कोविड काल में जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना में 145 करोड़ का घोटाला, पूर्व आप सरकार पर गंभीर आरोप

नई दिल्ली। दिल्ली के गृह, शिक्षा एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री आशिष सूद और एससी/एसटी कल्याण मंत्री श्री रविंद्र इंद्राज सिंह ने बुधवार को दिल्ली सचिवालय में संयुक्त प्रेस वार्ता कर पूर्व आम आदमी पार्टी सरकार पर 145 करोड़ रुपये के घोटाले का बड़ा आरोप लगाया। यह घोटाला कोविड काल में ‘जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना’ के तहत हुआ बताया गया है।

श्री आशिष सूद ने खुलासा किया कि माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता की सिफारिश पर उपराज्यपाल श्री विनय कुमार सक्सेना ने इस पूरे घोटाले की जांच के लिए एंटी करप्शन ब्रांच को निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि आप सरकार ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के नाम का राजनीतिक फायदा उठाकर दलित बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया।

जय भीम योजना का उद्देश्य था कि एससी/एसटी/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस/अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों को यूपीएससी, एसएससी, डीएसएसएसबी, नीट, क्लैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग मुफ्त में दी जाए। लेकिन इस योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ। श्री सूद ने बताया कि कई आवेदन बिना दस्तावेजों और हस्ताक्षरों के पास किए गए। कई कोचिंग संस्थानों ने 100% फर्जी दावे पेश किए।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर के नाम पर घोटाला करने वालों को एक-एक पैसे का हिसाब देना होगा। आप पार्टी ने दलित समाज को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया, सच्चे सशक्तिकरण के लिए कुछ नहीं किया।

श्री सूद ने बताया कि योजना 2018 में शुरू की गई थी। पहले वर्ष 4,900 छात्रों को कोचिंग मिलनी थी, 2019 में यह संख्या घटकर 2,071 हो गई। लेकिन कोविड संकट के दौरान, जब देश आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा था, तब आप नेताओं ने कोचिंग माफिया के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा किया। योजना के लिए 15 करोड़ का बजट था, लेकिन जुलाई 2021 से अगस्त 2022 के बीच कोचिंग संस्थानों ने 145 करोड़ रुपये के बिल लगा दिए।

जांच में सामने आया कि संस्थानों ने 13,000 छात्रों का डेटा दिया लेकिन सिर्फ 3,000 का ही सत्यापन हो पाया। शेष छात्रों के नाम का कोई रिकॉर्ड नहीं था। श्री सूद ने कहा कि यदि सारे सत्यापित छात्रों को सबसे महंगी कोचिंग दी गई होती, तब भी खर्च 30 करोड़ से ज्यादा नहीं होना चाहिए था, ऐसे में 145 करोड़ का बिल पूरी तरह अवैध है।

एससी/एसटी कल्याण मंत्री श्री रविंद्र इंद्राज सिंह ने कहा कि योजना का मकसद था दलित छात्रों को ऊंची शिक्षा और करियर में आगे बढ़ाना लेकिन पूर्व सरकार ने इस नेक पहल को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया। करीब 35 कोचिंग संस्थानों की जांच चल रही है, जिनमें से कई 100 छात्रों का भी वेरिफाइड डेटा नहीं दे पाए।

अब एंटी करप्शन ब्रांच पूरे घोटाले की जांच करेगी और दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी।

  • Leema

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