दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 26 साल से कानून से आंख-मिचौली खेल रहे कुख्यात अपहरणकर्ता और हत्यारे को आखिरकार दबोच लिया है। आरोपी राज किशोर उर्फ बड़े लल्ला, जो कभी दर्जी था, ने 1993 में एक व्यापारी के 8 साल के मासूम बेटे का अपहरण कर 30 हजार रुपये फिरौती वसूलने के बाद बेरहमी से हत्या कर दी थी। उसने बच्चे की लाश कल्याणपुरी के नाले में फेंक दी थी। इस सनसनीखेज मामले में उसे 1996 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन 1999 में हाई कोर्ट से छह हफ्ते की पैरोल पर बाहर आया और फिर दोबारा जेल नहीं लौटा।
26 साल से पुलिस और कोर्ट की नजरों से बचते-बचाते वह कभी पटना, कभी जयपुर, तो कभी पंजाब के बरनाला में छिपकर रहता रहा। कोरोना काल में वह अपने पैतृक गांव कानपुर देहात लौट आया और वहां दर्जी की दुकान खोलकर सामान्य जिंदगी जीने लगा। मगर दिल्ली पुलिस की एआरएससी टीम ने हार नहीं मानी। एसीपी पंकज अरोड़ा की निगरानी और इंस्पेक्टर मंगेश त्यागी व रोबिन त्यागी के नेतृत्व में टीम ने आरोपी की हरकतों पर लगातार नजर रखी। हेड कांस्टेबल मिन्टू यादव को मिली गुप्त सूचना से पुलिस को उसके ठिकाने का सुराग मिला।
कई दिनों की कड़ी निगरानी, तकनीकी सर्विलांस और लगातार छापेमारी के बाद पुलिस टीम ने उसे कानपुर से बाहर निकालने में कामयाबी पाई और आखिरकार 2 अगस्त को गाजियाबाद के खोड़ा कॉलोनी से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी में 10 से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने दो महीने तक लगातार ऑपरेशन चलाया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि राज किशोर ने फरारी के दौरान अपनी पहचान छुपाने के लिए अलग-अलग राज्यों में जगह बदली और दर्जी बनकर शांत जिंदगी जीने का नाटक करता रहा।
क्राइम ब्रांच की इस कामयाबी ने साफ कर दिया है कि अपराध कितना भी पुराना हो, कानून के लंबे हाथ आखिरकार अपराधी तक पहुंच ही जाते हैं। दिल्ली पुलिस की इस मेहनत से न सिर्फ पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद फिर से मिली है, बल्कि ऐसे अपराधियों के लिए भी कड़ा संदेश गया है कि भागकर बचा नहीं जा सकता।





