दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल श्री विनय कुमार सक्सेना ने 1 दिसंबर 2025 को रोहिणी स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) का दौरा किया और नई आपराधिक विधियों के सुचारु कार्यान्वयन के मद्देनज़र प्रयोगशाला में हो रहे तकनीकी व संरचनात्मक विकास की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक साक्ष्य किसी भी आपराधिक जांच की रीढ़ होते हैं और इनके समयबद्ध विश्लेषण से राजधानी में त्वरित, पारदर्शी और विज्ञान-आधारित न्याय सुनिश्चित होता है।
दौरे के दौरान उपराज्यपाल ने प्रयोगशाला के अधोसंरचना, अत्याधुनिक तकनीक, कार्यप्रवाह और आधुनिकीकरण परियोजनाओं का जायजा लिया। उन्होंने विभिन्न प्रभागों—बायो/DNA, साइबर फोरेंसिक्स, बैलिस्टिक्स, केमिस्ट्री और टॉक्सिकोलॉजी—के वैज्ञानिकों से बातचीत कर उनकी चुनौतियों व आवश्यकताओं को समझा। विशेष रूप से POCSO मामलों के शीघ्र निस्तारण और लंबित मामलों को समयबद्ध रूप से पूरा करने की दिशा में की जा रही प्रगति पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
उपराज्यपाल ने प्रयोगशाला की कार्यक्षमता की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि नए भारतीय न्याय संहिताओं (BNS) के तहत बढ़ती फोरेंसिक मांगों को पूरा करने में FSL की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने वैज्ञानिकों को जनहित व राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उनके समर्पण, दक्षता और ईमानदार प्रयासों के लिए बधाई दी।
प्रयोगशाला के प्रधान निदेशक डॉ. अनिल अग्रवाल (IAS) ने इस अवसर पर कहा कि FSL दिल्ली हमेशा उच्चतम वैज्ञानिक उत्कृष्टता के मानकों पर कार्य करती है। यहाँ प्रत्येक साक्ष्य का परीक्षण अत्यधिक सूक्ष्मता और प्रोफेशनलिज़्म के साथ किया जाता है। आधुनिक तकनीक, कुशल विशेषज्ञता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की बदौलत जटिल मामलों को तेजी से सुलझाया जाता है, जिससे दिल्लीवासियों को सुरक्षित परिवेश और न्यायसंगत व्यवस्था सुनिश्चित होती है।





