
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे शातिर ठग को गिरफ्तार किया है जो राजधानी में ज़मीन घोटाले में 95 लाख की ठगी करने के बाद हरिद्वार जाकर खुद को समाजसेवी बताकर नया जीवन जी रहा था। पकड़े गए आरोपी धर्मेंद्र अग्रवाल को दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में दर्ज ठगी के केस में भगोड़ा घोषित किया गया था और पुलिस को उसकी लंबे समय से तलाश थी।
पुलिस के मुताबिक धर्मेंद्र अग्रवाल ने 2015 में गाजियाबाद के प्रताप विहार की एक रिहायशी ज़मीन बेचने के नाम पर complainant बलेश जैन से 95 लाख रुपये ऐंठ लिए थे। आरोपी ने 1 करोड़ 5 लाख रुपये में सौदा तय कर 95 लाख रुपये तीन चेकों के ज़रिए ले लिए और बाकी 10 लाख रुपये ज़मीन के कागज़ात सौंपने के वक्त लेने की बात कही। लेकिन तय तारीख आने के बाद भी उसने न तो ज़मीन सौंपी और न ही दस्तावेज दिए।
शिकायतकर्ता ने कई बार बाकी काम पूरा करने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने बहानेबाज़ी की और बाद में कोविड का हवाला देते हुए मामला टालता रहा। जब शिकायतकर्ता ने कानूनी नोटिस भेजा तो आरोपी ने उल्टा 40 लाख रुपये और मांगे और जान से मारने की धमकी दी।
आरोपी के खिलाफ 2023 में लक्ष्मी नगर थाने में केस दर्ज हुआ लेकिन वो जांच में शामिल नहीं हुआ। आखिरकार उसे कोर्ट ने हाल ही में भगोड़ा घोषित कर दिया था।
क्राइम ब्रांच की टीम ने तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचना के आधार पर आरोपी का ठिकाना ट्रेस किया। 16 जुलाई को टीम ने हरिद्वार के बैरागी कैंप इलाके में एक आश्रम से उसे धर दबोचा। गिरफ्तारी के वक्त आरोपी खुद को ‘समाजसेवी’ बताकर धार्मिक जीवन जी रहा था और परिवार से भी कोई संपर्क नहीं रखा था ताकि उसकी पहचान उजागर न हो।
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उसने कबूला कि उसने ठगी के बाद सारा पैसा खर्च कर दिया और खुद को बचाने के लिए हरिद्वार में साधु-संतों के बीच रहने लगा। पुलिस ने उसे दिल्ली लाकर लक्ष्मी नगर थाने को सौंप दिया है और आगे की कार्रवाई जारी है।