किसानों की उपज को खराब होने से बचाने और बाजार में उनकी पकड़ मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (EESL) ने हिमाचल प्रदेश सरकार के बागवानी विभाग के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत EESL को राज्य का नामित एजेंसी घोषित किया गया है जो राज्यभर में 10 मीट्रिक टन तक की क्षमता वाले सौर ऊर्जा चालित माइक्रो कोल्ड स्टोरेज (SPMCS) स्थापित करेगी।
यह साझेदारी न केवल किसानों को खेत स्तर पर कोल्ड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध कराएगी, बल्कि उन्हें मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) की योजनाओं से भी जोड़ने में मदद करेगी। EESL की तकनीकी और व्यावसायिक मॉडल विशेषज्ञता के साथ यह पहल किसानों के लिए एक मजबूत सहयोगी साबित होगी।
हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग का लक्ष्य हर महीने लगभग 5000 मीट्रिक टन की क्षमता की मांग उत्पन्न करना है, जिससे किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य मिल सके और वे मजबूरी में फसल औने-पौने दामों में बेचने को विवश न हों।

EESL के वरिष्ठ महाप्रबंधक श्री अनिल कुमार चौधरी के नेतृत्व में देशभर में पहले से सफल पायलट परियोजनाएं संचालित की जा चुकी हैं, और अब हिमाचल प्रदेश के अनुभवों के आधार पर इसे देश के अन्य राज्यों में भी लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य न केवल पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस को कम करना है, जो कि केवल फलों और सब्जियों के क्षेत्र में ही हर साल लगभग 6140 करोड़ रुपये का नुकसान करता है, बल्कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को भी घटाना है।
अगले पांच वर्षों में इस परियोजना के अंतर्गत देशभर में 2.6 लाख से अधिक यूनिट्स की स्थापना की संभावना है, जिससे कोल्ड चेन को मजबूती मिलेगी और कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति का सूत्रपात होगा।
यह समझौता ज्ञापन EESL के सीजीएम श्री अनिल कुमार चौधरी और हिमाचल प्रदेश के बागवानी निदेशक श्री विनय कुमार, आईएएस के बीच, बागवानी सचिव श्री सी. पॉलरसु, आईएएस की उपस्थिति में हुआ।
यह कदम न केवल हिमाचल के किसानों को सशक्त बनाएगा, बल्कि भारत की कृषि प्रणाली को टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल दिशा में भी ले जाएगा।





