बिज़नेस (07/05/2021) 
पानी की कंपनी की शिकायत सूचना प्रसारण मंत्री और शिक्षा मंत्री से की।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से सम्बंध रखने वाले संगठन हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ के प्रांत अध्यक्ष, पवन कुमार, प्रान्त संगठन मंत्री पवन मिश्रा, प्रान्त उपाध्यक्ष डॉ मामराज पुंडीर ने पानी कम्पनी के मुख्य सीईओ, भारत के शिक्षामंत्री डॉ रमेश पोखरियाल, सूचना एवं प्रसार मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिख कर शिक्षक गरिमा के विरुद्ध जारी किए गए बोतल के वाणिजियक विज्ञापन को तुरंत प्रभाव से वापिस लेने और देश के शिक्षक समुदाय से माफी मांगने को कहा है। हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ के प्रांत उपाध्यक्ष डॉ मामराज पुंडीर ने बताया कि  के इस विज्ञापन में ऊंट, विद्यार्थी, शिक्षक और मनुष्य को सिद्ध करने का प्रयास किया गया है। यह अत्यंत दुखद और शर्मनाक है , उस राष्ट्र में जहां शिक्षकों का दर्जा समाज मे भगवान से ऊंचा है और यह हमारी संस्कृति है।और यह विज्ञापन उस देश मे बनाया गया है जहां गुरु को ब्रह्मा, विष्णु ,महेश का दर्जा दिया जाता है। जहां गुरु के सम्मान को ईश्वर के सम्मान से भी ऊंचा रखा गया है और जहां गुरु पूर्णिमा जैसे पर्व मनाए जाते है। ऐसे देश मे बिसलेरी ने इस तरह का विज्ञापन जारी कर ना सिर्फ शिक्षकों की गरिमा गिराने का आपराधिक कृत्य किया है बल्कि यहां के संस्कृति पर भी चोट पहुँचाई है। जिन शिक्षकों की वजय से आप यह विज्ञापन बनाने लायक हुए उन्ही का अपमान किया है।विज्ञापन में न सिर्फ शिक्षकों के प्रति आपति जनक भाषा बोली गई है।बल्कि उनके ज्ञान  पर भी सवाल खड़ा किया गया है। दरअसल, विज्ञापन में ऊँटो को विद्यार्थीयों के तौर पर दिखाया गया है जो अपने अध्यापक को हे! मास्टर  का सम्बोधन कर रहे है और " कांटेक्टलैस" शब्द के बारे में जानकारी नही होने का मजाक उड़ा रहे हैं।  विज्ञापन में मटके के पानी का भी मजाक उड़ाया गया है। इस विज्ञापन का टैग पंक्ति " समझ .... पीते हैं"  से इस देश की जनता का भी अपमान हुआ है साथ ही घर घर मे उपयोग में आने वाले मटके के प्रति कोविड का भय दिखाते हुए दुर्भावना पैदा करने की कोशिश लाखो कुंभकारों की रोजी रोटी को भी प्रभावित कर सकता है। डॉ पुंडीर ने कहा कि अगर पानी की कम्पनी ने बिना शर्त क्षमा याचना नही की और अपने विज्ञापन को प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से नही हटाया तो महासंघ पूरे देश में " बायकाट बिसलेरी" अभियान चलाएगा। इस आशय का निर्णय महासंघ के राष्ट्रीय ऑनलाइन बैठक में लिया गया है
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