विशेष (10/06/2021) 
सुनील घनवट ने पुरात्तव विभाग की कार्यशैली पर लगाया प्रशनचिन्ह।

प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से विशालगड रक्षा और अतिक्रमणविरोधी कृति समिति के प्रवक्ता सुनील घनवट ने पुरात्तव विभाग की कार्यशैली पर प्रशनचिन्ह? लगाया है। सुनील घनवट नें कहा कि पुरातत्व विभाग के सहायक संचालक विलास वहाणे ने विशालगड के अतिक्रमण के विषय में दुर्ग का दौरा कर 12 लोगों को नोटिस दिए हैं । विगत 17 वर्षों से कोई भी कृति न करनेवाले पुरातत्व विभाग द्वारा कम से कम अतिक्रमण की जांचकर नोटिस दिए गए यह एक समाधानजनक समाचार हैपरन्तु विशालगड पर वर्ष 1998 से बडी संख्या में अतिक्रमण किए गए हैं । दुर्ग पर 64 बडे और नए निर्माणकार्य तथा 45 से अधिक छोटे अतिक्रमण किए गए हैं । उन पर कार्यवाही होना अपेक्षित है । विगत अनेक वर्षों से पुरातत्व विभाग ने इसकी अनदेखी की है । इसी कारण आज दुर्ग अतिक्रमण के चंगुल में है । वहां के मंदिर-नरवीरों की समाधि उपेक्षित है । इसलिए पुरातत्व विभाग केवल नोटिस देकर पल्ला न झाडे अपितु नियोजनबद्ध कार्यक्रम चलाकर सभी अतिक्रमण हटाए।

     घनवट ने आगे कहा किसूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी के अनुसार 'इस दुर्ग पर बडी संख्या में अतिक्रमण और निर्माणकार्य किया गया हैऐसा पुरातत्व विभाग ने स्वीकार किया है । वर्ष 1998 से विशालगड पुरातत्व विभाग के पास है । भले ही दुर्ग की कुछ भूमि वनविभाग के पास हैतब भी दुर्ग पर होने वाले प्रत्येक अतिक्रमण के लिए पुरातत्व विभाग ही जिम्मेदार है । इस दुर्ग पर प्रमुखतरेहानबाबा के दरगाह के लिए बडी संख्या में अतिक्रमण हुए हैंउन्हें हटाने के लिए पुरातत्व विभाग क्या करनेवाला है यह भी विभाग को स्पष्ट करना आवश्यक है । भले ही इनमें से कुछ अतिक्रमण वनविभाग के अंतर्गत आते होतब भी इन दोनों विभागों को आपसी समन्वय से दुर्ग के सभी अतिक्रमण हटाने के लिए प्रयास करना आवश्यक है । इससे पूर्व भी विगत 17 वर्षों में पुरातत्व विभाग द्वारा अतिक्रमणकारियों को केवल नोटिस देने के अलावा अन्य कुछ भी नहीं किया है । इसलिए इस बार भी केवल नोटिस देने तक ही सीमित न रहकर सभी अतिक्रमण हटाने तक उसका ब्यौरा लेना आवश्यक है । साथ ही दुर्ग की ग्रामदेवता श्री वाघजाईदेवी के मंदिर सहित अन्य सभी मंदिरस्मारकसमाधियांदुर्ग और तटबंदी की देखभाल तथा जीर्णोद्धार किया जाएऐसी मांग इस अवसर पर हम कर रहे हैं ।

Copyright @ 2019.