(09/06/2021) 
केजरीवाल सरकार ने होम आइसोलेशन के नाम पर जनता की जान के साथ किया खिलवाड़
नई दिल्ली, 9 जून। कोरोना महामारी ने देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का बहुत नुकसान किया है। दिल्ली भी उससे अछूती नहीं रही। दिल्ली में जन-धन की हानि इतनी हुई जिसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि पूरे देश में प्रति 10 लाख मृत्यु दर दिल्ली में सबसे अधिक रहा।

इसके कई कारण हैं लेकिन प्रमुख कारणों में केजरीवाल सरकार की लापरवाही, अनियमितता और दिल्ली में स्वास्थ्य व्यवस्था का लचर होना है। केजरीवाल सरकार ने अपने कर्तव्यों से भागते हुए बिना जांच के ही लोगों को होम आइसोलेट कर दिया और कोरोना को फैलने की दावत दी। होम आइसोलेट होने वाले मरीजों के लिए केजरीवाल ने वादा किया था कि कोविड किट मिलेगी, दवाइयां मिलेगी और अगर हॉस्पिटल जाने की जरूरत पड़ी तो उन्हें वैन की भी व्यवस्था की जाएगी, लेकिन वास्तविकता सभी ने देखी कि महामारी के संकट के समय दिल्ली सरकार गायब थी और हेल्प लाइन नम्बर बंद पड़े थे। यही नहीं ऑक्सीजन, दवाइयां, ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर्स इत्यादि को दूसरे राज्यों में देकर दिल्ली को वंचित रखा गया। मोहल्ला क्लिनिक का कोई इस्तेमाल न करना सरकार की लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण हैं। केजरीवाल सरकार द्वारा होम आइसोलेशन सेंटर के नाम पर दिल्ली की जनता की जान के साथ किए गए खिलवाड़ का काला चिट्ठा खोलने के लिए प्रदेश कार्यालय में दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता, नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी और सांसद रमेश बिधूड़ी ने संयुक्त प्रेसवार्ता को संबोधित किया। इस अवसर पर प्रदेश प्रवक्ता सुश्री पूजा सूरी उपस्थित थी।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री आदेश गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में जिस तरह से दिन-प्रतिदिन स्थिति बिगड़ती चली गई उस के सबसे बड़े जिम्मेदार अरविंद केजरीवाल और उनकी लचर स्वास्थय व्यवस्था है। दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को वल्र्ड क्लास बताते हुए खूब प्रचार किया गया, लेकिन जब कोरोना चरम पर था तब न ही बेड की व्ययस्था थी और न ही किसी अन्य मूलभूत समानों की। केजरीवाल सरकार ने अपनी नाकामी को छिपाने के लिए गलत परामर्श दिया जिससे लोग घर में आइसोलेट तो हो गए, लेकिन अपने परिवार के अन्य सदस्यों और आसपास के लोगों के बीच उनसे संक्रमण फैलता गया और फिर धीरे-धीरे इसका असर पूरे प्रदेश में देखने को मिला। समय रहते केजरीवाल सरकार को बड़े-बड़े बैंकेटहॉल, स्कूल इत्यादि में होम आइसोलेशन की व्यवस्था करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया। दिल्ली के लगभग 70 प्रतिशत मकान ऐसे हैं जो 100 गज से कम हैं उनमें लोग रहते हैं और जिनमें कॉमन बाथरूम है। उनमें आइसोलेट होना मतलब कोरोना को खुद दावत देना है। अगर केजरीवाल सरकार उन लोगों को शुरुआती लक्षण के होने के समय ही अस्पतालों में भर्ती करा दिया जाता तो शायद दिल्ली को सबसे अधिक मौतें की मार से बचाया जा सकता था। केजरीवाल सरकार ने अपनी लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को छुपाने के लिए लोगों को होम आइसोलेट में रोककर संक्रमण को बढ़ाने का जो अपराध किया इसका जवाब तो केजरीवाल  को जनता को देना ही पड़ेगा। 

आदेश गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की स्थिति सबसे अधिक खराब होने के बावजूद जनता अपने मुख्यमंत्री को महामारी के वक्त खोजती रही, सरकारी सुविधाओं को ढूंढते रहे और दिल्ली के मुखिया दूसरे राज्यों में व्यस्त  रहे। दिल्ली के लगभग 70 प्रतिशत मकान ऐसे हैं जो 100 गज से कम हैं उनमें लोग रहते हैं और जिनमें कॉमन बाथरूम है। उनमें आइसोलेट होना मतलब कोरोना को खुद दावत देना है। अगर केजरीवाल सरकार उन लोगों को शुरुआती लक्षण के होने के समय ही अस्पतालों में भर्ती करा दिया जाता तो शायद आज पूरे देश में प्रति 10 लाख सबसे अधिक मौतें जो दिल्ली में हुई है, उसे बचाया जा सकता था। इसलिए केजरीवाल सरकार से मेरा सवाल है कि अपने लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को छुपाने के लिए लोगों को होम आइसोलेट में रोककर संक्रमण को बढ़ावा देने का जो अपराध किया गया है और जिससे 10 लाख की आबादी पर मृत्यु दर विश्व में 455 और भारत में 234 है। वहीं 30 मई 2021 तक के आंकड़ों को देखें, तो दिल्ली में मृत्यु दर 1207 है, जो देश और दुनिया से कहीं अधिक है। इसका जवाब केजरीवाल दिल्ली की जनता को बताए।

नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली में जब कोरोना की पहली लहर आई तब अस्थाई कोविड केयर सेंटर बनाये गए, उसके बाद उनको तोड़ दिया गया, क्योंकि सरकार के अंदर कोई दूरदर्शिता नहीं थी और फिर दूसरी लहर आई तो उसे एक बार फिर से तैयार करने का दिखावा किया गया। इस तरह दिल्लीवासियों के पैसे को बर्बाद किया गया, क्योंकि उन कोविड केयर सेंटर में न तो डॉक्टर थे और न ही जरूरी उपकरण। उन्होंने कहा कि होम आइसोलेशन सेंटर बनाने में भारी घोटाला किया गया। ऑक्सीमीटर और अन्य जरूरी चिकित्सकीय उपकरण के खरीद में खूब काला बाजारी हुई। इसलिए इसका ऑडिट होना चहिए। माइक्रो कंटेनमेंट जोन की संख्या केजरीवाल सरकार द्वारा अभी तक 57550 बताई गई है यानी दिल्ली के हर वार्ड में लगभग 200 कंटेनमेंट जोन बने जो कि सिर्फ कागजों पर ही है। इस पर भारी भ्रष्टाचार हुआ। इसी के साथ सिविल डिफेंस लोगों की भर्ती की गई। जिनकी संख्या कंटेंटमेंट जॉन की तरह कागजों में ही थे जबकि उनके नाम पर पैसों की खूब लूट हुई है। वास्तविकता यह है कि पिछली बार माइक्रो कंटेनमेंट जोन में पूरे एरिया को सील किया जाता था, बाहर पुलिस का पहरा लगता था। इस बार जो कंटेनमेंट जोन बनाये हैं वो सिर्फ कागजो में है, इसलिए हमारी मांग है कि इसकी जांच होनी चाहिए। बिधूड़ी ने कहा कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर में मोहल्ला क्लीनिक की पोल खुल चुकी है। सरकार ने जिस तरह से टेस्टिंग और वैक्सीनेशन के लिए अलग से केंद्र खोले वह इन मोहल्ला क्लीनिक में भी हो सकते थे और अतिरिक्त स्टाफ की जरूरत भी नहीं पड़ती क्योंकि प्रत्येक मोहल्ला क्लीनिक में पहले से ही कर्मी थे। केजरीवाल सरकार ने थर्ड क्लास मोहल्ला क्लीनिक का इस्तेमाल होम आइसोलेशन सेंटर के लिए क्यों नहीं किया, इसका जवाब दिल्ली की जनता जानना चाहती है। 

भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी ने कहा कि दिल्ली के अंदर आइसोलेशन के नाम पर जिस तरह से लोगों के साथ खिलवाड़ किया गया, वह जगजाहिर है। 10 अक्टूबर 2020 को नीति आयोग ने केजरीवाल सरकार को अपनी एक रिपोर्ट सौंपी जिसमें यह साफ कहा गया कि अरविंद केजरीवाल द्वारा होम आइसोलेशन की व्यवस्था ज्यादा प्रभावित नहीं है इसकी जांच होनी चाहिए और इसके लिए कमेटी का गठन होनी चाहिए। दिल्ली में जितने लोगों ने दम तोड़ा है उनमें 44 प्रतिशत मरीज ऐसे थे जिन्हें होम आइसोलेशन में बेहतर इलाज ना मिलने की वजह से नाजुक स्थिति बन गई और अस्पतालों में जाते-जाते उन्होंने दम तोड़ दिया। 14,30,000 लोग दिल्ली के अंदर कोविड पॉजिटिव पाए गए थे। दिल्ली के अंदर केंद्र सरकार के, राज्य सरकार के और निजी अस्पतालों के कुल 54,300 बेड हैं अगर एक मरीज को 7 दिन तक अस्पतालों में रखा गया होगा तो एक महीने में सिर्फ 2 लाख लोगों को अस्पताल की सुविधा मिल पाई थी यानी 14 लाख लोगों में से 12 लाख लोग होम आइसोलेशन में रहे तो क्या उन्हें ऑक्सीमिटर की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी? और अगर ऑक्सीमिटर नहीं दिया गया तो वो सारे ऑक्सीमिटर कहाँ गए? इससे एक बहुत बड़े घोटाले की बू आ रही है। सरकार कागजों में 19893804 टेस्टिंग की संख्या तो दिखा रही हैं लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार कोरोना से हुई मौत के आंकड़े को भी छुपाने का काम कर रही है। केजरीवाल सरकार की तरफ से कहा गया कि दिल्ली में अप्रैल-मई 2021 में कुल 13201 लोगों ने दम तोड़ा है जबकि नगर निगम के अनुसार यह संख्या 34750 है और इनकी संख्या और भी अधिक हो सकती है क्योंकि कुछ लोगों ने सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई भी नहीं किया है। मतलब पूरे 21549 का जो घालमेल है इनमें ज्यादातर मौतें कोरोना से हुई है, लेकिन टेस्ट रिपोर्ट न कराने के कारण उन्हें कोई अस्पतालों से डेथ सर्टिफिकेट नहीं मिला। ऐसे में उन्हें मुआवजा कैसे दिया जाएगा। केजरीवाल सरकार आखिर इनकी संख्या छुपाकर क्या साबित करना चाहती है? दिल्ली सरकार होम आइसोलेशन के दौरान मरीजों की मौत की संख्या निकाले। दिल्ली सरकार से मेरा सीधा सवाल है कि इन 21549 लोगों की मौत के जिम्मेदार कौन है और इनमें से कोरोना से हुई मौत के बाद मृतकों के परिजनों को मुआवजा कब तक दोगे?

दिल्ली भाजपा ने केजरीवाल सरकार से पूछे पांच सवाल 

1. केजरीवाल सरकार ने अपनी लचर स्वास्थ्य व्यवस्था की कमी को छुपाने के लिए लोगों को होम आइसोलेशन में रोककर संक्रमण को बढ़ाया और जिसके कारण मृत्यु दर प्रति दस लाख व्यक्ति दिल्ली में सबसे अधिक रही ऐसा क्यों?

2. अपने राजनैतिक लाभ के लिए दिल्ली के लिए खरीदे गए ऑक्सीमीटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, दवाइयां एवं पीपीई किट दूसरे राज्यों में इस्तेमाल कर दिल्ली की जनता को वंचित क्यों रखा?

3. टेंपरेरी आइसोलेशन सेंटर को बनाना फिर तोड़ना, उसको बनाने का खेल और साथ में होम आइसोलेशन के नाम पर माइक्रो कंटेनमेंट जोन में धांधली, सिविल डिफेंस की ड्यूटी में धांधली, ऑक्सीमीटर के नाम पर भारी घोटाला हुआ, आखिर क्यों?

4. थर्ड क्लास मोहल्ला क्लीनिक का इस्तेमाल होम आइसोलेशन के लिए क्यों नहीं किया गया?

5. बिना आरटी पीसीआर टेस्ट के होम आइसोलेट कर इलाज के दौरान हुई मौत का दोषी कौन? होम आइसोलेशन में कोरोना से हुई मौत में सभी मृतकों के परिजन को कब तक मुआवजा मिलेगा?
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