दिल्ली विधानसभा में जल एवं पीडब्ल्यूडी मंत्री Parvesh Sahib Singh ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी Comptroller and Auditor General of India की रिपोर्ट पर गंभीर बयान देते हुए साफ कर दिया कि अब राजधानी में जल संकट, सीवर व्यवस्था और यमुना की सफाई को लेकर बड़े और समयबद्ध कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्षों से चली आ रही खामियों को अब सुधारने का वक्त आ गया है और सरकार ठोस योजना के साथ आगे बढ़ रही है।
मंत्री ने विधानसभा में हुई चर्चा का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों से आए विधायकों ने पानी, सीवर और बुनियादी सुविधाओं की समस्याओं को मजबूती से उठाया, जो सीधे जनता की परेशानियों को दर्शाता है। हालांकि उन्होंने इस अहम मुद्दे पर विपक्ष की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जवाबदेही के समय सदन से दूरी बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
CAG रिपोर्ट के निष्कर्षों को सामने रखते हुए मंत्री ने बताया कि दिल्ली में जल प्रबंधन और सीवेज ट्रीटमेंट के लिए लंबे समय तक कोई ठोस वैज्ञानिक योजना नहीं बनी। यही वजह है कि आज भी बड़ी मात्रा में बिना उपचारित सीवेज Yamuna River में गिर रहा है, जिससे प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हजारों कॉलोनियां अब तक सीवर नेटवर्क से नहीं जुड़ी हैं और कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर्यावरण मानकों पर खरे नहीं उतर रहे।
जल संकट पर बोलते हुए मंत्री ने बताया कि दिल्ली को करीब 1200 MGD पानी की जरूरत है, जबकि आपूर्ति करीब 1000 MGD ही है। लेकिन असली समस्या केवल कमी नहीं, बल्कि खराब प्रबंधन और भारी लीकेज है। उन्होंने कहा कि जहां दुनिया में पानी का नुकसान करीब 15% होता है, वहीं दिल्ली में यह 50% तक पहुंच गया है, जो सिस्टम की बड़ी विफलता को दर्शाता है।
यमुना की सफाई को लेकर सरकार ने बड़ा रोडमैप तैयार किया है। मंत्री ने कहा कि अगर बिना ट्रीटमेंट के गिरने वाले सीवेज को रोक दिया जाए तो यमुना खुद ही साफ हो सकती है। इसके लिए नए और अपग्रेडेड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे, जिससे आने वाले ढाई साल में ट्रीटमेंट क्षमता जरूरत से ज्यादा हो जाएगी। साथ ही बड़े नालों के ट्रीटमेंट और निगरानी पर भी सख्ती बरती जाएगी।
सीवर नेटवर्क को मजबूत करने के लिए सरकार ने 400 से ज्यादा कॉलोनियों में काम शुरू कर दिया है और सभी अनधिकृत कॉलोनियों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले एक साल में 180 किलोमीटर से ज्यादा नई सीवर लाइन बिछाई जा चुकी है। मंत्री ने यह भी कहा कि अब सेप्टिक टैंक माफिया पर लगाम लगाई जाएगी और सीवेज निपटान के लिए पारदर्शी डिजिटल सिस्टम लागू किया जाएगा।
पीने के पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए नए प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू किया गया है और अतिरिक्त क्षमता जोड़ी जा रही है। साथ ही ट्रीटेड पानी के पुनः उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे ताजे पानी पर निर्भरता कम होगी।
अपने संबोधन के अंत में मंत्री ने साफ कहा कि दिल्ली में पानी की कमी नहीं, बल्कि योजना की कमी रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में बेहतर योजना, जवाबदेही और तेज क्रियान्वयन के जरिए राजधानी के जल और सीवर सिस्टम में बड़ा बदलाव नजर आएगा।






