हॉल नंबर 1, प्रगति मैदान – 14 से 18 नवंबर तक व्यापारियों के लिए, उसके बाद आम जनता के लिए खुला
प्रगति मैदान में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में इस बार दुनिया भर की कला, संस्कृति और व्यापार का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। हॉल नंबर 1 में लगी विदेशी चीनी मिट्टी का स्टॉल मेले का विशेष आकर्षण बनी हुई है। यहाँ प्रदर्शित रंग-बिरंगे और मनमोहक बर्तन, सजावटी प्लेटें, पॉटरी और नज़र बट्टू जैसी वस्तुएँ दर्शकों को विदेशी कारीगरी की एक अनोखी दुनिया में ले जाती हैं।
इस स्टॉल पर मौजूद विदेशी कारीगर अपनी पारंपरिक कला को बेहद खूबसूरती के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं।
दीवारों पर टंगे रंगीन प्लेट्स और सजावटी डिज़ाइनों में जहाँ सांस्कृतिक विरासत झलकती है, वहीं टेबल पर रखे जग, कटोरे, शोपीस और मिट्टी के बर्तनों में बारीक नक्काशी और शानदार ग्लेज़िंग तकनीक देखने को मिलती है।
विशेष रूप से नीले रंग के ‘नज़र बट्टू’ और आकर्षक पॉटरी लोगों का ध्यान खूब खींच रहे हैं।
भारतीय निर्माताओं के लिए सीख और प्रेरणा
चीनी मिट्टी के इन बर्तनों की सुंदरता का बड़ा कारण इनके अनोखे रंग, पैटर्न और उच्च गुणवत्ता का ग्लेज़ है।
भारतीय पॉटरी दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन इस विदेशी कारीगरी से भारतीय निर्माता यह सीख सकते हैं कि आधुनिक तकनीक, बोल्ड कलर कॉम्बिनेशन और यूनिक डिज़ाइन अपनाकर अपने उत्पादों को और वैश्विक बनाया जा सकता है।
भारत में भी ऐसे आकर्षक और मनभावन बर्तन, पॉटरी और नज़र बट्टू तैयार किए जा सकते हैं जिनकी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी मांग है।
यह प्रदर्शनी 14 से 18 नवंबर तक व्यापारियों के लिए विशेष रूप से खुली है, ताकि वे विदेशी कारीगरों से मिलकर नए व्यापारिक अवसर तलाश सकें, तकनीकी जानकारी ले सकें और कलात्मक सहयोग पर चर्चा कर सकें।
18 नवंबर के बाद यह प्रदर्शनी आम जनता के लिए खोली जाएगी, ताकि कला प्रेमी और खरीदार भी इस अनोखे अनुभव का आनंद ले सकें।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले का यह चीनी मिट्टी का स्टॉल सिर्फ उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और रचनात्मकता का वैश्विक मिलन है।
विदेशी कारीगरी से प्रेरणा लेकर भारतीय कलाकार और निर्माता भी अपने उत्पादों को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।
दिल्ली से रेश्मा अफरीदी की रिपोर्ट







