‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 14.84 करोड़ की ठगी करने वाला अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह ध्वस्त, तीन राज्यों से 8 आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की IFSO (इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस) यूनिट ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर बुजुर्गों को डराकर करोड़ों की ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह का संचालन कंबोडिया और नेपाल से किया जा रहा था, जबकि भारत में इसके नेटवर्क के जरिए म्यूल बैंक अकाउंट्स के माध्यम से ठगी की रकम को इधर-उधर किया जाता था। कार्रवाई के दौरान गुजरात, उत्तर प्रदेश और ओडिशा से कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

यह मामला तब सामने आया जब 77 वर्षीय पीड़िता को 24 दिसंबर 2025 को एक फोन कॉल आया, जिसमें बताया गया कि उनके नाम से जारी एक सिम कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद उन्हें व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर फर्जी CBI और पुलिस अधिकारी बनकर लोगों ने डराया, नकली गिरफ्तारी वारंट दिखाया और फर्जी कोर्ट की कार्यवाही कराई। पीड़िता और उनके पति को लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया और किसी से संपर्क न करने की धमकी दी गई। यहां तक कहा गया कि अगर उन्होंने किसी को बताया तो दोनों को मार दिया जाएगा।

डर और मानसिक दबाव में आकर पीड़िता ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट और शेयर निवेश की रकम सहित कुल 14 करोड़ 84 लाख 26 हजार 954 रुपये आठ अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए आरोपियों द्वारा बताए गए तथाकथित “RBI मैनडेटेड अकाउंट” में ट्रांसफर कर दिए। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि जांच के बाद पूरी रकम वापस कर दी जाएगी, लेकिन यह सब एक सोची-समझी ठगी थी।

10 जनवरी 2026 को इस संबंध में थाना स्पेशल सेल, IFSO में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल ट्रेल और बैंक अकाउंट्स की गहन पड़ताल के बाद पुलिस की टीम आरोपियों तक पहुंची। सबसे पहले गुजरात के वडोदरा से पटेल दिव्यांग को गिरफ्तार किया गया, जिसके खाते में सीधे 4 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए थे। इसके बाद शितोले कृतिक, महावीर शर्मा उर्फ नील, अंकित मिश्रा उर्फ रॉबिन, अरुण कुमार तिवारी, प्रद्युम्न तिवारी उर्फ एसपी तिवारी, भूपेंद्र मिश्रा और आदेश कुमार सिंह को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया।

जांच में सामने आया कि सभी आरोपी म्यूल बैंक अकाउंट्स उपलब्ध कराने और उनमें ठगी की रकम को लेयरिंग के जरिए इधर-उधर करने का काम कर रहे थे। ये सभी अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के लिए फाइनेंशियल फेसीलिटेटर की भूमिका निभा रहे थे।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई मोबाइल फोन और चेक बुक बरामद की हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह एक संगठित, अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ साइबर अपराध नेटवर्क है, जिसमें सरकारी एजेंसियों का रूप धारण कर लोगों को मानसिक रूप से तोड़कर ठगा जाता है।

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे ‘डिजिटल अरेस्ट’, फर्जी CBI या पुलिस अधिकारी बनकर की जाने वाली कॉल्स से सावधान रहें। कोई भी सरकारी एजेंसी कभी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती। ऐसे किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज की तुरंत पुलिस को सूचना दें।

  • Leema

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