खेल (28/10/2021) 
डीडीसीए के चुनावों रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को पुलिस और गार्डो ने रोका।
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर। मीडिया को देश का चौथा स्तंभ कहा जाता है। लेकिन डीडीसीए के चुनावों में इसी चौथे स्तंभ को अरुण जेटली स्टेडियम के अंदर चुनावों की जानकारी लेने नहीं जाने दिया जाता। बल्कि उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। जबकि यहीं चौथा स्तंभ जब देश के सबसे बड़े लोकतंत्र के चुनाव होत है, तो आम जनता को विधिवत सभी जरूरी सूचनाएं मुहैया करवाता है।

मगर एक छोटे से क्रिकेट एसोसिएशन के चुनावों के निर्णय आने वाले दिन मीडिया के लोगों को अंदर तक नहीं जाने दिया जाता। जबकि पुलिस और वहां के सुरक्षा गार्डों की मिलीभगत के चलते कोई भी व्यक्ति भीतर आ जा सकता है। इस संबंध में जब खुद एक पत्रकार ने अपने एक साथी के साथ जांच की तो उसको सही पाया। ‘मीडिया को अंदर जाने की इजाजत नहीं है’ कहकर पत्रकारों को स्टेडियम रोका गया। जबकि वहां मौजूद अन्य लोगों को कुछ पदाधिकारियों के नाम लेने वालों को बे रोक-टोक अंदर जाने दिया गया।

यहीं नहीं जब एक टीवी पत्रकार ने आदेश को लेकर अधिकारियों से बात करना चाहा तो डीडीसीए के पदाधिकारियों ने बात तक करने से इंकार कर दिया। जबकि चुनावों के बाद यहीं पदाधिकारी अपने पत्रकार बंधुओं के माध्यम से मीडिया में खबर और फोटो लगाने की मिन्नत करते हैं।

असल में एक पत्रकार को पता चला कि डीडीसीए चुनावों में धांधली हुई है। चुनाव के लिए जहां वोट डाले जाने थे वहां आम आदमी पहुंच कर वोट डालने वाले से चुनाव चिन्ह लगाने वाले बैलेट पेपर तक लेकर खुद ही मोहर लगाने में जुटे हुए थे। यहीं नहीं चुनावों के परिणाम देखने के लिए प्रत्येक चुनाव लड़ने वालों को अपना एक अधिकारी लेने का फैसला किया गया था। मगर वहां एक नहीं चार से पांच व्यक्ति मौजूद थे। जिन्हें चुनावों में लगी पुलिस तक रोक नहीं पाई। लेकिन जब पत्रकारों को रिपोर्टिंग के लिए जाना था तो पुलिस उन्हें अपनी नौकरी पक्की कर रही थी। इस जीती जागती तस्वीर का गवाह खुदा पत्रकार बनें।

इसकी शिकायत डीडीसीए के पूर्व क्लब सचिव सुनील खन्ना ने संबंधित अधिकारियों से की है। लेकिन उनकी भी सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में यह कहना कि डीडीसीए के चुनावों में अगर धांधली हुई है तो गलत नहीं होगा।
विजय कुमार

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