 30 वर्षों से बतौर प्रेक्टिशनर और डांस एजूकेशनिस्ट पारंपरिक नृत्य शैलियों की शिक्षा देती आई हैं। उन्होंने भारत और विदेशों में अपनी शास्त्रीय नृत्यकला का प्रदर्शन किया है। स्थानीय हॉलमार्क पब्लिक स्कूल, पंचकूला के बच्चों को भी उनके अनुभवों से तब लाभान्वित होने का मौका मिला, जब उन्होंने उन्हें भारत की सबसे पारंपरिक एवं चर्चित शास्त्रीय नृत्यकला भरतनाट्यम के गुर बच्चों को सिखाए। ज्यादातर बच्चों को इस नृत्य की बेजोड़ विधा पहली बार इतनी नजदीक से देखने का मौका मिला।

इस मौके पर एक विद्यार्थी युवराज सिंगला ने बताया, मुझे अब तक यही लगता रहा कि भरतनाट्यम जैसी शास्त्रीय नृत्य कला लड़कों के लिए नहीं होती पर हमें यहां आकर पता चला कि इस नृत्य का प्रादुर्भाव नृत्य भगवान नटराज से हुआ है जो खुद एक पुरुष थे। इस कार्यशाला में हमने सीखा कि कैसे इस पारंपरिक शास्त्रीय नृत्य कला का अ यास करके हम इसमें पारंगत बन सकते हैं और इससे हम ज्यादा से ज्यादा समय तक अपने शरीर को एक ही मुद्रा में रख पाने की कला में भी प्रवीण होना सीख सकते हैं। एक अन्य छात्रा रश्मि ने बताया,'हमने इसमें न सिर्फ इस नृत्यकला की बारीकियां और खूबसूरत मुद्राएं यहां सीखीं बल्कि हमें अपनी युग-युगांतरों से चली आई गुरू-शिष्य परंपरा को भी समझने का मौका मिला। इसमें हमें अपने गुणीजन गुरुओं और गुरू-शिष्य के बीच स्नेहिल संबंधों के बारे में भी पता चला।

इस मौके पर हॉलमार्क पब्लिक स्कूल की प्राचार्य सुश्री कविता वाधवा ने बताया, आधुनिक युग के बच्चे अपनी परंपराओं और भारतीय संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। अब यहां पाश्चात्य नृत्य कलाओं का बोलबाला है, जिसमें भारतनाट्यम और कत्थकली जैसी बेहद खूबसूरत नृत्य शैलियों एवं कलाओं को भुला दिया गया। हम चाहते हैं कि बच्चों को भरतनाट्यम को गहराई से जानने-परखने का मौका दिया जाए, इसीलिए हमने सुचित्रा मित्रा, जो खुद एक प्रखयात नृत्यांगना और भरतनाट्यम में एक प्रतिष्ठित नाम हैं, को बच्चों के लिए आयोजित नृत्य कार्यशाला में आने का निमंत्रण भेजा, जो उन्होंने बड़ी शालीनता से स्वीकार किया और यहां आईं। उन्होंने बच्चों के साथ न सिर्फ भरतनाट्यम की बरीकियों बल्कि इससे संबंधित मेक-अप आदि के बारे में भी जानकारियां बच्चों के साथ साझा कीं। बच्चों ने इसमें भाव-भंगिमाओं के माध्यम से बिना बोले अपनी मनोदशा को दर्शकों के सामने रखने की कला भी सीखी।

सुचित्रा चेन्नई स्थित कलाक्षेत्र की चर्चित शिष्या हैं, जहां उन्होंने रुक्मणि देवी अरुंदले जैसे गुरू के सान्निध्य में रहकर नृत्यकला का प्रशिक्षण लिया। इसमें कोई संदेह नहीं कि स्कूल में लगाई नृत्य कार्यशाला के माध्यम से बच्चों ने बहुत कुछ सीखा। सुचित्रा ने बच्चों को बड़ी कुशलता से नृत्य के बारे में शिक्षित किया। बच्चों को नृत्यकला से जुड़ी पदचालें सीखने का मौका मिला। इस मौके पर बांसुरी वादन के माध्यम से जीवन और नृत्य शैली के बारे में बताया गया। सुचित्रा ने बताया, 'यहां के बच्चे सीखने में बड़े प्रवीण हैं और हर बरीकी को अच्छे से समझने का प्रयास करते हैं। भरतनाट्यम में आपको अपने पूरे शरीर को हिलाने-डुलाने का मौका मिलता है। इस नृत्य का अभयास करने वाले का दिमाग भी बड़ा कुशाग्र रहता है, शरीर में लोच आती है और इसे सीख लेने वाले व्यक्ति में कोई दोष बाकी नहीं रह जाता। इसके इन्हीं विलक्षण गुणों के कारण शास्त्रीय नृत्य कला को स्कूलों में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

सुचित्रा ने पद्म भूषण पद्म सुब्रमण्यम और पद्म भूषण कलानिधि नारायण से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है। हॉलमार्क स्कूल के डायरेक्टर जिवतेश गर्ग ने कहा, 'मुझे यह घोषणा करते हुए अपार हर्ष हो रहा है कि सुचित्रा मित्रा सरीखी बेजोड़ नृत्यांगना ने आज यहां हमारे बच्चों के साथ कार्यशाला लगाई और यह चंडीगढ़ सेक्टर-42 स्थित गवर्नमेंट गल्र्स कॉलेज के सभागार में हमारे आगामी वार्षिक दिवस समारोह की तैयारियों में भी मददगार साबित होगी। भरतनाट्यम कार्यशाला बच्चों के लिए बड़ी मददगार साबित हुई क्योंकि उन्होंने देश की प्रतिष्ठित नृत्यांगना सुचित्रा मित्रा के साथ रहकर इसके उपयोगी गुर नजदीकी से देखे और सीखे।

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