माननीय श्री न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव, न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय एवं कार्यकारी अध्यक्ष, डीएसएलएसए, तथा श्री राजीव बंसल, माननीय सदस्य सचिव, डीएसएलएसए के कुशल मार्गदर्शन में 05 अप्रैल 2026 को दिल्ली के सभी जिला न्यायालय परिसरों में केवल यातायात चालानों के निस्तारण हेतु एक विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया।
यातायात चालानों की बड़ी संख्या को देखते हुए यह आवश्यक था कि निस्तारण की प्रक्रिया आम जनता, लोक अदालत की पीठों तथा न्यायालय स्टाफ के लिए सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाई जाए। इसी उद्देश्य से डिजिटल लोक अदालत पोर्टल विकसित किया गया, जो डीएसएलएसए, दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) तथा दिल्ली यातायात पुलिस के संयुक्त प्रयास का परिणाम है।
आज आयोजित विशेष लोक अदालत में श्री गुरविंदर पाल सिंह, माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दक्षिण जिला, तथा सुश्री निवेदिता अनिल शर्मा, माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दक्षिण-पूर्व जिला, ने सुश्री तन्वी खुराना, माननीय विशेष सचिव, डीएसएलएसए के साथ मिलकर वादकारियों के लिए की गई व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने साकेत जिला न्यायालय में लोक अदालत पीठों का दौरा कर उनकी कार्यप्रणाली देखी तथा वादकारियों से बातचीत कर उनके मामलों और समस्याओं की जानकारी ली।
इसी प्रकार, श्री अभिनव पांडेय, माननीय अतिरिक्त सचिव ने कड़कड़डूमा न्यायालय परिसर का दौरा कर पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और शाहदरा जिलों की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। सुश्री भारती गर्ग, सचिव (वाद-विवाद) ने रोहिणी न्यायालय परिसर में उत्तर और उत्तर-पश्चिम जिलों की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया तथा सुश्री स्वाति भारद्वाज, सचिव (विधिक सहायता) ने तीस हजारी न्यायालय परिसर में मध्य और पश्चिम जिलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। सभी अधिकारियों ने लोक अदालत पीठों का निरीक्षण किया, न्यायिक अधिकारियों से संवाद किया तथा वादकारियों से भी उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।
डीएसएलएसए को आशा है कि यह पहल दिल्ली के नागरिकों को बेहतर और त्वरित न्याय सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होगी। इससे न केवल यातायात चालानों के लंबित मामलों में कमी आएगी, बल्कि निस्तारण की स्थिति को समय पर अपडेट करने में भी सुविधा होगी।
आज की यह विशेष लोक अदालत न्यायिक नवाचार और तकनीक के प्रभावी उपयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण रही। प्रतिभागियों ने पारंपरिक लोक अदालतों में लगने वाली लंबी कतारों की तुलना में डिजिटल प्रक्रिया को अधिक आसान और सुविधाजनक बताया। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस पोर्टल पर तुरंत अपडेट और SMS द्वारा पुष्टि मिलने से लोगों को बार-बार फॉलो-अप करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। न्यायिक अधिकारियों ने इस व्यवस्था की कार्यकुशलता की सराहना की, वहीं न्यायालय स्टाफ ने भी कई दिनों तक चलने वाले मैनुअल अपडेट के बोझ से राहत महसूस की। प्रारंभ में कुछ छोटी तकनीकी समस्याएं आईं, लेकिन कुल मिलाकर यह प्रणाली अत्यंत सफल रही। यह पहल भविष्य में अन्य प्रशासनिक और न्यायिक क्षेत्रों में भी डिजिटल व्यवस्था लागू करने के लिए एक उदाहरण मॉडल के रूप में कार्य कर सकती है।
डीएसएलएसए ने यह भी सुनिश्चित किया कि किसी भी न्यायालय परिसर में भीड़भाड़ न हो। आम जनता की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क, व्हीलचेयर, रैंप, शौचालय और पीने के पानी जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। सुरक्षित एवं सुचारु व्यवस्था के लिए पर्याप्त पुलिस एवं सुरक्षा प्रबंध भी किए गए। प्रत्येक न्यायालय परिसर के प्रवेश द्वार पर विशेष हेल्प डेस्क स्थापित किए गए, ताकि लोक अदालत में आने वाले लोगों को आवश्यक जानकारी और सहायता तुरंत मिल सके।
दिल्ली के सभी सात जिला न्यायालय परिसरों में कुल 1,20,742 यातायात चालानों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया तथा ₹ 1.88 करोड़ की जुर्माना राशि प्राप्त हुई।
नई दिल्ली से विजय गौड़ की विशेष रिपोर्ट






