मनोरंजन (17/04/2021) 
ओ अरविंद खत्म हो गए, कैसे तेरे तीर कमानों से,
ओ अरविंद खत्म हो गए, कैसे तेरे तीर कमानों से,
देख ये दिल्ली बीच खड़ी है, सचिवालय_शमशानों के,
जिसे तू अक्सर गले में पहने, नाक पे उसे लपेट जरा,
और घर की दहलीज लांघ के, पता कर टीके_बेड का रेट जरा,
देख निकल कर दफ्तर की, फाइलों और खयालों से,
भाषण भी गर देना है, दे जाकर अस्पतालों के गलियारों से, 
ओ अरविंद खत्म हो गए, कैसे तेरे तीर कमानों से,
देख ये दिल्ली बीच खड़ी है, सचिवालय_ शमशानों के।

अरविंद।
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