विशेष (20/01/2021) 
एमसीडी के पार्षदों को सड़क और नालियां बनाने के लिए फण्ड दिया जाता है, लेकिन इस फण्ड से सिर्फ कागजों में ही काम किया जाता है- सौरभ भारद्वाज

नई दिल्ली, 20 जनवरी, 2021, आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने प्रेसवार्ता करते हुए कहा कि भाजपा शासित दक्षिणी नगर निगम ने पार्षद निधि 50 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये करने की घोषणा की है। चुनावों से पहले एमसीडी को भाजपा पूरी तरह से लूटने की कोशिश कर रही है। भाजपा शासित एमसीडी कहती है कि कर्मचारियों को तनख्वाह देने के लिए पैसे नहीं हैं। ऐसे में फिर पार्षद निधि को 50 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ कैसे कर सकते हैं। एमसीडी के बारे में कहा जाता है कि पार्षदों को फंड, सड़क और नालियां बनाने के लिए दिया जाता है। लेकिन फंड से सिर्फ कागजों के ऊपर ही काम किया जाता है। एमसीडी की ऑडिट रिपोर्ट के अंदर ऐसे दर्जनों मामले सामने आए हैं। एमसीडी के ऑडिटर का कहना है कि सभी काम संदिग्ध तरीके से हुए हैं और कार्यों का भुगतान पूरा किया गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पार्षदों को लगता है कि आगामी चुनाव में पार्टी उन्हें टिकट नहीं देगी। इसलिए वे अपने कार्यकाल के आखरी साल में एमसीडी को पूरी तरह से लूटना चाहते हैं।

आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने पार्टी मुख्यालय में बुधवार को प्रेस वार्ता को संबोधित किया। भाजपा शासित एमसीडी में हुए घोटालों को उजागर करते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की कल हुई घोषणाओं में बहुत चौंकाने वाली बातें सामने आयी हैं। पूरी दिल्ली के अंदर एमसीडी के कर्मचारियों की हड़ताल चल रही है। एमसीडी के डॉक्टरों, नर्सों, अध्यापकों, सफाई कर्मचारियों सहित तमाम कर्मचारियों की तनख्वाह चार-पाच महीने से रुकी हुई है। हाइकोर्ट की तरफ से यह कहा गया कि एमसीडी के उच्च अधिकारी, पार्षदों को जो सुविधाएं मिल रही हैं उनको क्यों न खत्म कर दिया जाए। स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष, महापौर, उपमहापौर सहित अन्य को कार्यालय और गाड़ियां समेत तमाम सुविधाएं मिली हुई हैं।  इसके अलावा घर और दफ्तर में कर्मचारी रखे हुए हैं। हाइकोर्ट ने कहा है कि इनको सुविधाएं क्यों दी जाएं।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एमसीडी एक तरफ फंड न होने का रोना रोती है और कर्मचारियों को महीनों तक तनख्वाह नहीं देती है। दूसरी तरफ इन्होंने पार्षदों का फंड पहले 25 लाख से बढ़ाकर 50 लाख किया था। अब कल इन्होंने 50 लाख के फंड को बढ़ाकर एक करोड़ कर दिया है। यह कैसे संभव है कि एक तरफ आपके पास कर्मचारियों को तनख्वाह देने के पैसे नहीं हैं। दूसरी तरफ आपने पार्षदों का फंड 50 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ कर दिया।उन्होंने कहा कि इसके पीछे का बड़ा कारण क्या है, मैं आपको समझाना चाहता हूं। यह साउथ दिल्ली नगर निगम की ऑडिट रिपोर्ट है। दिल्ली सरकार की ऑडिट रिपोर्ट नहीं, इनके विभाग की ही ऑडिट रिपोर्ट है। एमसीडी के बारे में अक्सर कहा जाता है कि पार्षदों को यह फंड सड़क, नालियां बनाने के लिए दिया जाता है लेकिन ज्यादातर जगहों पर फंड से सिर्फ कागजों के ऊपर ही काम किया जाता है। मतलब 25 लाख की अगर कोई सड़क बननी होगी तो उसका टेंडर निकलेगा। टेंडर 20 से 22 लाख रुपए में किसी ठेकेदार को दे दिया जाएगा। उसका वर्क आर्डर हो जाएगा और सड़क कागजों में तैयार होने के बाद भुगतान भी हो जाएगा। मगर जमीन पर वह सड़क नहीं बनेगी। यह पैसा पार्षद और अधिकारी मिलकर के आधा-आधा बांट लेंगे। जनता को पता ही नहीं चलेगा कि 25 लाख की सड़क कागजों में बनकर तैयार हो गई और गायब भी हो गई। 

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आपको लग रहा होगा कि यह बात मैं आपको मनगढ़ंत बता रहा हूं। हम सबूत भी आपके सामने पेश करेंगे। पार्षदों को 1 करोड़ रुपए का बजट मोटे तौर पर इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि पार्षदों के पास लूट का आखरी मौका है। इसका सबूत मैं आपके सामने पेश कर रहा हूं। एमसीडी का मुख्य काम सड़क-नालियां बनाना है। दिल्ली में कॉलोनी, गांव, बस्तियों के अंदर की सड़क होती हैं वह सब एमसीडी के द्वारा बनाई गई होती हैं। जबकि बाहर की मुख्य सड़कें दिल्ली सरकार की होती हैं। आप देखेंगे कि अंदरूनी सड़कों का बुरा हाल है। दिल्ली के अंदर सड़क जब बनती है तो उसका सीमेंट होता है, उसको आरएमसी बोलते हैं। वह फैक्ट्री से बड़ी गाड़ी के अंदर रेडी मिक्स बनकर आता है। रेडी मिक्स कंक्ररीट 3 घंटे के अंदर जम जाता है और पत्थर हो जाता है। ऐसे में 3 घंटे के अंदर रेडी मिक्स कंक्ररीट को इस्तेमाल करना होता है।

एमसीडी की ऑडिट रिपोर्ट के अंदर ऐसे दर्जनों मामले ऑडिटर ने बताए हैं। एमसीडी का ऑडिटर कह रहा है कि मुझे नहीं पता कि यह काम हुए या नहीं हुए हैं, लेकिन भुगतान पूरा हुआ है। मैं आपके सामने एक उदाहरण दे रहा हूं। एमसीडी का ऑडिटर रिपोर्ट में कहता है कि सुल्तानपुर गांव में सीआरसी इमारत से शनि मंदिर तक लेन और नाली सुधार के लिए ईंट और आरएमसी खरीदने का कार्य संदिग्ध है। वर्क आर्डर जारी होने से 1 माह पहले ही आरएमसी खरीद कर इस्तेमाल किया गया। ऐसे में 16.93 लाख की राशि के कार्य के वास्तव में होने पर संदेह पैदा होता है।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एमसीडी कहती है कि 1 महीने पहले रेडी मिक्स कंक्ररीट आया। वर्क ऑर्डर से 1 महीने पहले ही रेडी मिक्स कंक्ररीट खरीद ली गई। यह कैसे संभव है कि 3 घंटे के अंदर रेडी मिक्स कंक्ररीट जमकर पत्थर हो जाती है। यह काम 16.93 लाख का था तो यह रुपए किसकी जेब में गए। एसडीएमसी के उत्तम नगर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए सौरभ भारद्वाज ने बताया कि ऑडिटर रिपोर्ट में बताता है कि यहां पर वर्क आर्डर से 5 माह पहले आरएमसी खरीद ली गई। जिसका कार्य में इस्तेमाल किया गया। इससे शंका पैदा होती है कि काम हुआ या नहीं हुआ है। मुझे लगता है कि सृष्टि के निर्माता भगवान ब्रह्मा भी यह नहीं कर सकते कि वर्क आर्डर से 5 महीने पहले आरएमसी खरीद लें और पांच माह बाद इस्तेमाल में ले लें। ऐसे दर्जनों उदाहरण इनकी ऑडिट रिपोर्ट के अंदर हैं। सभी उदाहरण इंजीनियरिंग विभाग के हैं। इसी तरह से 55 लाख, 39 लाख, 25 लाख, 25.85 लाख, 16.93 लाख, 16 लाख, 13.21 लाख राशि के काम हुए हैं। 
एमसीडी के ऑडिटर ने पूरी जांच के बाद बताया कि अगर एमसीडी की सड़क बनायी जाती है तो उसमें दो तरीके की रोडी डलती है। एक तो मोटी रोडी डलती है जिसको बेस कहते हैं। सड़क के ऊपर एक पतली रोडी डलती है। जब इन कामों की जांच की गई तो अधिकतर कार्यों के अंदर ऑडिटर ने देखा कि जो परत नीचे लगनी है उसका बिल बाद की तिथि का है। सड़क पर जो परत सबसे बाद में डलती है उसका बिल पहले का है। यह संभव नहीं है कि सड़क की पहले ऊपर की परत बिछा दें और फिर नीचे की परत बनायी जाए। सड़क के अंदर यह कैसे हो सकता है। इंजीनियरिंग विभाग के इस तरीके के कार्यों का खुलासा ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। 

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हमारा मानना है कि पार्षदों को एक-एक करोड़ रुपए सिर्फ इसलिए दिए जा रहे हैं ताकि इस तरीके से इन पैसों की बंदरबांट की जाए जा सके। कर्मचारियों को तनख्वाह भले न मिले लेकिन पार्षदों को सारा का सारा पैसा दिया जाए। इसका बड़ा कारण भी भाजपा है। भाजपा के अंदर चल रहा है कि सभी पार्षदों की टिकट कटेगी, क्योंकि जनता इनसे परेशान है। जैसे पिछली बार भाजपा ने सारे पार्षदों के टिकट काटे थे उसी तरह इस बार भी सभी पार्षदों के टिकट काटे जाएंगे। इसलिए भाजपा के पार्षदों में अब होड़ लग गई है कि किस तरीके से ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाया जा सकता है। क्योंकि आखरी साल है और जितना पैसा कमा सकते हैं कमा रहे हैं। क्योंकि उसके बाद भाजपा इन पार्षदों को टिकट नहीं देगी।

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