
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के कला, संस्कृति एवं विकास मंत्री श्री कपिल मिश्रा ने आज उत्तर-पूर्वी दिल्ली के अप्सरा बॉर्डर से मौजपुर तक कांवड़ शिविरों की तैयारियों का जमीनी निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ चार विधायक भी मौजूद रहे। श्री मिश्रा ने अप्सरा बॉर्डर से निरीक्षण शुरू कर भोपुरा बॉर्डर, गोकुलपुरी और मौजपुर तक शिविरों का जायजा लिया और शिवभक्तों के स्वागत-सुविधाओं की व्यवस्थाओं को परखा।
मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि हर साल करोड़ों शिवभक्त दिल्ली से होकर गुजरते हैं और लाखों दिल्लीवासी स्वयं भी कांवड़ यात्रा में भाग लेते हैं। इस बार कांवड़ियों के स्वागत के लिए राजधानी में पहली बार 17 भव्य स्वागत द्वार बनाए गए हैं, जिन्हें भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों और अन्य पवित्र नामों पर रखा गया है। अप्सरा बॉर्डर पर बना स्वागत द्वार ‘महादेव द्वार’ के नाम से श्रद्धालुओं का स्वागत करेगा।
उन्होंने बताया कि इस बार दिल्ली में कुल 376 कांवड़ शिविर लगाए गए हैं, जबकि पिछले साल यह संख्या सिर्फ 170 थी। इससे साफ है कि दिल्ली सरकार शिवभक्तों की सेवा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सभी इच्छुक कांवड़ समितियों को शिविर लगाने की अनुमति दी गई है और पहली किस्त की वित्तीय सहायता भी उनके खातों में भेजी जा चुकी है।
कपिल मिश्रा ने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, दिल्ली पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और सिविल डिफेंस के विभाग मिलकर व्यवस्थाओं को संभाल रहे हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की जाएगी। शिविरों में साफ-सफाई, पेयजल, प्राथमिक उपचार, आरामगृह, बिजली, मच्छर नियंत्रण, महिला सुरक्षा और यातायात प्रबंधन पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
ट्रैफिक जाम को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को कपिल मिश्रा ने निराधार बताया। उन्होंने कहा कि कुछ इलाकों में मामूली प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन यात्रा को ट्रैफिक जाम का कारण बताना दुर्भाग्यपूर्ण है। कांवड़ियों के लिए विशेष मार्ग चिन्हित किए गए हैं और बैरिकेडिंग से व्यवस्था को दुरुस्त रखा जाएगा, जिससे आम लोगों को भी परेशानी न हो।
उन्होंने बताया कि 20 जुलाई को माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता स्वयं दिल्ली बॉर्डर पर कांवड़ियों का स्वागत करेंगी। उनके साथ सभी कैबिनेट मंत्री भी मौजूद रहेंगे। श्री मिश्रा ने कहा कि कांवड़ यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और जनसेवा की भावना को मजबूत करने का अवसर भी है, जिसे दिल्ली सरकार पूरी श्रद्धा और व्यवस्था के साथ सफल बनाएगी।