दिल्ली विश्वविद्यालय में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “मानवता के लिए श्रीरामचरितमानस” का सफल आयोजन

दिल्ली: संस्कृति संज्ञान एवं हिंदू अध्ययन केंद्र, दिल्ली विश्वविद्यालय ने 23 अगस्त 2024 को विश्वविद्यालय के सम्मेलन कक्ष में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “मानवता के लिए श्रीरामचरितमानस” का आयोजन किया। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य श्रीरामचरितमानस के विभिन्न आयामों को उजागर करना और समाज में इसके महत्व को पुनर्स्थापित करना था।

उद्घाटन सत्र में आदरणीय श्री गजेंद्र सिंह शेखावत जी, केंद्रीय संस्कृति मंत्री, भारत सरकार ने मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होकर संगोष्ठी का शुभारंभ किया। उनके साथ श्री संतोष तनेजा, अध्यक्ष संकल्प फाउंडेशन, श्री अनिल गुप्ता, दिल्ली प्रांत कार्यवाहक, प्रोफेसर बलराम पाणी, डीन दिल्ली विश्वविद्यालय, श्री लक्ष्मी नारायण भाला, वरिष्ठ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रचारक, और डॉ. प्रदीप कुमार सिंघल, अध्यक्ष संस्कृति संज्ञान ने श्रीरामचरितमानस के विविध आयामों पर प्रभावशाली उद्बोधन दिया। इन सभी वक्ताओं ने सम्मेलन कक्ष में उपस्थित छात्रों और अतिथियों को श्रीरामचरितमानस का नित्य पाठ करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस सत्र का संचालन प्रोफेसर प्रेरणा मल्होत्रा ने बहुत ही सुंदर और आकर्षक ढंग से किया।

संगोष्ठी के दूसरे सत्र में संस्कृति संज्ञान संस्था द्वारा आयोजित अर्चक प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तीर्ण हुए पुजारियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। आदरणीय मंचासीन अतिथियों ने पुजारियों को सम्मानित कर उनके प्रयासों की सराहना की।

तीसरे सत्र में भारतवर्ष के विभिन्न विश्वविद्यालयों और विद्यालयों से आए प्रोफेसर्स एवं स्कॉलर्स ने श्रीरामचरितमानस के विविध आयामों पर 70 से ज्यादा शोध पत्र प्रस्तुत किए। इन शोध पत्रों में श्रीरामचरितमानस के साहित्यिक, धार्मिक, और सांस्कृतिक महत्व पर गहन चर्चा की गई।

संगोष्ठी के समापन सत्र को प्रोफेसर अजय कुमार भागी, मोनिका अरोड़ा, और प्रोफेसर सविता राय ने संबोधित किया। इस अवसर पर श्रीरामचरितमानस के दोहों और चौपाइयों की प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय, और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को पुरस्कृत और सम्मानित किया गया। संगोष्ठी के दौरान स्मारिका “मानवता के लिए श्रीरामचरितमानस” का भी लोकार्पण किया गया, जिसे संस्कृति संज्ञान संस्था द्वारा प्रकाशित किया गया है।

इस कार्यक्रम में 500 से अधिक छात्रों, प्राध्यापकों, स्कॉलर्स, पुजारियों, और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। संगोष्ठी का समापन श्रीरामचरितमानस के प्रति नई जागरूकता और समर्पण के संकल्प के साथ हुआ।

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