विशेष (17/07/2021) 
हवन यज्ञ द्वारा श्रीमद् भागवत् कथा का समापन किया गया

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा दिव्य धाम आश्रम, दिल्ली में श्रीमद् भागवत् कथा का समापन हवन यज्ञ से किया गया जिसमें संस्थान के संस्थापक एवं संचालक गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा द्वारा ब्रह्मज्ञान से दीक्षित पंडित जी ने इस हवन यज्ञ का संचालन किया। इस दौरान कथा वाचिका व अन्य प्रचारकों ने हवन यज्ञ में विश्व शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए आहुति डाली। इसके उपरांत आश्रम में उपस्थित श्री आशुतोष महाराज जी के अन्य शिष्य एवं शिष्याओं ने यज्ञ में आहुति डालकर सुख, समृद्धि व शांति की मंगल कामना की। भारतीय संस्कृति में यज्ञ पद्धति का बहुत महत्व हैं। यज्ञ पद्धति पूर्णतः विज्ञा सम्पत है। यज्ञ एक सनातन वैदिक परम्परा हैं जिसमें वेद मंत्रो के उच्चारण के साथ-साथ बहुत सी शुभ सामग्री का होम किया जाता है। प्राचीन काल के ऋषि-मुनि शारीरिक, मानसिक एवं अध्यात्मिक लाभ के लिए यज्ञ किया करते थे। शारीरिक लाभ यानि व्यक्ति के शरीर को लगने वाले भयंकर रोग शुद्ध वायु के सेवन से दूर हो जाते थे। उन्होंने कहा कि मानसिक लाभ यह मिलता था कि वेद मन्त्रों के सुरस्वर ज्ञान से विचारों की शुद्धि होती है। एक ब्रह्मनिष्ठ संत की कृपा से हमारे ही अन्तःकरण में ईश्वर के प्रकाश को प्रतिपादित करते है, हवन यज्ञ हमें यही सन्देश देते है। कथा के यजमानों ने इस भव्य कार्यक्रम में वर्चुली सम्म्मलित होकर श्रीमद् भागवत् कथा का पूर्ण लाभ प्राप्त किया, और श्री आशुतोष महाराज जी का कोटि-कोटि धन्यवाद भी किया, जिनकी कृपा से उन्हें प्रभु की अनंत लीलाओं एवं उनके दरबार में सेवा करने का सुअवसर प्राप्त हुआ।  

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