स्कूल ऑफ फिजियोथेरेपी (SoP) डीपीएसआरयू द्वारा महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन

( विजय गौड़ ब्यूरो चीफ ) स्कूल ऑफ फिजियोथेरेपी (SoP) डीपीएसआरयू द्वारा स्ट्रोक पुनर्वास पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला BPT 8वीं सेमेस्टर और MPT छात्रों के लाभ के लिए आयोजित की गई थी, जिसे माननीय वाइस चांसलर प्रो. रविचंद्रन वी. और ऑफग. रजिस्ट्रार डॉ. रामचंदर खत्री के सक्षम मार्गदर्शन और सहयोग से आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम G.K. नारायणन ऑडिटोरियम, DPSRU में आयोजित किया गया था, और इसे डॉ. शीतल कालरा, एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रमुख, SoP और डॉ. पारुल शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, SoP द्वारा समन्वित किया गया। कार्यशाला में फैकल्टी सदस्यों, जिसमें प्रो. ऋचा एच. राय, डॉ. सविता तामरिया, डॉ. सपना धीमन, डॉ. जितेंद्र मुंझल, डॉ. रविंदर कुमार और डॉ. हेमलता शामिल थे, की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अत्यधिक सूचनात्मक और व्यावहारिक सत्र के लिए कुल 70 छात्रों ने पंजीकरण कराया, जिसका उद्देश्य स्ट्रोक पुनर्वास में नई प्रगति से प्रतिभागियों को जागरूक करना था। कार्यशाला के उद्देश्य कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्ट्रोक पुनर्वास के बारे में जागरूकता बढ़ाना और इस क्षेत्र में हाल की प्रगति के बारे में विस्तृत समझ प्रदान करना था। कार्यशाला ने छात्रों को स्ट्रोक उपचार और पुनर्वास के महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में शिक्षित करने की कोशिश की, जिसमें मरीजों के परिणामों और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए पुनर्वास के महत्व को उजागर किया गया। मुख्य वक्ता इस कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. जयप्रकाश जयवेलू, चीफ फिजियोथेरेपिस्ट, नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, गुरुग्राम और धर्मशील नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली थे। डॉ. जयप्रकाश जयवेलू ने अपने विशाल अनुभव और विशेषज्ञता के साथ स्ट्रोक पुनर्वास में नवीनतम तकनीकों और पद्धतियों पर अमूल्य जानकारियाँ साझा कीं। कार्यशाला का एजेंडा कार्यशाला में स्ट्रोक पुनर्वास के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं का संयोजन किया गया। सत्रों का विवरण इस प्रकार था: • स्ट्रोक पुनर्वास का परिचय: स्ट्रोक पुनर्वास के महत्व पर एक अवलोकन, जो रिकवरी प्रक्रिया में आवश्यक है। • स्ट्रोक पुनर्वास में नवीनतम प्रगति: स्ट्रोक पुनर्वास में नवीनतम तकनीकों और पद्धतियों पर एक सत्र। • स्ट्रोक के लक्षण और संकेत: स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों और संकेतों को पहचानने और उचित आपातकालीन प्रतिक्रिया पर जानकारी। • हैंड्स-ऑन सत्र: छात्रों के साथ व्यावहारिक सत्र, जिसमें असली स्ट्रोक रोगियों को शामिल किया गया, जिससे छात्रों को स्ट्रोक पुनर्वास तकनीकों का वास्तविक अनुभव हुआ। • चर्चा और प्रश्नोत्तरी: डॉ. जयप्रकाश जयवेलू के साथ एक इंटरएक्टिव सत्र, जिसमें छात्रों को स्ट्रोक पुनर्वास पद्धतियों पर सवाल पूछने और चर्चाओं में भाग लेने का अवसर मिला। कार्यशाला का अंतिम परिणाम स्ट्रोक पुनर्वास कार्यशाला पूरी तरह से सफल रही। इसने छात्रों और फैकल्टी को स्ट्रोक पुनर्वास में नवीनतम विकास के बारे में न केवल शिक्षित किया बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया, जो छात्रों के भविष्य के करियर में सहायक होगा। इस प्रकार के कार्यक्रम स्वास्थ्य देखभाल के महत्वपूर्ण मुद्दों को समझने और भविष्य के स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों के कौशल को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अंततः, यह कार्यशाला ज्ञान साझा करने, नई प्रगति पर चर्चा करने, और स्ट्रोक पुनर्वास से संबंधित व्यावहारिक कौशल को निखारने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई, जो भविष्य में स्ट्रोक रोगियों के उपचार और पुनर्वास परिणामों में सुधार में महत्वपूर्ण योगदान करेगी।

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