
दिल्ली के उत्तरी जिले की साइबर थाना पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए भोले-भाले लोगों को 100% मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गैंग का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने सात आरोपियों को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से गिरफ्तार किया है।
फराशखाना इलाके की एक महिला ने साइबर थाना उत्तर में शिकायत दी थी कि उसने इंस्टाग्राम पर एक विज्ञापन देखा जिसमें निवेश पर 100% गारंटीड रिटर्न देने का दावा किया गया था। निवेश की प्रक्रिया के नाम पर महिला को टेलीग्राम चैनल पर जोड़कर अलग-अलग बैंक खातों में कई किश्तों में पैसा डलवाया गया। निवेश, अकाउंट वेरिफिकेशन, जीएसटी और पेमेंट करेक्शन के नाम पर उससे 1.23 लाख रुपये ऐंठ लिए गए, लेकिन मुनाफा देने के बजाय आरोपी गायब हो गए।
शिकायत मिलने पर इंस्पेक्टर रोहित गहलोत, एसीपी हेमंत मिश्रा के निर्देशन में एसआई तसवीर माथुर, एएसआई संदीप और एचसी विनीत की टीम ने जांच शुरू की। जांच में पता चला कि इस जालसाजी में ठगी के पैसों को ‘म्यूल अकाउंट्स’ के जरिये इधर-उधर भेजा जा रहा था। पुलिस ने सबसे पहले गाजियाबाद से अंशुमान नाथ को पकड़ा जिसने अपना कोटक बैंक अकाउंट ठगी के लिए गिरोह को दिया था।
अंशुमान की निशानदेही पर पुलिस ने उसके साथी ध्रुव अग्रवाल को भी गाजियाबाद से पकड़ा। पूछताछ में ध्रुव ने यथार्थ बंसल का नाम बताया जो पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था। पुलिस ने फिर यूपी के कासगंज में छापा मारकर यथार्थ बंसल और उसके चार साथी गौरव वर्मा, आदर्श कुमार, राहुल उर्फ हरदेव और कुलदीप को भी गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के दौरान इनसे 11 मोबाइल फोन, 17 सिम कार्ड, 9 एटीएम कार्ड, 1 बैंक पासबुक और 1.39 लाख रुपये नकद बरामद हुए। पूछताछ में सभी ने कबूल किया कि सोशल मीडिया पर झांसा देकर लोगों से पैसे मंगवाए जाते थे और फिर म्यूल अकाउंट्स के जरिये रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर निकाल ली जाती थी। इसके बदले में गैंग के सदस्य कमीशन पाते थे।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने टेक्नोलॉजी और फर्जी सिम, एटीएम कार्ड के सहारे लंबे समय तक ठगी को अंजाम दिया। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि इस तरह के लालच भरे विज्ञापनों से बचें और किसी भी निवेश के पहले उसकी सच्चाई जरूर जांचें।