दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नंद नगरी इलाके में संगठित अपराधी गिरोह का संचालन कर रही कुख्यात महिला अपराधी सुनीता (53 वर्ष) पत्नी विनोद को गिरफ्तार कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। सुनीता पर एनडीपीएस और आबकारी अधिनियम के कई गंभीर मामले दर्ज हैं और वह लंबे समय से फरार चल रही थी। उस पर मकोका सहित कई मामलों में गिरफ्तारी वारंट जारी था और अदालत ने उसे फरार घोषित कर दिया था।
जानकारी के अनुसार, सुनीता पिछले 30 सालों से नंद नगरी में अवैध गांजा, स्मैक और शराब की सप्लाई का नेटवर्क चला रही थी। उसके खिलाफ 1992 से लेकर अब तक तीन दर्जन से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। अदालत ने 2021 और 2025 में उसे फरार घोषित किया था, वहीं कई मामलों में कार्यवाही धारा 82 सीआरपीसी भी जारी की गई थी।
पुलिस ने बताया कि सुनीता संगठित गिरोह का हिस्सा थी, जो न केवल दिल्ली बल्कि आसपास के इलाकों में भी नशे का कारोबार करता था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार ठिकाने बदलती रहती थी। कभी नाम बदल लेती, तो कभी पहचान छुपाकर रिश्तेदारों के घरों में रुक जाती थी। यहां तक कि वह अपनी बेटी के घर भी केवल खास मौकों पर और रात के समय ही जाती थी।
पुलिस टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि सुनीता पश्चिमी दिल्ली के वीरेंद्र नगर इलाके में अपने साथियों से मिलने आएगी। सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर पवन सिंह के नेतृत्व में टीम ने जाल बिछाया और आरोपी को दबोच लिया। गिरफ्तारी के दौरान सुनीता ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन तकनीकी निगरानी और सतर्कता से उसे काबू में कर लिया गया।
पुलिस पूछताछ में पता चला कि सुनीता महज चौथी कक्षा तक पढ़ी है। शादी के बाद उसने अपने पति के साथ मिलकर अवैध शराब बेचनी शुरू की और धीरे-धीरे नशे के कारोबार में सक्रिय हो गई। उसकी संलिप्तता इतनी गहरी हो गई कि उसे नंद नगरी थाने का बैड कैरेक्टर घोषित कर दिया गया था। हैरानी की बात यह है कि उसके बच्चे भी अब नशे के मामलों में लिप्त पाए गए हैं।
डीसीपी (क्राइम ब्रांच) हर्ष इंदोरा ने बताया कि आरोपी सुनीता का गिरफ्तारी से बचना और लगातार ठिकाने बदलना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी। लेकिन क्राइम ब्रांच टीम की सूझबूझ और मेहनत से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। यह कार्रवाई संगठित अपराध और नशे के कारोबार के खिलाफ दिल्ली पुलिस की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है






